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जबरन इस्तीफा लेने पर आमादा भास्कर के संपादक और पत्रकार के बीच दो-दो हाथ, दिल्ली आफिस बना युद्धस्थल

पता चला है कि दैनिक भास्कर, दिल्ली आफिस में आज एक पत्रकार को संपादक राजेश उपाध्याय ने अपने खास लोगों के जरिए इसलिए पिटवाया क्योंकि वह पत्रकार इस्तीफा देने से इनकार कर रहा था. इसके जवाब में उस पत्रकार ने भी करारा जवाब दिया. इस घटनाक्रम से आज शाम भास्कर दिल्ली आफिस युद्ध स्थल बना रहा और पूरे आफिस में हड़कंप मचा रहा.

पता चला है कि दैनिक भास्कर, दिल्ली आफिस में आज एक पत्रकार को संपादक राजेश उपाध्याय ने अपने खास लोगों के जरिए इसलिए पिटवाया क्योंकि वह पत्रकार इस्तीफा देने से इनकार कर रहा था. इसके जवाब में उस पत्रकार ने भी करारा जवाब दिया. इस घटनाक्रम से आज शाम भास्कर दिल्ली आफिस युद्ध स्थल बना रहा और पूरे आफिस में हड़कंप मचा रहा.

मालूम हो कि दैनिक भास्कर, दिल्ली आफिस से थोक के भाव छंटनी चल रही है. ज्यादातर वरिष्ठ-कनिष्ठ पत्रकारों ने चुपचाप छंटनी स्वीकार कर लिया और हिसाब लेकर अपने अपने घर चले गए लेकिन एक पत्रकार ने इस्तीफा देने से मना कर दिया. उसका कहना था कि आखिर उसका कुसूर क्या है, यह तो बताया जाए. राजेश उपाध्याय इस पत्रकार को कई रोज से धमका रहे थे. कभी पुचकार रहे थे. पर यह पत्रकार इस्तीफा नहीं देने पर अड़ा रहा.

आज शाम उन्होंने इस पत्रकार को फिर अपनी केबिन में बुलाया और लगे पुचकारने हड़काने. पत्रकार ने सख्ती के साथ कह दिया कि वह कतई इस्तीफा नहीं देने वाला. यह सुनकर राजेश उपाध्याय भड़क गए और अपने कुछ लोगों को मौके पर बुलाकर उस पत्रकार को पीटने के लिए कह दिया. हमला होते देख पत्रकार ने भी आत्मरक्षार्थ दो-दो हाथ किया. बाद में संपादक के गुर्गों की ज्यादा संख्या देख वह पत्रकार किसी तरह जान बचाकर आफिस से निकल गया. तब तक आफिस के लोग संपादक और पत्रकार में जमकर हाथापाई के दृश्य देख चुके थे. संपादक ने जब हाथ उठाया तो पत्रकार ने भी करारा जवाब दिया, इस एप्रोच का सभी कर्मियों ने चुपचाप स्वागत किया.

पूरे आफिस में पत्रकार इस बात से दंग थे कि आखिर कोई संपादक कैसे अपने किसी अधीनस्थ को जबरन इस्तीफा न लिखने पर पिटवा सकता है, गाली दे सकता है, झपट्टा मार कर कालर पकड़ सकता है. बताया जाता है कि आगे आने वाले दिनों में भास्कर दिल्ली आफिस में कोई बड़ा बवाल हो सकता है क्योंकि लोग संपादक की हरकत और सोच से नाराज हैं. साथ ही छंटनी के कारण आक्रोश व गुस्से से भरे हुए हैं. संपादक अपने अधीनस्थों की बलि लेने की जगह खुद का इस्तीफा क्यों नहीं दे देता.. ताकि एक अच्छे टीम लीडर, एक अच्छे कप्तान के रूप में खुद को पेश कर सके, ऐसा लोगों का कहना है.

मैनेजमेंट का लग्गू-भग्गू बनकर काम करने वाले ऐसे संपादकों को यह जान लेना चाहिए कि एक दिन उनको भी मैनेजमेंट बाहर का रास्ता दिखा देगा, तब उनका साथ देने वाला कोई नहीं होगा. फिलहाल राजेश उपाध्याय और उनकी हरकत दिल्ली की मीडिया में चर्चा का नया विषय है. यह भी पता चला है कि बहादुर पत्रकार ने राजेश उपाध्याय की बदतमीजी का भरपूर जवाब दिया. संपादक की बदजुबानी और उठते हाथ के जवाब में उसने भी काफी मंगल वचन कहे और हाथ उठाकर करारा जवाब दिया. अभी सही तौर पर पूरा मामला सामने नहीं आ पाया है. जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं.

हाल के छंटनी के दिनों में ऐसा पहली बार हुआ है जब आफिस में मैनेजमेंट के लटकन संपादक से कोई पत्रकार न सिर्फ भिड़ा बल्कि डटकर मुकाबला किया और करारा जवाब दिया. संपादक के पक्ष में तीन चार खास आदमी होने से अकेला पत्रकार ज्यादा कुछ तो नहीं कर पाया लेकिन कुछ हाथ जवाब में आगे करके उसने यह सबक तो दे ही दिया है कि अगर संपादक लोग नहीं चेते तो गिरा कर अपनी केबिनों में पीटे जाएंगे.

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