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उत्तर प्रदेश

मुजफ्फरनगर में अखबार नहीं बंटने दिया गया, फेसबुक से अफवाहों को पंख लग रहे

Yashwant Singh : मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने अखबार नहीं बंटने दिया. फेसबुक से अफवाहों को पंख लग रहे हैं और स्थिति जटिल होती जा रही है… सेना के हाथ में मुजफ्फरनगर को सौंप दिया गया है… मीडिया वालों सबसे ज्यादा परेशान किए जा रहे… मृतकों की ठीक ठीक संख्या के बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा… हालात बेहद गंभीर हैं…

Yashwant Singh : मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने अखबार नहीं बंटने दिया. फेसबुक से अफवाहों को पंख लग रहे हैं और स्थिति जटिल होती जा रही है… सेना के हाथ में मुजफ्फरनगर को सौंप दिया गया है… मीडिया वालों सबसे ज्यादा परेशान किए जा रहे… मृतकों की ठीक ठीक संख्या के बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा… हालात बेहद गंभीर हैं…

Vikas Mishra : पता नहीं अखिलेश यादव अपनी क्लास में कभी मॉनीटर भी रहे हैं कि नहीं, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। नतीजा सामने है। एक तो करेला दूसरे नीम चढ़ा। सुपर पावर हैं आजम खान। उत्तर प्रदेश दंगों का प्रदेश बनता जा रहा है। दंगा मुजफ्फरनगर में हुआ है, आंच मेरठ तक पहुंच रही है। अब तो ईश्वर बचाए पश्चिमी यूपी के अमन को। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मैं पांच साल रहा हूं, करीब से देखा है, यहां के लोग उन्नति के रास्ते पर चलने वाले हैं। ये दंगाई नहीं हैं। अगर दंगा हुआ है, दंगा हो रहा है तो इसके पीछे वोट की राजनीति और कमजोर शासन प्रशासन है। भाई आजम खान, भाई अमित शाह। वोटों का जितना परसेंटेज चाहिए, मिल बैठकर समझौता करके बांट लो, लेकिन प्रदेश के अमन को बख्श दो। वैसे भी पिछड़ा प्रदेश है, और भी पीछे चला जाएगा। विकास तो गया भाड़ में, लेकिन खून की नदियां तो मत बहाओ।

Balendu Swami : मुजफ्फरनगर में 2014 की तैयारी चल रही है, अमित शाह उत्तर प्रदेश का प्रभारी, बिना मौसम 84 कोस परिक्रमा, मतों का ध्रुवीकरण आवश्यक है और धर्मों का यह उपयोग सनातन काल से चला आ रहा है.

Omkar Chaudhary : मुज़फ्फरनगर में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। भीषण दंगे के बाद रात में सेना को बुलाना पड़ा। अफ़सोस की बात ये है कि पलायन शुरू गया है। लोग सुरक्षित इलाकों में जा रहे है। हिन्दू इलाके से मुस्लिम और मुस्लिम इलाके से हिन्दू बाहर निकल रहे हैं। सरकार को पता था कि तनाव लगातार बढ़ रहा है फिर भी दंगे रोकने के पुख्ता उपाय नहीं किये गए। समझ से बाहर है कि अखिलेश सरकार के समय इतने दंगे क्यों हो रहे हैं। ये 28वां दंगा है।

Zafar Irshad : अयोध्या में हाल में संतों की परिक्रमा को रोकने के लिए, पूरे उत्तर प्रदेश की पुलिस को झोकने वाली सरकार अब मुज़फ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगे में इतनी बेबस और लाचार क्यों नज़र आ रही है.. कि उसे 1 दर्जन मासूम मौतों के बाद सेना को बुलाना पड़ा…क्या यही है कानून व्यवस्था प्रदेश की, आखिर क्यों कोई कड़ा कदम नहीं उठा पा रही है सरकार…कही लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा की यह कोई मिली भगत तो नहीं है ? अगर इसी तरह से प्रदेश में दंगे होते रहे तो भाजपा को प्रदेश से कम से कम 40 लोकसभा सीटे मिलेंगी, बाकी राजनीतिक दल डबल फिगर तक नहीं पहुच पायेंगे… अभी भी संभल जाए उत्तर प्रदेश सरकार, और कानून व्यवस्था दुरुस्त करे, वरना ऐसा न हो की नेता जी का प्रधानमंत्री पद का सपना अधूरा रह जाए….

मुजफ्फरनगर से संबंधित कुछ चुनिंदा कमेंट, फेसबुक से.


मुजफ्फरनगर में पत्रकार की हत्या पर आईएफडब्ल्यूजे ने दुख व्यक्त किया

भोपाल । इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्टस के राष्ट्रीय सचिव एवं सेंट्रल इंडिया प्रभारी श्री कृष्ण मोहन झा ने उतरप्रदेश के मुजफर नगर क्षेत्र में दो समुदायों के बीच हुए संघर्ष में एक पत्रकार सहित 12 लोगों की हत्या की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उस पर गहरा दुख व्यक्त किया है । श्री झा ने इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरूद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही करने की मांग उत्तर प्रदेश सरकार से की है श्री झा ने कहा है कि उत्तरप्रदेश सरकार को न तो आम लोगों की जान माल की चिन्ता है और न ही वह पत्रकारों को अपने कर्तव्यपालन के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने में समर्थ है । राष्ट्रीय सचिव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पत्रकारों  को निर्भय होकर दायित्व निर्वाह करने के लिए सुरक्षित माहौल उपलब्ध करानें की मांग की है ताकि ऐसी दुर्भागयपूर्ण घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो सके।

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