देहरादून : आई फोर इण्डिया ने देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सर्वेक्षण कर जनता से उनकी राय मांगी है। उत्तराखण्ड के संदर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा इस सर्वेक्षण में बनाई गई चार श्रेणी में से तीन में फेल ही नजर आए हैं। सर्वेक्षण में सरकार और प्रशासन की श्रेणी में विजय बहुगुणा फेल हुए हैं, आपदा प्रबंधन में विजय बहुगुणा को 1.84 अंक मिले, जबकि गरीबी कम करने के मामले में उन्हें 1.08 अंक मिले, मूल्यों के निर्धारण में उन्हें 1.76 अंक मिल पाए, जबकि सरकारी विभागों की स्थिति में उन्हें 1.95 अंक मिल पाए।
वहीं प्रदेश के विकास की गति में प्रदेश पिछड़ा नजर आया है, इस श्रेणी में पर्यटन क्षेत्र में मुख्यमंत्री को केवल 1.97 अंक मिल पाए, जबकि रोजगार के क्षेत्र में सरकार फिसड्डी साबित हुई है इस श्रेणी में मुख्यमंत्री को 1.81 मिला है, वहीं प्रदेश की सड़कों की हालत और सड़कों के विस्तारीकरण में 1.83 ही अंक मिल पाए, कुला मिलाकर प्रदेश में विकास की गति बहुगुणा काल में न्यूनतम स्तर पर आ गई। राज्य में यातायात प्रबंधन में मुख्यमंत्री को 2.06 अंक मिल पाए, जबकि व्यवसायिक शिक्षा में 2.23 और नए व्यवयास तलाशने की दिशा में मुख्यमंत्री 2.03 अंक ही पा सके।
प्रतिष्ठा की दृष्टि में भी राज्य के मुख्यमंत्री कमजोर ही नजर आए हैं, सर्वेक्षण में पार्टी के घोषणापत्र को लागू करने में मुख्यमंत्री नाकाम रहे हैं। वहीं सामप्रदायिक सदभाव बनाने में मुख्यमंत्री को 2.92 अंक ही मिल पाए, जबकि पिछड़े क्षेत्र को आगे बढ़ाने की दशा में किए जा रहे कार्यों पर भी मुख्यमंत्री को 2.15 अंक ही मिल पाए हैं। वहीं महिला सशक्तिकरण में राज्य खास प्रगति नहीं कर पाया है, इसमें मुख्यमंत्री 2.36 अंक ही प्राप्त कर सके हैं, जबकि जनता के सुझावों और टिप्पणियों पर मुख्यमंत्री खरे नहीं उतरे, यहंा भी मुख्यमंत्री को 2.42 अंक मिले। गड़बड़ी और घोटालों के मामले में मुख्यमंत्री आगे रहे हैं, इसके नियंत्रण में भी सरकार विफल रही है और इस श्रेणी में मुख्यमंत्री को 2.29 अंक ही मिल पाए।
दैनिक आवश्यकताओं की श्रेणी में विद्युत की उपलब्धता पर मुख्यमंत्री फिसड्डी साबित हुए हैं, विद्युत आपूर्ति की दशा में मुख्यमंत्री 2.50 अंक से उपर नहीं बढ़ पाए। जनता को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की दशा में मुख्यमंत्री को कोई सफलता हासिल नहीं हुई है, यानि जनता आज भी पानी के लिए प्यासी है और जहां पानी उपलब्ध है, वह पीने योग्य नहीं। वहीं जन यातायात की दशा में भी मुख्यमंत्री 2.50 अंक से नीचे ही हैं, वहीं स्वच्छता की श्रेणी में मुख्यमंत्री निम्न स्तर पर रहे। प्रदेश में साक्षरता अधिक होने के बावजूद प्राथमिक शिक्षा में प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रदेश को गर्त की ओर ले जाते दिखाई दिए हैं, इस श्रेणी में राज्य को 2.59 अंक मिले, वहीं प्रदेश की प्राथमिक स्वास्थ्य की स्थति बेहद चिंताजनक बताई गई है, वह भी अपने न्यूनतम स्तर 2.33 के अंक पर है। कुल मिलाकर प्रदेश को लेकर जो सर्वेक्षण आई फोर इण्डिया ने किया उसमें मुख्यमंत्री और उनका मंत्रिमण्डल फिसड्डी ही साबित हुआ है और औसतन अंकों से वे काफी नीचे नजर आए।
लेखक राजेंद्र जोशी उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं.





