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अरुण पुरी की बेटी का मोटापा भी बन गया ‘किताब’

मोटापा से छुटकारा पाना क्या इतनी बड़ी उपलब्धि है कि इस अनुभव पर कोई किताब ही लिख दी जाए। हो आपको है ये अटपटा लग रहा हो, लेकिन इंडिया टुडे ग्रुप के संस्थापक अरुण पुरी की बड़ी बेटी कल्‍ली पुरी ने कुछ ऐसा ही किया है। 38 साल की कल्‍ली, जो इंडिया टुडे के डिजिटल विंग की मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में काम संभाल रही हैं, ने अपना वजन 103 किलो से घटाकर 59 किलो कर लिया है। छरहरी दिख रही कल्‍ली ने अपने मोटापे और इससे छुटकारे पर 'कन्फेशन ऑफ ए सीरियल डाइटर' नाम की किताब लिख डाली है। इस किताब के कुछ अंश इंडिया टुडे ने भी प्रकाशित किए।

मोटापा से छुटकारा पाना क्या इतनी बड़ी उपलब्धि है कि इस अनुभव पर कोई किताब ही लिख दी जाए। हो आपको है ये अटपटा लग रहा हो, लेकिन इंडिया टुडे ग्रुप के संस्थापक अरुण पुरी की बड़ी बेटी कल्‍ली पुरी ने कुछ ऐसा ही किया है। 38 साल की कल्‍ली, जो इंडिया टुडे के डिजिटल विंग की मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में काम संभाल रही हैं, ने अपना वजन 103 किलो से घटाकर 59 किलो कर लिया है। छरहरी दिख रही कल्‍ली ने अपने मोटापे और इससे छुटकारे पर 'कन्फेशन ऑफ ए सीरियल डाइटर' नाम की किताब लिख डाली है। इस किताब के कुछ अंश इंडिया टुडे ने भी प्रकाशित किए।

कल्‍ली की इस किताब को इंडिया टुडे के ज्‍वाइंट वेंचर इंप्रिंट हार्पर कॉलिंस ने प्रकाशित किया है। कल्‍ली ने किताब में विस्तार से बताया है कि कैसे वो जब चार साल की थी तो जैम टोस्ट खाते 32 किलो की हो गई थी। जिस तरह आज की यूथ ब्रिगेड न सिर्फ जीवन के हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करती है बल्कि खुद को सर्वोत्तम साबित करने का माद्दा भी रखती है, कमोबेश कुछ ऐसा ही बताने की कोशिश कल्‍ली पुरी ने अपनी किताब में की है। आज का युवा फैशन की अंधी दौड़ में सरपट दौड़ रहे हैं। रुप सौंदर्य को फोटोशाप के क्लिक और बोटोक्‍स से बदलने को तैयार युवाओं के लिए कल्‍ली एक प्रेरणा हो सकती हैं।

कल्‍ली ने अपनी किताब में विस्‍तार से लिखा है कि कैसे बढ़ते-बढ़ते उनका वजन 103 किलो तक पहुंच गया था। कल्‍ली लिखती हैं कि 16 साल की उम्र में उनका वजन 63 किलो तक पहुंच गया था। जब उनको मोटापा खलने लगा तक वो डाइटिंग करने लगीं और नारियल पानी, नींबू पानी जैसे पेय पदार्थों पर रहकर जीवन गुजारने लगीं। डाइटिंग की बदौलत कल्‍ली ने 24 साल की उम्र में अपना वजन 59 किलो कर लिया, पर खाने-पीने वाले परिवार में पैदा होने तथा जीभ के चटोरेपन के चलते एक बार फिर कल्‍ली 35 साल की उम्र में 103 किलो के वजन को भी पार कर गईं, जो उन्‍हें असहज करने लगा। कल्‍ली ने किताब में बेबाक तरीक से अपने अनुभव लिखें हैं। 

कल्‍ली कहती हैं कि वजन के सौ किलो पार कर जाने के बाद शुरू हुआ वजन घटाने का अभियान। वजन कम करने के लिए वो पंजीरी लड्डू खाया करती थीं। कल्‍ली बताती है रविवार को  चिकन बिरयानी और पराठे खाने वाले उनके परिवार में डाइट करना बहुत मुश्किल था, परन्‍तु मेरे फ्रेंच बहनोई ने इसमें उनकी काफी मदद की। उन्‍होंने मेरे खाने में थोड़ा बदलावा किया और शैंपेन को इसका हिस्‍सा बनाया। डाइट और एक तय मात्रा में शैंपेन के सेवन ने उनको लक्ष्‍य पाने में काफी मदद की। और शायद यही वजह थी की 38 साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने अपना वजन 44 किलो घटाकर 59 किलो तक पहुंचा लिया। अपनी पुस्तक में कल्‍ली ने साइज 18 से 8 तक पहुंचाने के हर अहम बिंदु को कलमबद्ध किया है।

वजन कम करना तो सभी चाहते हैं लेकिन सबके लिए ये संभव नहीं हो पाता इसके लिए कल्‍ली कहती भी हैं- ‘प्यार से बड़ा उत्साह बढ़ाने वाला कुछ भी नहीं होता। मैंने वजन कम करने के अपने अभियान को दिल से चाहा, एक समय सीमा तय की और उसे पा लिया।‘  इस पुस्तक में उसने विस्तार से उन 46 खाद्य पदार्थ का जिक्र किया है, जिससे उसकी मोटापा घटाने के अभियान में उन्‍हें जीत हासिल हुई। उसे जानने वाले अक्सर उससे पूछते हैं, आखिर ये संभव कैसे हुआ। शायद कल्‍ली ने ये पुस्तक उन्हीं लोगों के लिए लिखा है, जो मोटापा से बेहद परेशान हैं और क्या करें, क्‍या ना करें और कैसे करें के बीच उलझा हुआ महसूस करते हैं।

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