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हिंदू और मुसलमान दोनों धरती के बोझ हैं!

जब मैंने पिछले 250 वर्षों के इतिहास को खंगाला को पता चला कि जो आधुनिक विश्व मतलब वर्ष 1800 के बाद जो दुनिया में तरक़्क़ी हुई या विकास हुआ उसमें पश्चिम के मुल्कों का हाथ है. इस विकास के पीछे सिर्फ यहूदी और ईसाई लोगों का ही हाथ है. हिन्दू और मुस्लिम का इस विकास में 1 % का भी सहयोग नहीं है. मनुष्य का इतिहास देखें तो पता चलेगा कि उसी क़ौम ने तरक्की की जिसमें तीन खूबियां थीं. शिक्षा, अर्थ व वित्तीय और शक्ति रूप से मजबूत थे और इस तीनों क्षेत्र में हिन्दू व मुसलमान बहुत पीछे थे.

जब मैंने पिछले 250 वर्षों के इतिहास को खंगाला को पता चला कि जो आधुनिक विश्व मतलब वर्ष 1800 के बाद जो दुनिया में तरक़्क़ी हुई या विकास हुआ उसमें पश्चिम के मुल्कों का हाथ है. इस विकास के पीछे सिर्फ यहूदी और ईसाई लोगों का ही हाथ है. हिन्दू और मुस्लिम का इस विकास में 1 % का भी सहयोग नहीं है. मनुष्य का इतिहास देखें तो पता चलेगा कि उसी क़ौम ने तरक्की की जिसमें तीन खूबियां थीं. शिक्षा, अर्थ व वित्तीय और शक्ति रूप से मजबूत थे और इस तीनों क्षेत्र में हिन्दू व मुसलमान बहुत पीछे थे.

अट्ठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तथा उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में कुछ पश्चिमी देशों के तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्थिति में काफी बडा बदलाव आया। इसे ही औद्योगिक क्रान्ति (Industrial Revolution) के नाम से जाना जाता है. इंग्लैंड में उन दिनों कुछ नए यांत्रिक आविष्कार हुए. जेम्स के फ़्लाइंग शटल (1733), हारग्रीव्ज़ की स्पिनिंग जेनी (1770), आर्कराइट के वाटर पावर स्पिनिंग फ़्रेम (1769), क्रांपटन के म्यूल (1779) और कार्टराइट के पावर लूम (1785) से वस्त्रोत्पादन में पर्याप्त गति आई. जेम्स वाट के भाप के इंजन (1789) का उपयोग गहरी खानों से पानी को बाहर फेंकने के लिए किया गया. जल और वाष्प शक्ति का धीरे-धीरे उपयोग बढ़ा और एक नए युग का सूत्रपात हुआ.

भाप के इंजन में सर्दी, गर्मी, वर्षा सहने की शक्ति थी, उससे कहीं भी 24 घंटे काम लिया जा सकता था. इस नई शक्ति का उपयोग यातायात के साधनों में करने से भौगोलिक दूरियाँ कम होने लगीं. अब आप देखिये कि 1800 से लेकर 1940 तक हम हिन्दी और मुसलमान सिर्फ बादशाहत या गद्दी के लिये लड़ते रहे. जिस समय पूरा यूरोप तरक़्क़ी कर रहा था हम उस समय तक आधुनिक शिक्षा तो दूर, हम सामान्य शिक्षा भी नहीं जानते थे.

अब आप को मैं ऐसे 20 वैज्ञानिकों का नाम बताने जा रहा हूँ जो कि 1800-1920 के दरम्यान हुए और उनके आविष्‍कार दुनिया को आधुनिक दौर में ले गये. इन वैज्ञानिकों में सभी या तो यहूदी या ईसाई हैं. एक भी इसमें हिन्दू और मुस्लिम वैज्ञानिक नहीं है. अलेक्ज़ांडर ग्राहम बेल, अल्फ्रेड नोबेल, आर्मेडियो अवोगाद्रो, एंटोइन लावोइसीयर, अगस्तिन फ्रेसनेल , क्रिश्चियन डॉप्लर, एडमंड हैली , एडविन हबल , एमिल बेर्लिनेर , एन्रीको फर्मी , फ्रेड हॉयल  , फ्रिट्ज हैबर , गैलीलियो गैलिली , गिओवानी केसीनी, गुगलीएल्मो मार्कोनी, सर आइज़क न्यूटन , जेम्स क्लार्क मैक्सवेल, जान इंगेनहाउज. अब एक नज़र इधर भी डालिये कि दुनिया का सबसे बड़ा इनाम नोबेल प्राइज़ भिन्न भिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिको को दिया जाता है उसमें हमारी क्या स्थिति है. 1901 से 2011 तक नोबल प्राइज़ भौतिक, रसायन, मेडिकल क्षेत्र के 375 वेज्ञानिक को दिया गया है जिसमें सिर्फ 4 हिन्दू और 1 मुस्लिम वैज्ञानिक को मिला है, बाकी वैज्ञानिक या तो यहूदी या ईसाई है. इसी से पता चलता है कि शिक्षा के क्षेत्र मे हम बहुत पीछे हैं.

अब देखिये पूरी दुनिया मे 61 इस्लामी मुल्क है जिन की जनसंख्या 1.50 अरब के करीब है, और हुल 435 यूनिवर्सिटी है,दूसरी तरफ हिन्दू की जनसंख्या 1.26 अरब के क़रीब है और 385 यूनिवर्सिटी है, जब के अगर हम देखे तो अमेरिका मे 3 हज़ार से अधिक , जापान मे 900 से अधिक यूनिवर्सिटी है. ईसाई दुनिया के 45 % नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है वही मुसलमान के नौजवान 2% और हिन्दू के नवजवान 8 % तक यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है. दुनिया के 200 बड़ी यूनिवर्सिटी मे से 54 अमेरिका,24 इंग्लेंड,17 ऑस्ट्रेलिया,10 चीन,10 जापान, 10 हॉलॅंड,9 फ़्राँस.8 जर्मनी, 2 भारत और 1 इस्लामी मुलकक मे है.

अब हम आर्थिक रूप से देखते है. अमेरिका का जी. डी. पी 14.9 ट्रिलियन डॉलर है जब के  वही पूरे इस्लामिक मुल्क का कुल जी. डी. पी 3.5 ट्रिलियन डॉलर है. वही भारत का 1.873 ट्रिलियन डॉलर है.अमेरिका का वॉल स्ट्रीट 20 ट्रिलियन डॉलर का मलिक है, सिर्फ कोका कोला कंपनी के इमेज की वैल्यू 97 अरब डॉलर है. दुनिया मे इस समय 38000 मल्टिनॅशनल कंपनी है इन मे से 32000 कंपनी सिर्फ अमेरिका और युरोप मे है. दुनिया के 52 % फैक्ट्री ने ईसाई मुल्क मे है जब के 70 % कंपनी के मालिक ईसाई या यहूदी है. अभी तक दुनिया के 10000 बड़ी अविष्कारो मे 6103 अविष्कार अकेला अमेरिका मे और 8410 अविष्कार ईसाई या यहूदीने की है.. दुनिया के 50 अमीरो मे 20 अमेरिका,5 इंग्लेंड,3 चीन, 2 मक्सिको, 2 भारत और 1 अरब मुल्क का है. अब आप खुद अंदाजा लगाइये के हिन्दू और मुसलमान का इस धरती पे क्या औकात है.

अब हम आपको बताते हैं कि हम हिन्दू और मुसलमान जनहित, परोपकार या समाज सेवा में भी ईसाई और यहूदी से पीछे हैं. रेडक्रॉस दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संगठन हैं. इसके बारे में बताने की जरूरत नहीं है. आपको मालूम होगा कि बिल- मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन मे बिल गेट्स ने 10 बिलियन डॉलर से इस फाउंडेशन की बुनियाद रखी है जो कि पूरे विशव के 8 करोड़ बच्चों के सेहत का ख्याल रखाता है. इसके अतिरिक्त एड्स और अफ्रीका के गरीब देशों को खाना और मानवीय सहायता पहुंचाता है.

दुनिया उस समय दंग रह गयी जब वॉरेन बफे ने इस फाउंडेशन को 18 बिलियन डॉलर दान में दे दिया. मतलब वॉरेन ने 80% अपनी पूँजी दान में दे दी. दुनिया के 50 सबसे ज्यादा दान देने वालों में से एक भी हिन्दू या मुसलमान नहीं है जबकि हम जानते हैं कि भारत में कई खरबपति अरबपति हैं. मुकेश अंबानी अपना घर बनाने में 4000 करोड़ खर्च कर सकते हैं, और अरब का अमीर शहज़ादा अपना स्पेशल जहाज पर 500 मिलियन डॉलर खर्च कर सकता है मगर मानवीय सहायता के लिये आगे नहीं आ सकता है. अभी विप्रो के मलिक अज़ीम हशीम प्रेम जी ने 2 बिलियन डॉलर मानवीय सहायता दी. ये भारत का सबसे बड़ा डोनेशन है. अभी और भी बहुत से क्षेत्र हैं जहां हिन्दू और मुस्लिम धर्म से जुड़े लोग ईसाई और यहूदी क़ौम से बहुत पीछे हैं. अब आप खुद बताये कि क्या हिन्दू और मुस्लिम इस धरती पर बोझ नहीं हैं?

लेखक अफ़ज़ल ख़ान (समस्तीपुर) बिहार के निवासी हैं. वर्ष 2000 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीए करने के बाद इन दिनों दुबई की एक कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत हैं. वे 2005 से एक उर्दू साहित्यिक पत्रिका 'कसौटीजदीद' का संपादन भी कर रहे हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.     
 

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