यूपी में नौकरशाही बेलगाम है. इसका ताजा उदाहरण वाराणसी का है. ''अनोखी ख़बर'' के पिछले अंक में पत्रकार अमित मौर्या के नाम से लगी एक खबर ''परिवहन आयुक्त के इशारे पर यूपी में चल रहा ओवर लोडिंग का खेल'' से नाराज परिवहन आयुक्त ने अमित मौर्या को अर्दब और दबाव में लेने के लिए मातहतों के साथ जाल बुनना चालू कर दिया है. इसका प्रमाण है कल दिनाकं 15-09-2013 को संभागीय परिवहन अधिकारी बृजेश सिंह द्वारा अमित मौर्या के खिलाफ फोन पर धमकी देने के आरोप में बड़ागाव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराना.
परिवहन अधिकारी ने तहरीर में दर्शाया है कि अमित मौर्या ने 07-09-2013 को फोन पर अपशब्दों का प्रयोग करते हुए आत्मदाह की धमकी दी. तो क्या अब तक बृजेश सिंह भांग पी कर सो रहे थे जो आठ दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करायी या परिवहन आयुक्त के इशारे का इन्तजार कर रहे थे. दरअसल जब से न्यायालय ने ओवर लोडिंग पर सख्ती से रोक लगायी तब से एआरटीओ से लगायत परिवहन विभाग के उच्च अधिकारी तक के लिए ये कमाई का मोटा जरिया बन चुका है. होता यूं है कि जब भी कोई ट्रक लारी या बड़ा माल वाहन किसी भी जिले की सीमा में प्रवेश करता है तो उसे एक हजार रूपये (पेट्रोल टंकी या ढाबे वाले) को देकर इंट्रीकोड लेना पड़ता है और वहां से एजेंटों के माध्यम से रुपया और कोड प्रवर्तन अधिकारी के पास जाता है जिसे प्रवर्तन अधिकारी लिस्ट बना कर अपने पास रख लेते हैं.
जब कोई ट्रक किसी भी जनपद के सीमा में प्रवेश करता है तो चेकिंग होने पर ट्रक चालक को एआरटीओ प्रवर्तन को एंट्री कोड बताना होता है. कोड का मिलान होते ही ओवर लोड ट्रक फर्राटे भरने लगता है. असल में ओवर लोड ट्रक को एंट्री कोड देने का धंधा काफी चोखा और पुराना और संस्थागत हो गया है. इसी कारण सूबे और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खबर लिख भर देने से तिलमिला जाते हैं. और, तिलमिलायेंगे भी क्यों नहीं, अकूत कमाई का जरिया ओवर लोडिंग ही तो है.
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विनय मौर्या
प्रदेश उपाध्यक्ष
पूर्वांचल पत्रकार एसोसीएशन
वाराणसी
यूपी
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