Sanjeev Chandan : दैनिक भास्कर के नागपुर एडिशन के प्रांतीय डेस्क के इंचार्ज संजय देशमुख से मेरी बातचीत का यह ऑडियो है. सुनिए कि कैसे दैनिक भास्कर में क्राइम रिपोर्टिंग या कोर्ट की रिपोर्टिंग थर्ड पार्टी के प्रेस नोट पर की जाती है… बिना वेरिफिकेशन के… बिना काउंटर चेक के… है न दवाब / लाभ / लोभ की पत्रकारिता …. दैनिक भास्कर की जमात से एक बन्दा हिंदी विवि में हिंदी अधिकारी बना है, इसी लाभ-लोभ की पत्रकारिता करते हुए…. सुनिएं टेप…
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दैनिक भास्कर ने भी चोर गुरु अनिल राय और दारोगा कुलपति के दबाव में आकर मेरे खिलाफ एक गलत रिपोर्ट छाप ही दी. तीन दिनों से वर्धा ब्यूरो ने यह खबर रोक रखी थी तो यह सीधे प्रांतीय डेस्क से लगी, दबाव बनाया हिंदी अधिकारी राजेश यादव ने, जो इन दिनों विभूति राय को परोक्ष गालियां देकर उनके विरोधियों से संपर्क भी बना रहा था और उनकी तीमारदारी भी कर रहा था. राजेश का डबल क्रास डायस्पोरा में सहायक प्रोफ़ेसर न बनाये जाने के बाद से शुरू हुआ था. वह अपनी नियुक्ति को कन्फर्म बता रहा था तब, और ऐसी स्थिति में अपने द्वारा छोड़े गए हिंदी अधिकारी के पद पर कुछ लोगों नियुक्त करवाने का लालीपॉप भी दे रहा था. उसकी नियुक्ति डायस्पोरा में नहीं हो पाई और वह हिंदी अधिकारी ही रह गया.
मैंने दैनिक भास्कर के प्रांतीय डेस्क इंचार्ज संजय देशमुख से बात की इस मसले पर… वे कुछ विचित्र ही तर्क दे रहे हैं और बाद में तर्कहीन हो जाते हैं… उनका कहना है कि विवि ने प्रेस नोट भेजा था मेरे खिलाफ खबर के लिए. मैंने पूछा कि क्या क्रिमिनल मैटर में और कोर्ट के मैटर में प्रेस नोट से खबर बन सकती है? क्या क्रॉस चेक नहीं बनता है? मजेदार है कि उसी प्रेस नोट में थाने के सब इन्स्पेक्टर अशोक बांदिले का भी बयान है… यानी सिद्ध होता है कि विश्वविद्यालय और पुलिस मिलकर काम कर रहे हैं. चाचा दारोगा कुलपति और भतीजा वर्धा का एसपी मिलकर काम कर रहे हैं. नागपुर के हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विश्व विद्यालय के वकील को कहा भी था कि आप निजी खुन्नस के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं.
संजय देशमुख हालांकि राजेश यादव या हिंदी विवि से किसी प्रकार के दबाव से इंकार कर रहे हैं, लेकिन एक डेस्क हेड को जब इतनी खबर है कि इस मामले में विवि ने प्रेस नोट जारी किया था तो दबाव कितना है स्पष्ट है. ब्यूरो हेड संजय ओझा ने तो तीन दिन से कोई खबर लगाई ही नहीं थी.. फिर संजय देशमुख से बात कर दबाव बनाया गया. मैंने भास्कर (नागपुर यूनिट अलग मालिकों के पास है) के समूह संपादक प्रकाश दुबे से बात की, वे नागपुर आज ही लौटे हैं. डिटेल बात नहीं हो पाई है. मैंने संजय से पूछा कि क्या आप हमारा वर्जन छाप रहे हैं या लीगल एक्शन फेस करेंगे? संजय से बात कर बातचीत मैं देर शाम तक लगाऊंगा….
संजीव चंदन के फेसबुक वॉल से





