मीडिया के एयर कंडीशन्ड स्टूडियो में भांग पीकर हिस्टीरियाई अंदाज में चिल्लाने वाले दलालों मठाधीशो को ये नहीं भूलना चाहिए कि जिन खबरों को ये मसाला मारकर चाशनी में डुबाकर सारा दिन स्टूडियोज में खेलते रहते हैं और बाकी वक्त किसी महिला एंकर को अपनी आंखों से नापते जोखते रुदालिया करते रहते हैं, वो खबर किसी दूर दराज के स्ट्रिंगर राजेश वर्मा जैसे लोग अपनी जान की बाजी लगाकर लाते हैं..
इन राजेश वर्माओं को नोयडा के आलिशान स्टूडियो में किसी आसाराम की तरह मठाधीश बने राजदीप सरदेसाई या आशुतोष जैसे लोगों की तरह भारी भरकम सेलेरी और हर खबर पर नफा नुकसान बताकर राजनीतिक लोगों से वसूली जाने वाली दलाली में हिस्सा नहीं मिलता… उन्हें तो बस उसी खबर पर पैसे मिलते हैं जिसे चैनेल टेलीकास्ट करता है ..
ताज्जुब की बात है की जिस चैनेल के पत्रकार को दंगाईयों ने खबर कवर करते समय मार डाला वो उस खबर को वो चैनेल सिर्फ एक स्क्राल दिखाकर खत्म कर देता है? सूत्रों में पता चला है कि कैमरामैन ने पत्रकार राजेश वर्मा की मौत के एक-एक पल को अपने कैमरे में कैद किया है, किस तरह मुस्लिम दंगइयों ने उन्हें गोली मारी …लेकिन चर्चा है कि चैनल में मठाधीशो ने उस फुटेज की पूरी कीमत उसे न दिखाने के लिए समाजवादी पार्टी से वसूली है…
जितेन्द्र प्रताप सिंह






