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डंके की चोट पर बोलने का दावा करने वाले अब डरपोक क्यों हो गए!

डंके की चोट पर बोलने का दावा करने वाला आईबीएन7 न्यूज़ चैनल डरपोक हो गया है जो अपने मुजफ्फर नगर के शहीद हुए पत्रकार को स्ट्रिंगर कहकर उसका भद्दा मजाक कर रहा है.  यूपी के मुजफ्फर नगर जिले में अपनी संस्था आईबीएन7 नेशनल न्यूज़ चैनल के लिए कुर्बानी देने वाले शहीद पत्रकार भले ही अपने संस्थान आईबीएन7 के लिए डंके की चोट पर काम करने का दावा करता रहा हो लेकिन मुजफ्फर नगर दंगे की एक्सक्लूसिव व सनसनीखेज कवरेज करने के चक्कर में इमानदार और तेजतर्रार पत्रकार को उसकी अपनी ही संस्था आईबीएन सेवेन ने स्ट्रिंगर और फ्रीलांस जर्नालिस्ट कहकर उसका और उसके जैसे तमाम ईमानदार और संस्था के प्रति जिम्मेदार पत्रकारों के साथ भद्दा मजाक किया है.

डंके की चोट पर बोलने का दावा करने वाला आईबीएन7 न्यूज़ चैनल डरपोक हो गया है जो अपने मुजफ्फर नगर के शहीद हुए पत्रकार को स्ट्रिंगर कहकर उसका भद्दा मजाक कर रहा है.  यूपी के मुजफ्फर नगर जिले में अपनी संस्था आईबीएन7 नेशनल न्यूज़ चैनल के लिए कुर्बानी देने वाले शहीद पत्रकार भले ही अपने संस्थान आईबीएन7 के लिए डंके की चोट पर काम करने का दावा करता रहा हो लेकिन मुजफ्फर नगर दंगे की एक्सक्लूसिव व सनसनीखेज कवरेज करने के चक्कर में इमानदार और तेजतर्रार पत्रकार को उसकी अपनी ही संस्था आईबीएन सेवेन ने स्ट्रिंगर और फ्रीलांस जर्नालिस्ट कहकर उसका और उसके जैसे तमाम ईमानदार और संस्था के प्रति जिम्मेदार पत्रकारों के साथ भद्दा मजाक किया है.

एक तरफ मुजफ्फर नगर प्रसासन उसे आईबीएन7 के संवाददाता का दर्जा दे रहा है तो आईबीएन7 वाले उसकी बहादुरी का भद्दा मजाक उड़ा रहे हैं. और तो और, अभी तक न तो संस्थान का कोई जिम्मेदार अधिकारी उस शहीद पत्रकार की खोज खबर लेने पहुंचा है और ना ही उसके परिवार को किसी तरह की आर्थिक सहायता देने का ऐलान.

यूपी सरकार ने उसके परिवार को कुछ मदद दिलाने का आश्वासन जरूर दिया है. कवरेज करते करते दंगे और खबरों के लिए ऐसे ही न जाने कितने पत्रकार अपनी जान गंवाकर न्यूज़ चैनल की टीआरपी बढाते हैं. जिस टीआरपी पर चैनल के एसी में बैठे लोग सिर्फ मुनाफेबाजी के सिवाय कुछ और नहीं देखते. 

ऐसे मुनाफेबाज लोगों से मेरी अपील है कि उन्हें भी ऐसे फील्ड में जाकर कवरेज करनी चाहिए जैसे प्रदेश के कई जिलो के नाम मात्र एक पत्रकार जो कैमरामैन बन जाता है, और वो ही पत्रकार बन जाता है और जरूरत के समय ड्राइवर के अलावा खबरें पहुंचाने से लेकर चैनल का सबसे कमजोर और लाचार व्यक्ति माना जाता है… जिसको ये चैनल वाले सेलेक्टेड खबरों में से कुछ खबरों का पैसा काटने के बाद लम्बे समय तक गिड़गिड़ाने के बाद मामूली रकम भेजते हैं जो सिर्फ गाड़ी के पेट्रोल में ही खर्च हो जाता है…

ये चैनल के बड़े अधिकारी अपने जिले के पत्रकार को स्टिंगर, सहयोगी और इन्फार्मार के अलावा कोई दर्जा नहीं देते जिससे कही कोई पत्रकार उनकी संस्था पर क्लेम न कर दे… सोचो जब एक राजधानी के टीवी पत्रकार को एसी वाली कार दी जाती है, आने जाने का खर्चा दिया जाता है, सहयोगी दिया जाता है, ड्राइवर दिया जाता है, कैमरा मैन दिया जाता है और जिले का स्ट्रिंगर भी उन्हीं के साथ कर दिया जाता है. इसके साथ ही उनको मोटी पगार भी दी जाती है. उसके बाद भी जिला का स्टिंगर ही एक्सक्लूसिव खबरें देता है, जो कहीं भी किसी वक्त बिना जान की परवाह किये चल देता है… ऐसे लोगो का नाम आईबीएन7 जैसे चैनल सिर्फ स्ट्रिंगर और फ्रीलांसर लिखकर सबके अपने साथियों के साथ ये भद्दा मजाक कर रहे हैं..

अमित वर्मा

amit verma

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