नई दिल्ली : कहते हैं कि अगर देश को बदलना है और विकास करना है तो अच्छे काम को लेकर जिद करो। जिद करने से एक साहस मिलता है और यह साहस ही जीत दिलाता है। कुछ ऐसी ही जिद राजधानी के मीडियाकर्मियों ने भी की। इस जिद ने न केवल मीडिया को दुष्कर्म संबंधी मामलों की अदालती कवरेज का अधिकार दिलाया, बल्कि उनकी जिद देशभर के पत्रकारों और अदालतों के लिए एक नजीर बन गई।
वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म मामले में हर पहलू को लेकर मीडिया द्वारा की गई पड़ताल से दिल्ली पुलिस तिलमिला उठी थी। पुलिस किसी भी तरह से इस मामले को लेकर मीडिया में आने वाली खबरों को रोक देना चाहती थी। इसके लिए पुलिस ने इस्तेमाल किया दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 327(2) के प्रावधान का। इसकेतहत किसी भी अखबार में दुष्कर्म संबंधी मामलों की रिपोर्टिग नहीं की जा सकती जिससे कि पीड़िता की पहचान सुरक्षित की जा सके।
पुलिस ने 3 जनवरी को साकेत कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी सूर्य मलिक ग्रोवर की अदालत में अर्जी दायर कर सीआरपीसी की धारा 327 के तहत मीडिया रिपोर्टिग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। अदालत ने अर्जी पर फैसला सुनाते हुए 5 जनवरी को मीडिया रिपोर्टिग पर प्रतिबंध लगा दिया। दैनिक जागरण संवाददाता सहित 14 मीडियाकर्मियों के समूह ने दिल्ली उच्च न्यायालय की वकील मीनाक्षी लेखी के माध्यम से अपने अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर 10 जनवरी को एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर कर दी। न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने 22 मार्च को अपना फैसला मीडियाकर्मियों के हक में सुनाया।
(दैनिक जागरण में प्रकाशित पवन कुमार की रिपोर्ट)






