आसाराम के सेवादार श्याम ने पीडित लड़की के पिता के सहयोगी को फोन पर बयान बदलने के लिए धमकी दी थी और जिस तरह से आतंकियों से सम्बंध होने की बात कबूली है, उसके बाद पीडित के पिता ने कहा कि आसाराम के आश्रम में आतंकी, डाकू और खूनियों का आना जाना है। आसाराम से उनके पूरे परिवार को जान का खतरा है। राम जेठमलानी के बयान पर पीड़ित के पिता ने कहा कि उनके बयान ने हमको मानसिक पीड़ा पहुंचाई। हमारा पूरा परिवार इस बयान के बाद से परेशान है। देश के प्रतिष्ठित वकील से इस तरह के बयान की किसी को उम्मीद नहीं थी।
बेटी के बीमार होने के बारे में पीड़ित लड़की के पिता ने कहा कि वह कुछ भी कहे, उसकी हर बात का उत्तर हमारे पास तो नहीं है। हम कब तक अपने आप को साबित करेंगे। बच्ची आसाराम के गरूकुल में बचपन से पढ़ रही है। हमारी बच्ची है। उसके जन्म के बारे में हम ज्यादा जानते हैं या आसाराम का बेटा और वकील। बच्ची के एमपी बोर्ड के सर्टिफिकेट देख लें। क्या एमपी बोर्ड में गलत जन्म तिथि लिखी जाती है। फर्जीवाडा तो आसाराम के गुरुकूल में होता है। आसाराम के मादकपदार्थों के सेवन पर पीड़ित के पिता ने कहा कि आसाराम की आंखों में सूजन रहती है, इससे तो यही लगता है कि वह किसी तरह का नशा करते हैं।
बुजुर्ग वकील जिनकी 75 साल उमर हो और जो वकीलों की श्रेष्ठ श्रेणी में आता हो, उसके मुंह से ये बातें शोभा नहीं देती हैं। उसकी कोई पोती होगी, नातिन होगी, उसके लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करके देखें तो उसे पता चले। उसके दिल पर क्या गुजरेगी। हमे मानसिक रूप से परेशान करने के लिए बिना सिर पैर की बातें कर रहे हैं। जब से हमारे सहयोगी के पास आसाराम के साधक श्याम का धमकी भरा फोन आया है, हमने लोगों से मिलना जुलना कम कर दिया है और किसी भी अनजान आदमी का फोन रिसीव नहीं करता हूं। सावधानी बरतने लगा हूं। श्याम ने जिस दिन बयान बदलने के लिए फोन किया था उस दिन वह जालौन के पास आसाराम के उरई आश्रम में था। आसाराम के आंतकवादियों डाकुओं से सर्म्पक रहे हैं। हम तो जानते थे 11 साल से, जाते थे। कतली खूनी सभी प्रकार के लोग वहां जाते थे, जाते रहे हैं। हर आदमी से संर्पक रखते हैं। तनमन धन सब प्रकार का इसके पास बल है। आसाराम की जमानत होने पर पूरे परिवार को खतरा ही खतरा है। जेल में रह कर इतना प्रपंच रच सकता है तो बाहर आ कर क्या करेगा, यह तो भगवान ही जाने।
धमकी का फोन मिलने के बाद तहरीर सदर थाने को भिजवा दी है। अपने वकील की मार्फत जोधपुर पुलिस को सूचित करा दिया है। तहरीर देने के बाद पुलिस ने किसी तरह की कोई बात नहीं की। शाहजहांपुर पुलिस को कार्यवाही करनी चाहिए, उसको गिरफ्तार करना चाहिए था। शाहजाहंपुर आश्रम में एक बाहरी साधक रह रहा है, उससे मुझे जान का खतरा है। वह

सौरभ दीक्षित
लेखक सौरभ दीक्षित शाहजहांपुर में इलेक्ट्रनिक मीडिया से जुडे हुए हैं और पिछले 6 साल से पत्रकारिता में सक्रिय है. कई चैनलों और अखबारों में काम कर चुके हैं.





