Dayanand Pandey : मनीषा जी, बहुत बड़ा सैल्यूट ! हर्ष की बात है मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लमही सम्मान लौटा दिया है। उन्हों ने मुझे आज सुबह फ़ेसबुक पर ९ बज कर १२ मिनट पर यह संदेश भेजा है । जिसे मैंने अभी-अभी देखा है। उन्होंने लिखा है: ''मैंने लौटा दिया दयानंद जी, आपकी सलाह का आभार!''
थोड़ी देर पहले उन्हों ने अपनी वाल पर भी यह लिखा है: ''30 दिसंबर २०१२ को विजय राय जी का फोन आया था, कि आपको लमही सम्मान देने का निर्णय लिया गया है, क्या आपको स्वीकार्य है? उससे पहले शिवमूर्ति जी का बधाई! मैंने पूछा वजह? तो वे बोले विजय राय बताएंगे। अब विजय राय जी, और समीति और ज्यूरी को प्रेस के सामने अपने बयान और इस बयान से हुए मेरे अपमान के लिए क्षमा मांगनी होगी। क्योंकि मैंने किसी को इस सम्मान के लिए अपनी किताब नहीं भेजी थी। न ही किसी को इस सम्मान को देने का संकेत भी किया था।''
सचमुच मनीषा कुलश्रेष्ठ का यह हक बनता है। और लेखकीय गरिमा का तकाज़ा भी। तो क्या विजय राय और उनकी ज्यूरी मनीषा कुलश्रेष्ठ के अपमान के लिए क्षमा मांगेगी? यह भी एक यक्ष प्रश्न है !
वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.
मनीषा पर दयानंद पांडेय का लिखा वो पोस्ट पढ़ें जिसके बाद मनीषा ने एवार्ड लौटाने का फैसला किया…





