Yashwant Singh : भोपाल में मीडिया चौपाल के लिए दो दिन रहना हुआ. इस आयोजन में शिरकत करने माखनलाल पत्रकारिता विवि के छात्र व गुरुजन भी पहुंचे हुए थे. आयोजन के दौरान दर्जनों छात्र-छात्राओं ने एक-एक कर मेरे साथ तस्वीर खिंचाई… भड़ास से कुख्यात हुआ मैं यह देखकर अभिभूत था कि दिल्ली से बाहर की दुनिया में भड़ास और मुझे लेकर एक क्रेज सा बन चुका है.. कुछ लोग इसे सेलिब्रिटी स्टेटस भी कहते हैं.. हालांकि मुझे पक्के तौर पर यकीन है कि वे व्यंग्य में ही ये बात कहते होंगे… क्योंकि मुझे अब तक समझ में नहीं आया कि मैं सेलीब्रिटी किधर से हूं और मेरे को लेकर क्रेज क्यों है…
सेलेब्रिटी तो वो पत्रकार संपादक होता है जो मैनेजिंग एडिटर टाइप पोस्ट पर हो और नौकरियां देने का माद्दा रखता हूं, स्क्रीन पर दिखता रहता है, अपने को लेकर एक भौकाल क्रिएट किए रहता है..
मैं तो सड़क छाप आदमी रहा हूं और अब तक हूं… आर्थिक दिक्कतों और मुसीबतों के बोझ तले मैं अपना जीवन बिंदास और बेलौस होकर जीता रहा हूं, ये सच है.. कभी भी दुश्वारियों को हावी नहीं होने देता, कभी भी आलोचनाओं से विचलित नहीं होता, कभी भी अपने धुन से पीछे नहीं हटता… हां, जीवन जीने के लिए जो थोड़े बहुत दंदफंद करने पड़ते हैं, उसे करने की कोशिश करता हूं लेकिन अक्सर फेल व असफल पाता हूं खुद को… खिसका हुआ, हिला हुआ, अराजकतावादी जैसे विशेषणों को पाकर मैं थोड़ा सहज महसूस करता हूं पर जब कोई तारीफ करने लगता है तो असहज हो जाता हूं…
हां, मुझे उन लोगों से ज्यादा लगाव प्यार महसूस होता है जो हाशिए के लोग हैं, जो मुश्किलों में जीते हैं, जो आम जन के करीब नजर आते हैं.. बाजार, सत्ता, अफसरी और पैसे के चकमक में खोए लोगों के साथ सहज नहीं रह पाता… इन्हीं सब उधेड़बुन में जीता जूझता रहा भोपाल में, जब जब युवाओं ने मेरे साथ तस्वीरें खिंचाई… शुक्रिया दोस्तों… प्यार, मोहब्बत और सपोर्ट देने के लिए… एक साथी अभिषेक ने ये तस्वीर मुझे भेजी है…अभिषेक भाई, धन्यवाद..

और ये एक तस्वीर माखनलाल के छात्र सुदीप्त मिश्रा के साथ…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.
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