कानपुर से शुरू हुआ 'के न्यूज' चैनल परवान चढ़ने से पहले ही मालिकों की अदूरदर्शिता का शिकार होने लगा है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पत्रकारों को 2 माह बिना आई.डी. और 2 माह बना अथारिटी लेटर के काम करना पड़ा. अब दोनों देने के बाद सैलरी के लिए परेशान किया जा रहा है..
कहीं-कहीं 3 से 4 माह काम करने वालों को भीख के तौर पर 500 से लेकर 2500 तक दिया गया है.. साथ ही साथ कई जिलों के स्टाफरों और मंडलों के पत्रकारों को केवल आश्वासन देते बाहर का रास्ता दिखा दिया है.. इनपुट और एसाइनमेंट का काम देखने वाले राजीव ओझा और वरिष्ठ पत्रकार काशीनाथ यादव पहले ही मालिकों के कारनामों को भांपकर किनारा कर चुके हैं.. अब तो हालात यह हो गई है कि कई पत्रकारों ने खबरों को भेजना बंद कर दिया है..





