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उत्तर प्रदेश

सीएम के निर्देश पर ‘सुलतानपुर दलित-मुस्लिम संघर्ष’ की सीबीसीआईडी जांच शुरू

सुलतानपुर : देहली मुबारकपुर में हुए साम्प्रदायिक बवाल प्रकरण में आखिरकार खद्दरधारियों ने बाजी मार ली। राजनैतिक तिकड़ी भिड़ा मुख्यमंत्री के पास पहुंचे नेताओं ने घटना को गंभीर बता सीबीसीआईडी जांच के आदेश करवा लिए। आदेश मिलते ही सीबीसीआईडी टीम ने गांव पहुंचकर घटना की जांच फिर से शुरू कर दी है। जांच टीम के गांव पहुंचने के बाद अब घर से भागे परिवारीजनों के चेहरे पर से वर्दीधारियों का खौफ उतर आया है। हालॉकि इस प्रकरण में अब राजनैतिक रोटियां सेकने वालों ने भी चुप्पी साध ली है।

सुलतानपुर : देहली मुबारकपुर में हुए साम्प्रदायिक बवाल प्रकरण में आखिरकार खद्दरधारियों ने बाजी मार ली। राजनैतिक तिकड़ी भिड़ा मुख्यमंत्री के पास पहुंचे नेताओं ने घटना को गंभीर बता सीबीसीआईडी जांच के आदेश करवा लिए। आदेश मिलते ही सीबीसीआईडी टीम ने गांव पहुंचकर घटना की जांच फिर से शुरू कर दी है। जांच टीम के गांव पहुंचने के बाद अब घर से भागे परिवारीजनों के चेहरे पर से वर्दीधारियों का खौफ उतर आया है। हालॉकि इस प्रकरण में अब राजनैतिक रोटियां सेकने वालों ने भी चुप्पी साध ली है।

बताते चलें कि इसौली विधानसभा क्षेत्र के देहली मुबारकपुर गांव मंे 31 अगस्त की देरशाम ऐसा खूनी संघर्ष हुआ था कि जो अपने आप में इतिहास बन गया। गोली लगने से मुस्लिम पक्ष के पप्पू इनके बहनोई सिराज व दलित रामसुन्दर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना से दोनों पक्ष के लोग गंगाजमुनी तहजीब भूल हैवानियत पर उतर आए थे। घटना में कई घर जलकर राख हो गए थे। मामला और न बिगड़ने पाया, वजह यह थी कि अमेठी पुलिस कप्तान अलंकृता सिंह ने कई थानों की पुलिस के साथ गांव पहुंचकर अराजकता फैला रहे लोगों को खदेड़ दिया था। देर रात फैजाबाद डीआईजी बीडी पाल्सन व कमिश्नर भी मौके पर पहुंच गए थे। इस गांव में हैवानियत का नंगा नाच देख अधिकारियों के भी रोंगटे खड़े हो गए थे।

एक तरफ जहां मुस्लिम बाहुल्य मोहल्ले में घरों पर ताले लगे थे। सप्ताह भर बाद मुस्लिम पक्ष के लोगों ने भी थाने पहुंचकर कई दलितों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। मुस्लिम समुदाय का कहना था कि पप्पू पर जानलेवा हमला करने के बाद जब यह अफवाह फैलाई गई कि उसकी मौत हो गई है तो अपने आपको फंसता देख रामसुख ने क्रास केस बनाने के लिए अपने ऊपर फायर झोंक एक घर में आग लगा ली थी। वहीं दलित समुदाय के लोगों ने अपने ऊपर हमले के बाद घर जलाने का आरोप लगाया था। बहरहाल घटना के बाद से ही कुछ खद्दरधारी मामले को तूल देने में जुट गए थे। भले ही उनके द्वारा पीड़ितों को मदद नहीं दी गई लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों को छकाया जरूर गया। घटना के बाद से ही मुस्लिम पक्ष के पुरुष घर छोड़कर फरार हो गए थे।

वहीं दलित समुदाय के लोग भी कुतुबपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हुए थे। जैसे-जैसे घटना के दिन ज्यादा बीते वैसे-वैसे पुलिस पर भी उंगली उठने लगी थी। मुस्लिम पक्ष के लोगों का कहना था कि पुलिस यह जानते हुए कि उनके घर में मर्द मौजूद नहीं हैं फिर भी उनके घरों में बिना महिला पुलिस के घुसकर पुलिस उपद्रव मचाती रही। घर के सामान तोड़ने शुरू हो गए थे जिससे महिलाओं में खौफ पैदा हो रहा था। पुलिस ने एकपक्षीय कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। कई बेगुनाहों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जबकि दलित समुदाय के लोगों पर भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बजाए उनकी सुरक्षा में मुस्तैद रही।

पुलिस की इस कार्रवाई से एक पक्ष के लोगों में चिंगारी सुलगना शुरू हो गई थी। वहीं दलित पक्ष भी आरोप लगा रहा था कि पुलिस जान बूझकर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं। सूत्रों के मुताबिक इस नूरा कुश्ती में खद्दरधारी भी अपना वोट बैंक खिसकता देख पशोपेश में पड़ गए थे। सूत्रों के मुताबिक जिले के कुछ कद्दावर नेताओं ने महाराष्ट्र के एक कद्दावर नेता को प्रदेश मुख्यालय बुलाया। जहां पर इन नेताओं ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की और घटना की सीबीसीआईडी जांच कराए जाने की मांग किया। सीएम ने मामले में दिलचस्पी दिखाई और घटना की सीबीसीआईडी जांच के आदेश दे दिए। आदेश मिलते ही पिछले दो दिनों से सीबीसीआईडी टीम गांव पहुंच रही है। सूत्रों का कहना है कि टीम अभी यह पता लगा रही है कि इतनी बड़ी घटना किन वजहों से हुई और इसके पीछे किसका शातिर दिमाग था। बहरहाल मुख्यमंत्री के इस आदेश से जिला व पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली है। वजह यह है कि घटना के बाद से दोनों पक्ष पुलिस प्रशासन पर उंगली उठा रहे थे। पुलिस प्रशासन के सामने एक तरफ कुंआ तो दूसरी तरफ खाईं नजर आ रही थी। अमेठी एसपी अलंकृता सिंह ने बताया कि देहली मुबारकपुर कांड में सीबीसीआईडी ने जांच शुरू कर दी है।

सुलतानपुर से आसिफ मिर्जा की रिपोर्ट.

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