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आसाराम के गुणगान में कविताओं की तीन किताब लिख चुके हैं वंजारा

: वंजारा का 'लेटर बम' मोदी की राह का कांटा बन रहा : गुजरात के चर्चित आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा का ‘लेटर बम’ भाजपा खेमे में बड़ी खलबली मचाने लगा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस सहित कई और दलों ने नरेंद्र मोदी पर अपने राजनीतिक निशाने तेज कर दिए हैं। इस चर्चित पत्र को लेकर भाजपा के अंदर भी काफी दबाव बढ़ रहा है। इस प्रकरण के बाद पार्टी के अंदर मोदी विरोधी खेमा एक बार फिर सक्रिय होने लगा है। कोशिश की जा रही है कि संघ के दबाव में पार्टी नेतृत्व जल्दबाजी में मोदी को अपना चुनावी चेहरा न घोषित करे। क्योंकि, पता नहीं है कि वंजारा का ‘लेटर बम’ कितनी और क्षति पहुंचा देगा? इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने नए सिरे से मोदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। जबकि, जदयू ने मांग कर दी है कि वंजारा के पत्र के आधार पर फर्जी मुठभेड़ों के मामले में नरेंद्र मोदी की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच जरूर कराई जाए। 
: वंजारा का 'लेटर बम' मोदी की राह का कांटा बन रहा : गुजरात के चर्चित आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा का ‘लेटर बम’ भाजपा खेमे में बड़ी खलबली मचाने लगा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस सहित कई और दलों ने नरेंद्र मोदी पर अपने राजनीतिक निशाने तेज कर दिए हैं। इस चर्चित पत्र को लेकर भाजपा के अंदर भी काफी दबाव बढ़ रहा है। इस प्रकरण के बाद पार्टी के अंदर मोदी विरोधी खेमा एक बार फिर सक्रिय होने लगा है। कोशिश की जा रही है कि संघ के दबाव में पार्टी नेतृत्व जल्दबाजी में मोदी को अपना चुनावी चेहरा न घोषित करे। क्योंकि, पता नहीं है कि वंजारा का ‘लेटर बम’ कितनी और क्षति पहुंचा देगा? इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने नए सिरे से मोदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। जबकि, जदयू ने मांग कर दी है कि वंजारा के पत्र के आधार पर फर्जी मुठभेड़ों के मामले में नरेंद्र मोदी की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच जरूर कराई जाए। 
उल्लेखनीय है कि सोहराबुद्दीन शेख मामले में फर्जी मुठभेड़ का आरोप गुजरात के कई आलाधिकारियों पर लगा था। इस मुठभेड़ के बाद तुलसी प्रजापति नाम के व्यक्ति को भी मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इन दोनों फर्जी मुठभेड़ों के मामले में वरिष्ठ आईपीएस अफसर डीजी वंजारा सहित कई पुलिस वाले गिरफ्तार हुए थे। इन्हीं मामलों में मोदी सरकार के तत्कालीन गृह राज्यमंत्री अमित शाह भी आरोपी बनाए गए थे। लेकिन, इन्हें जमानत मिल गई। इसी के चलते वे पार्टी के अंदर मोदी के खास सिपहसालार बने हुए हैं। उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य का संगठन प्रभार दे दिया गया है। पिछले साल गुजरात विधानसभा का चुनाव एक बार फिर जीत लेने के बाद पार्टी के अंदर मोदी का राजनीतिक कद काफी बढ़ गया है। पिछले कई महीनों से वे पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने की होड़ में हैं। 
 
संघ नेतृत्व पूरी तौर पर मोदी के साथ है। उसने ‘पीएम इन वेटिंग’ बनवाने के लिए भाजपा के अंदर भारी दबाव बना लिया है। इस प्रकरण में भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेताओं के विरोध को भी पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। भले औपचारिक रूप से मोदी को पार्टी का चुनावी चेहरा न घोषित किया गया हो, लेकिन मोदी का राजनीतिक अंदाज पूरी तौर पर बदल गया है। वे लगातार यही संकेत दे रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में वे पार्टी की तरफ से बड़ी भूमिका में आ रहे हैं। ऐसे में, वे सत्तारूढ़ कांग्रेस पर तीखे कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं चूकते। इस चक्कर में आए दिन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से लेकर सोनिया गांधी तक कटाक्ष के तीर फेंकते रहते हैं। 
संघ नेतृत्व ने इधर दबाव बढ़ाया है कि इसी महीने पार्टी मोदी को अपना ‘पीएम इन वेटिंग’ जरूर घोषित कर दे। इसके लिए खास तर्क यही दिया जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। खास तौर पर चार बड़े राज्यों के चुनाव परिणामों पर सबकी निगाह लगी है। क्योंकि, ये चुनाव एक तरह से लोकसभा का ‘सेमीफाइनल’ माने जाएंगे। ऐसे में, जरूरी है कि हर हाल में पार्टी इन चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन करे। जोर लगाया जा रहा है कि इन चुनावों की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही मोदी का नाम घोषित कर दिया जाए। ताकि, मतदाताओं में एक अच्छा संदेश जाए। इस मामले में एक मजेदार बात यह है कि जिस दौर में संघ के नेता मोदी के लिए दबाव बढ़ाते हैं, उसी दौर में मोदी को लेकर कोई न कोई बड़ा फच्चर फंस जाता है। इस बार भी ऐन मौके पर डीजी वंजारा का ‘लेटर बम’ विवाद तूल पकड़ने लगा है। 
 
दरअसल, पिछले दिनों अहमदाबाद के साबरमती जेल में बंद निलंबित आईपीएस अधिकारी वंजारा ने एक 10 पेज की चिट्ठी राज्य के मुख्य सचिव को लिखी थी। वंजारा, फर्जी मुठभेड़ के मामलों में पिछले 6 सालों से जेल में हैं। जबकि, इन्हीं मामलों में फंसे अमित शाह मजे से राजनीति कर रहे हैं। 2002 से 2007 तक वंजारा, मुख्यमंत्री मोदी के सबसे चहेते पुलिस अधिकारियों में गिने जाते थे। उनका दबदबा इतना था कि वरिष्ठ अधिकारी भी वंजारा के संकेतों पर काम करने में अपनी भलाई समझते थे। लंबे समय से जेल में पड़े रहने के बाद अब वंजारा ने ‘विद्रोह’ की   डगर पकड़ ली है। क्योंकि, इस चिट्ठी में उन्होंने संकेतों-संकेतों में कह दिया है कि सोहराबुद्दीन और प्रजापति जैसे मामलों में उन्होंने वही किया था, जिसका निर्देश ऊपर से मिला था। उन्होंने यहां तक लिखा कि वे मोदी को अपना ‘भगवान’ मानते रहे हैं। ऐसे में, उनके हर आदेश का पालन करते रहे हैं। सरकार ने कहा था कि पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद को पूरी तौर पर कुचलना है। यही काम हम लोगों ने किया। अब उनकी तरह से 32 और पुलिस अधिकारी जेलों में बंद हैं। लेकिन, मोदी सरकार को इनकी कोई परवाह नहीं है। 
 
लंबी चिट्ठी में वंजारा ने यह भी लिख दिया है कि लगता है कि अमित शाह की संगत ने उनके भगवान (मोदी) को भी बहका दिया है। शायद, इसी के चलते वे उन जैसे वफादार अफसरों की सुध लेना भूल गए हैं। जबकि, उनके जैसे पुलिस अधिकारियों की जांबाजी के दम पर ही मोदी की छवि ‘लौह पुरुष’ की बनी थी। लेकिन, वफादार अधिकारियों को सजा भुगतने के लिए छोड़ दिया गया है। जबकि, इस सरकार की सही जगह जेलों में होनी चाहिए। इस तरह की तमाम भड़ास वंजारा ने अपने पत्र में निकाली है। उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश भी की थी। जिसे राज्य सरकार ने मंजूर नहीं किया। कह दिया है कि उन पर आपराधिक मुकदमा चल रहा है, ऐसे में उनका इस्तीफा कानूनी तौर पर मंजूर नहीं किया जा सकता। 
 
वंजारा ने अपने इस पत्र की प्रतिलिपियां कई जगह भेज दी हैं। एक कॉपी सीबीआई को भी भेज दी गई है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, इस पत्र को लेकर यह विचार चल रहा है कि क्या इसके आधार पर कुछ और लोगों से पूछताछ की जाए? कानूनी जानकार मान रहे हैं कि वंजारा की यह चिट्ठी एक तरह से बड़ा खुलासा है। उन्होंने सरकार की खास नीतियों की तरफ इशारा करके संकेत दे दिए हैं कि फर्जी मुठभेड़ों के बारे में मुख्यमंत्री मोदी को भी जानकारी रही है। ऐसे में, जांच एजेंसी मोदी और अमित शाह को जांच घेरे में ले सकती है। यूं तो अमित शाह का मामला अदालत में लंबित भी है। लेकिन, वंजारा का पत्र उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
 
गुरुवार को राज्यसभा में जदयू, सपा व सीपीएम के सांसदों ने इस मामले को लेकर काफी हंगामा किया था। सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल का कहना है कि वंजारा की चिट्ठी के बाद केंद्र सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या कार्रवाई करने वाली है? भाजपा नेताओं को भी बताना चाहिए कि इस मामले में मोदी कितने दूध के धुले रह गए हैं? जदयू के सांसद के सी त्यागी ने भी मोदी की भूमिका को लेकर तीखे कटाक्ष कर डाले। सीपीएम के वरिष्ठ सांसद सीताराम येचुरी ने तो यहां तक कह दिया कि इस नए खुलासे के बाद मोदी को मुख्यमंत्री की कुर्सी से इस्तीफा दे देना चाहिए। इसी के साथ भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को यह बताना चाहिए कि क्या वह इतने दागी नेता को अपना प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने वाली है? 
 
राजनीतिक हल्कों में इस बात पर भी हैरानी जताई जा रही है कि वंजारा प्रकरण पर मोदी ने सीधे तौर पर कोई टिप्पणी क्यों नहीं की? जबकि, कांग्रेस के नेता तमाम सवाल उठा रहे हैं। मांग की जा रही है कि फर्जी मुठभेड़ों के मामले में मोदी की भी भूमिका की जांच सीबीआई से कराई जा रही है। भाजपा के कुछ नेताओं ने कहना शुरू किया है कि वंजारा के पत्र के पीछे कांग्रेस की कोई बड़ी साजिश हो सकती है। ताकि, लोकप्रिय नेता मोदी को बदनाम कराया जा सके। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वेकैंया नायडु का सवाल है कि 6 सालों तक वंजारा चुप क्यों रहे? अब अचानक उन्हें ‘सच’ कहने की बेचैनी क्यों हो गई? पार्टी उपाध्यक्ष उमा भारती को भी वंजारा प्रकरण के पीछे कांग्रेस की कोई बड़ी चाल लगती है। जबकि, कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह का सवाल है कि ताजा स्थितियों में भाजपा को ही अपनी अंतर-आत्मा टटोलने की जरूरत है। ताकि, उसे यह महसूस हो सके कि वह किस शख्स को अपना चुनावी चेहरा बनाने जा रही है? 
 
इस मामले में यौनाचार के आरोपी बापू आसाराम का नाम भी जुड़ने लगा है। क्योंकि, वंजारा बापू के परम शिष्य हैं। इस विवादित संत की ‘संतई’ में उन्होंने कविताओं की तीन किताबें भी लिखी हैं। इनमें जमकर बापू का गुणगान किया गया है। एक नाबालिग लड़की से यौनाचार के आरोप में बापू जोधपुर की जेल में बंद हैं। इस मामले में भाजपा के दूसरे नेताओं की तरह मोदी बचाव की भूमिका में नहीं आए। यहां तक कि उन्होंने पार्टी के उन नेताओं के प्रति नाराजगी जाहिर की, जो कि विवादित बापू के पक्ष में बयानबाजी कर रहे थे। इस बात की भी कसक वंजारा ने अपने पत्र में जताई है। बहरहाल, वंजारा का पत्र मोदी की राजनीतिक मंजिल में एक घातक कंटक जरूर माना जा रहा है। क्योंकि, इसको लेकर मोदी नए कानूनी झमेलों में भी फंस सकते हैं।
 
लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।
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