दिल्ली : इस साल प्याज की कीमतों ने इतना उछाल मारा है कि देश में मंहगाई की दर 6.1 प्रतिशत हो गई है। पिछले छह महीने में इतनी मंहगाई कभी नहीं बढ़ी। इस समय प्याज ढाई गुना मंहगा बिक रहा है। कहीं-कहीं कीमत 80-90 रु. किलो हो गई है। अकेले प्याज की खपत इतनी अधिक है कि उसके कारण कुल मंहगाई भी आसमान छू रही है।
अकेले दिल्ली के आजादपुर मंडी में लगभग 1200 से 1500 टन प्याज रोज आता है लेकिन उसकी आवक आजकल आधी ही रह गई है। प्याज के सबसे बड़े उत्पादक नासिक क्षेत्र के किसान और व्यापारी आजकल चांदी काट रहे हैं। उन्होंने प्याज की जमाखोरी करके उसके भाव बढ़ा दिए हैं। हमारी सरकार कितनी लिहाजदारी कर रही है कि अपने जमाखोरों पर हाथ डालने की बजाय वह पाकिस्तान की चिरौरी कर रही है।
आजकल पाकिस्तानी प्याज के ट्रक आनन-फानन भारत पहुंच रहे है। यह 50-55 रु. किलो मिल रहा है। पाकिस्तान से तीन-चार ट्रक रोज़ आ रहे हैं लेकिन इस 50-60 टन प्याज से क्या मंहगाई पर काबू पाया जा सकता है? तो इस पर काबू कैसे पाया जाएं? सबसे पहला काम तो सरकार को यह करना चाहिए कि प्याज के जमाखोरों को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए और सारा छिपाया हुआ प्याज जब्त कर लेना चाहिए और उसे सस्ते दाम पर याने 15-20रु. किलो पर बेच देना चाहिए।
दूसरा, यदि बिचौलिए दुकानदार भी लालच में फंसकर लूटपाट कर रहे हैं तो सरकार को चाहिए कि वह प्याज को सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए अपने कर्मचारियों और राजनीतिक दलों के लाखों कार्यकर्ताओं की मदद लें। तीसरा और सबसे बड़ा उपाय यह है कि सभी पार्टियों के नेता और सभी धर्मों के सांधु-संन्यासी, मुल्ला-मौलवी, ग्रंथी-पादरी आदि जनता से अपील करें कि वह अगले 15 दिन तक प्याज न खाएं। यदि भारत की जनता एक प्याज रहित पखवाड़ा मना ले तो सिर्फ प्याज के ही नहीं, किसी भी चीज के जमाखोरों के होश फाख्ता हो जाएंगे।
भारत की जनता को कोई भी ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा लेकिन हमारे राजनीतिक और सामाजिक नेता भी अपनी वासनाओं के गुलाम हैं। वे खुद प्याज के बिना एक दिन भी नहीं रह सकते। वे जनता से क्या अपील करेंगे? अब जनता स्वयं सोचे कि अगर वह कुछ दिन प्याज नहीं खाएंगे तो क्या हो जाएगा? क्या प्राण छूट जाएंगे? हां, सिर्फ जमाखोरों के प्राण छूट जाएंगे। जनता की तो प्राण –शक्ति दुगुनी हो जाएगी।
लेखक वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार हैं.





