Rajat Amarnath : "आजतक के दीपक शर्मा सघीं हैं''….. ''दीपक शर्मा भ्रष्ट हैं'' ….. ''दीपक शर्मा दाऊद इब्राहिम के प्रवक्ता हैं'' …. ''दीपक शर्मा पेड न्यूज़ करते हैं'' …. ''दीपक शर्मा ने करोड़ों कमाए हैं'' …. ''दीपक शर्मा का फ़ार्म हाउस है'' …. ''दीपक शर्मा बड़ी गाड़ियों में घूमते हैं'' …. ''दीपक शर्मा ये हैं'' … ''दीपक शर्मा वो हैं" … आख़िर दीपक शर्मा का कसूर क्या है? सिर्फ इतना कि वो अच्छी खोजी पत्रकारिता कर रहे हैं…. सिर्फ इसलिए कि वो मंत्रियों को उनकी गलतियों पर उन्हें अच्छे से रगड़ देता है…. सिर्फ इसलिये कि उसे टी.वी की अच्छी जानकारी है और ख़बरों पर पैनी नज़र रखता है?
दीपक शर्मा ने एक ख़बर की नहीं कि कुछ लोग अपने कुएँ से निकल आते हैं और लगते हैं दीपक शर्मा को गरियाने…. मुज़फ्फर नगर के दंगों का सच बताने की कोशिश क्या की कि लग गए कुछ लोग उन्हें गलत साबित करने…. अरे भाई! दीपक ने सिर्फ खबर की है बदले में उसे राज्य सभा नहीं भेजा जा रहा जो उसी की वाॅल पर उसे गाली दी जा रही है… इसी तरह जब दीपक ने विक्लांगों का सा़थ देते हुए सलमान खुर्शीद के ख़िलाफ खबर की तो उसपर दीपक का विरोध हुआ… एक बड़े गुटका व्यापारी और दाउद के आपसी संबंध बता दिए तो दीपक को भ्रष्ट बता दिया…. गोधरा पर खबर की तब उनका विरोध हुआ … आखिर मीडिया विश्लेषकों को और भ्रष्ट नेताओं को ही क्यों खामी नज़र आती है? टी.वी टुडे के श्री अरुण पुरी को दीपक में कमी क्यों नहीं नज़र आती जो दीपक से बार-बार गलत खबर करवातें हैं…? ज़रा सोचिए….
वरिष्ठ पत्रकार रजत अमरनाथ के फेसबुक वॉल से.





