Syed Husain Akhtar : ईटीवी उत्तर प्रदेश उत्तराखंड के समाचार संपादक और समन्वयक जनाब ब्रजेश मिश्रा को सलाम है.. मुज़फ्फरनगर की घटना में पत्रकारों की मौत के बाद जब सभी चैनल टीआरपी बटोरने में लगे थे तब वो कंट्रोलरूम में बेचैन टहेल रहे थे… लीक से हट कर वो एक-एक पट्टी चलवा रहे थे… मेरे पास फ़ोन आ रहे थे, 'बहुत बुरा हुआ मुज़फ्फरनगर में, आईबीएन का संवाददाता मार दिया गया, लेकिन उससे ज्यादा अफ़सोस इस बात का कि ईटीवी के अलावा कोई दिखा नहीं रहा'.
मैं उस वक़्त बस में सफ़र कर रहा था.. घर पहुँच कर चैनल सर्फ किया तो कहीं फ़िल्मी लटके झटके चल रहे थे तो कहीं आसाराम और नारायण साईं.. मारे गए पत्रकार के लिए एक स्क्रॉल भी कहीं नज़र नहीं आया… वहीं ईटीवी पर एक-एक जानकारी ब्रेकिंग के तौर पर चल रही थी… जनाब ब्रजेश मिश्रा की यही बेचैनी मैंने तब देखी थी जब इलाहाबाद कुम्भ में स्टेशन पर भगदड़ के बाद तैंतीस लोग मरे थे… मैं उसका कवरेज कर रहा था… मुझसे जब वो फ़ोन पर अपडेट लेते तो उनकी आवाज़ में वेदना और आक्रोश के अंश होते… ऐसा लगता जैसे इनके बस में होता तो वो अभी ज़िम्मेदार लोगों को सजा दे कर मृतकों को इंसाफ दिला देते… मुझे गर्व है कि मानवीय संवेदनाओं के आगे व्यावसायिक पहलुओं को तरजीह न देने वाले ऐसे संपादक की टीम का मैं हिस्सा हूँ… पत्रकार भाइयों से निवेदन कि वो फेसबुक के ज़रिये ही सही लेकिन मुज़फ्फरनगर में मारे गए दोनों पत्रकारों के साथ खड़े नज़र आयें…
सैय्यद हुसैन अख्तर के फेसबुक वॉल से.






