यूपीए-2 की मनमोहन सरकार लगातार किसी न किसी राजनीतिक संकट के दलदल में फंसती रहती है। लंबे समय से उसे राहत की चैन लेने का शायद ही कोई मौका मिला हो। अगले लोकसभा चुनाव की राजनीतिक घंटियां जोर-जोर से बजने लगी हैं। सभी दलों ने चुनावी तीर-तुक्के अपने तरकशों में सजा लिए हैं। ऐसे में, विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता। यहां तक कि बात-बात पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की, रवायत सी बन गई है। इन दिनों संसद का मानसून सत्र अपने अवसान के करीब है। हालांकि, इसकी अवधि बढ़ाने के लिए चर्चा चल रही है। लेकिन, जिस तरह से संसद में लगातार गतिरोध का दौर जारी रहा है, ऐसे में सवाल है कि यदि हंगामा ही करना है तो सत्र बढ़ाने का और स्वांग क्यों हो?
सरकार के लिए इस सत्र में कुछ राहत की बात यही है कि इस दौर में कोई और बड़ा घोटाला चर्चा में नहीं आया। वरना, हर बार किसी बड़े घोटाले के सुर्रे की आपाधापी मचती रही है। लेकिन, विपक्ष ने कोयला घोटाले की कुछ खास फाइलें गायब होने के मुद्दे को तूल दे दिया है। इस मामले में भाजपा सहित कई दलों ने सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा है। क्योंकि, जो फाइलें गायब हैं उनका रिश्ता कोयला घोटाले के मामलों से जुड़ा माना जा रहा है। इन फाइलों में 2006 से 2009 के दौरान कोयला खदानों के आवंटन से जुड़े दस्तावेज भी हैं। आरोप है कि इस दौरान खदानों के आवंटन में बड़े पैमाने पर घपला किया गया है। प्रधानमंत्री इस मामले में खासतौर पर निशाने पर इसलिए आए हैं, क्योंकि इस अवधि में कोयला मंत्रालय का प्रभार मनमोहन सिंह के पास ही था।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सरकार की तमाम मनुहार के बाद भी आक्रामक मुद्रा जारी रखी है। इस दल के दिग्गज नेता भी इस मांग पर डटे हैं कि गायब हुई फाइलों के बारे में सीबीआई प्रधानमंत्री से पूछताछ करे। क्योंकि, इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ी आपराधिक साजिश हो सकती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता यशवंत सिन्हा यही तर्क देते हैं कि जब कानून के लिए सभी लोग बराबर हैं, तो फिर प्रधानमंत्री को इस दायरे में क्यों नहीं रखा जाए? सिन्हा का कहना है कि गायब फाइलों के बारे में मनमोहन सिंह ने मंगलवार को जो सफाई संसद के दोनों सदनों में दी है, वह ज्यादा दमदार नहीं है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने भी प्रधानमंत्री की सफाई को अधकचरा सच करार किया है। उन्होंने कहा है कि मनमोहन सिंह ने गायब फाइलों के मामले में जो गोल-मोल जवाब दिया है, इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
पिछले दिनों राज्यसभा में बहुत भावुक होकर प्रधानमंत्री ने यह सवाल किया था कि आखिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में कैसे कुछ विरोधी दल चुने हुए प्रधानमंत्री को ‘चोर’ तक कह डालते हैं। जबकि, दुनिया के किसी लोकतांत्रिक देश में ऐसा नहीं होता। तल्ख अंदाज में प्रधानमंत्री ने यह जुमला उछालकर विपक्ष को कोसा था। लेकिन, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने तत्काल पलटवार कर दिया। उन्होंने कह दिया कि दुनिया के किसी और लोकतांत्रिक देश में प्रधानमंत्री सदन में बहुमत जुटाने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त का गंदा काम भी नहीं करते? लेकिन, सब जानते हैं कि यहां पर यह धतकरम एक प्रधानमंत्री जी कर चुके हैं। जाहिर है जेटली का इशारा स्व: प्रधानमंत्री नरसिंह राव की तरफ था। जेटली के इस कटाक्ष से प्रधानमंत्री कुछ झुंझलाए जरूर थे। लेकिन, इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच तल्खी की एक परत और चढ़ गई।
अब हालात राजनीतिक रूप से इतने खुरदरे हो चले हैं कि प्रधानमंत्री के गुस्से और उनकी भावुकता से भी किसी को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। यदि ऐसा कुछ नहीं होता, तो गायब फाइलों को लेकर इतनी देर तक हंगामा चलने की नौबत नहीं खड़ी होती। प्रधानमंत्री इस मामले में कह चुके हैं कि यदि दो सप्ताह के अंदर गायब फाइलें नहीं मिलीं, तो वे उपयुक्त जांच के आदेश कर देंगे। लेकिन, विपक्ष इतने आश्वासन भर से संतुष्ट नहीं हुआ। मनमोहन सिंह, आमतौर पर गुस्सा नहीं करते। जल्दी उनके स्वर भी तीखे नहीं होते। लेकिन, इधर वे लगातार खीझते दिखाई पड़ जाते हैं। गायब फाइलों के मामले में वे विपक्ष से यह भी कह चुके हैं कि वे फाइलों की रखवाली करने वाले चौकीदार तो नहीं हैं। जबकि, विपक्ष के लोग इसी अंदाज में उनसे फाइलों के बारे में पूछ रहे हैं, यह तौर-तरीका ठीक नहीं है। यह अलग बात है कि गायब फाइलों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने भी सीबीआई से पूछा है कि जब जरूरी फाइलें गायब हैं, तो इस मामले में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई? अब यही सवाल विपक्ष कर रहा है। इसको लेकर ही राजनीतिक किचकिच जारी है।
तमाम जद्दोजहद के बाद सरकार ने दोनों सदनों से खाद्यान्न सुरक्षा गारंटी विधेयक पास कराने में जरूर कामयाबी हासिल कर ली है। भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक और लंबे समय से लटके हुए पेंशन संशोधन विधेयक भी इस सत्र में पास होने जा रहे हैं। तमाम हंगामा भले चलता रहा हो, लेकिन सरकार के रणनीतिकार इतनी कामयाबी से ही खुश नजर आते हैं। मुख्य विपक्षी दल भाजपा को घेरने के लिए भी कांग्रेस के रणनीतिकार मौके की ताक में रहते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके खास निशाने पर हैं। राज्य के एक विवादित आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा ने पुलिस सेवा से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने 10 पेज की एक चिट्ठी राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजी है। इसमें उन्होंने कई ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जिनको लेकर नरेंद्र मोदी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
दरअसल, 2007 में ही सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ के मामले में वे गिरफ्तार हो गए थे। तब से जेल में बंद हैं। इसी मामले में मोदी सरकार के गृहराज्य मंत्री रहे अमित शाह भी फंसे थे। लेकिन, वे जमानत पर बाहर आकर राजनीति कर रहे हैं। इन दिनों भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। वंजारा ने लिखा है कि मोदी को वह अपना ‘भगवान’ मानते थे। लेकिन, अमित शाह के बहकावे में आकर इस ‘भगवान’ ने भी उनकी सुध नहीं ली। जबकि, उनके जैसे सरकार के खास वफादार और 32 पुलिस अधिकारी जेलों में बंद हैं। लेकिन, इस ‘भगवान’ को कोई परवाह नहीं है। जबकि, हमारे लोगों की ही ‘जांबाजी’ से ‘भगवान’ की छवि दबंग नेता की बनी है। इस पत्र को लेकर सवाल यह खड़ा हुआ है कि क्या फर्जी मुठभेड़ों का निर्देश मुख्यमंत्री की तरफ से दिया गया था?
बहुचर्चित तुलसी प्रजापति फर्जी मुठभेड़ मामले में भी स्टिंग आपरेशन के जरिए एक खुलासा हुआ है। इस खुलासा सीडी से भी मोदी नए विवादों से घिर गए हैं। सोनिया गांधी, पिछले दिनों संसद में अचानक बीमार हुई थीं। उन्हें एम्स अस्पताल ले जाया गया था। इस पर मोदी ने मिनटों में ट्विटर संदेश जारी करके कटाक्ष किया था। लेकिन, वंजारा के गंभीर आरोपों पर वे लंबे समय तक चुप्पी साधे रहे। इस पर भी कई सवाल हैं। पिछले दिनों चर्चित संत आसाराम भी विवादों के घेरे में आए हैं। एक नाबालिग लड़की से यौनाचार के मामले में वे जेल भेज दिए गए हैं। इस मामले में भी जमकर सियासत हुई। भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने तो आसाराम के मामले में जमकर स्यापा किया। इसे कांग्रेस की राजनीतिक साजिश तक बता डाली। संघ परिवार के तमाम नेता संत आसाराम को पहुंचा हुआ हिंदू गुरू मानते हैं। बापू आसाराम के तमाम भक्त उन्हें ‘भगवान’ मानते हैं। लेकिन, ये भगवानगण फिलहाल संकट में हैं।
लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।