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साधना के सभी चैनल फ्रेंचाइजी मोड में, दर्जनों की नौकरी गई

चर्चा है कि दलाली न मिलने से नाराज़ साधना प्रबंधन ने अपने सभी चैनलों को फ्रेंचाइजी मोड में कर दिया है. अभी साधना न्यूज़ यूपी/उत्तराखंड, बिहार/झारखंड और एमपी/छत्तीसगढ़ में चैनल चला रखा था. लेकिन माली हालत कमजोर होने के कारण प्रबंधन ने अपने सभी चैनलो की फ्रेंचाइजी कर चैनल में कार्यरत सभी को एक झटके से बेरोजगार कर दिया है. चैनल में कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी को चैनलों को ठेके पर देने का जिम्मा पिछले कई महीनों से दिया गया है. बीते महीने जाकर प्रबंधन की मुराद पूरी हो सकी है.

चर्चा है कि दलाली न मिलने से नाराज़ साधना प्रबंधन ने अपने सभी चैनलों को फ्रेंचाइजी मोड में कर दिया है. अभी साधना न्यूज़ यूपी/उत्तराखंड, बिहार/झारखंड और एमपी/छत्तीसगढ़ में चैनल चला रखा था. लेकिन माली हालत कमजोर होने के कारण प्रबंधन ने अपने सभी चैनलो की फ्रेंचाइजी कर चैनल में कार्यरत सभी को एक झटके से बेरोजगार कर दिया है. चैनल में कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी को चैनलों को ठेके पर देने का जिम्मा पिछले कई महीनों से दिया गया है. बीते महीने जाकर प्रबंधन की मुराद पूरी हो सकी है.

प्रबंधन का कहना है कि "मछली के तेल से मछली तलो" यानी कि साधना न्यूज़ जो अपने रिपोर्टरों से नहीं करवा पाया वह अब ठेकेदारों से करवाएगा. यही नहीं, चैनल में कार्यरत कईयों के इस्तीफे की भी खबरें हैं. इसके चलते प्रबंधन ने अपने हेड आफिस में नए नए मुर्गों को फंसाना शुरू कर दिया है. एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो साधना प्रबंधन ने यूपी को 12 लाख रू० में, उत्तराखंड को 7 लाख रू० में, बिहार को 5 लाख, झारखंड को 3 लाख, एमपी को 8 लाख और छत्तीसगढ़ को 3 लाख रू० प्रति महीने की दर से किराए पर दिया है. साथ ही चैनल के डिस्ट्रीब्यूशन और स्टाफ का जिम्मा ठेकेदारों को दिया गया है. यानी कि घर बैठे ही प्रबंधन को लाखों रू० का फायदा हो रहा है. ऐसे में सवाल है कि प्रबंधन क्यों अपना स्टाफ रखेगा. तो कहा जा सकता है कि रू० में गिरावट का असर चैनल पर भी दिखने लगा है जिसके चलते साधना ने देसी कच्चा छोड़ मजबूत डालर की फ्रेंची पहन ली और अपने सभी चैनलों को फ्रेंचाइज़ी कर दिया. (कानाफूसी)

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