संजीव सिन्हा : उत्तर प्रदेश में 30 सांप्रदायिक दंगे। सौ से अधिक लोगों की हत्या। ये कैसा समाजवाद? मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव प्रशासन को संभालने में पूरी तरह विफल। उन्हें मुख्यमंत्री पद से अविलंब बर्खास्त करो। कहां बिल में छुपे हैं साम्प्रदायिकता विरोधी अभियान के कर्ता-धर्ता? कहां है तीस्ता, अरुंधती, शबनम हाशमी, संदीप पांडे, अशोक वाजपेयी, राजेंद्र यादव…….. ? क्यों नहीं कोई हस्ताक्षर अभियान चल रहा है और शांति मार्च निकल रहा है?
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Mayank Saxena : क्या संविधान में किसी पंजीकृत और राष्ट्रीय या क्षेत्रीय राजनैतिक पार्टी पर प्रतिबंध का प्रावधान है? अगर है तो सपा और भाजपा को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर देना चाहिए…ध्रुवीकरण की राजनीति बहुत हो गई…अमित शाह के आते ही सपा भी लगता है कि बीजेपी की स्ट्रैटेजी का फ़ायदा लेने में जुट गई है…बांटो और राज करो…
संजीव सिन्हा और मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.





