मीडिया इंडस्ट्री से लगातार अशुभ खबरें आ रही हैं. आउटलुक ग्रुप में मंदी बंदी और छंटनी का सिलसिला जारी है. तीन मैग्जीनों की बंदी और वहां कार्यरत इंप्लाइज को निकालने के बाद प्रबंधन ने अब बिजनेस मैग्जीन 'आउटलुक मनी' को मंथली कर दिया है. पहले यह मैग्जीन पंद्रह दिन पर यानि पाक्षिक निकलती थी. मैग्जीन के मंथली किए जाने के साथ-साथ मैनेजमेंट ने करीब डेढ़ दर्जन लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इनमें से एक दर्जन से ज्यादा लोग संपादकीय के हैं और बाकी एकाउंट व अन्य विभागों के. सूत्रों का कहना है कि अगर इस कवायद के बाद भी बिजनेस मैग्जीन आउटलुक मनी की हालत नहीं सुधरी तो प्रबंधन इसे बंद करने का रास्ता अपना सकता है.
बात सिर्फ 'आउटलुक मनी' तक सीमित नहीं है. एबीपी यानि आनंद बाजार पत्रिका ग्रुप वालों की बिजनेस मैगजीन 'बिजनेस वर्ल्ड' पर भी प्रकाशन बंद होने का खतरा मंडरा रहा है. इस मैग्जीन का सरकुलेशन तेजी से गिरा है. इसे वीकली से पाक्षिक कर दिया गया है. प्रबंधन अभी कोशिश कर रहा है कि यह मैग्जीन किसी और के हाथों बिक जाए. ऐसा नहीं हुआ तो इसे बंद किया जा सकता है. इस मैग्जीन का प्रकाशन 1981 में शुरू हुआ था. देश में मैगजीन इंडस्ट्री लगभग 1650 करोड़ रुपये का है और इसमें बिजनेस मैगजीन का हिस्सा 400 करोड़ रुपये है. डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से मैगजीन इंडस्ट्री की सांस उखड़ रही है.





