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नए संपादकों के आने के बाद लाइव इंडिया में कानाफूसी का माहौल गरम

जैसा हर किसी मीडिया संस्थान में होता है, अगर टॉप लेवल पर बदलाव हो जाए और नए मैनेजिंग एडिटर और एडिटर इन चीफ आ जाएं तो हर कर्मी दहशत से भर जाता है. सबको ये पहली आशंका होती है कि कहीं उन्हें बाहर का रास्ता न दिखा दिया जाए. आमतौर पर देखा गया है कि नए बासेज जाते हैं तो अपने पीछे अपनी टीम लाते हैं और पुराने समय से कार्यरत लोगों को ऐन-केन प्रकारेण बाहर का रास्ता दिखाते हैं. हालांकि अभी तक लाइव इंडिया में किसी पर गाज तो नहीं गिरी है लेकिन बैठक मीटिंग डांट डपट कसने रगड़ने का दौर शुरू हो चुका है.

जैसा हर किसी मीडिया संस्थान में होता है, अगर टॉप लेवल पर बदलाव हो जाए और नए मैनेजिंग एडिटर और एडिटर इन चीफ आ जाएं तो हर कर्मी दहशत से भर जाता है. सबको ये पहली आशंका होती है कि कहीं उन्हें बाहर का रास्ता न दिखा दिया जाए. आमतौर पर देखा गया है कि नए बासेज जाते हैं तो अपने पीछे अपनी टीम लाते हैं और पुराने समय से कार्यरत लोगों को ऐन-केन प्रकारेण बाहर का रास्ता दिखाते हैं. हालांकि अभी तक लाइव इंडिया में किसी पर गाज तो नहीं गिरी है लेकिन बैठक मीटिंग डांट डपट कसने रगड़ने का दौर शुरू हो चुका है.

नए बासेज यानि एनके सिंह और प्रबल प्रताप सिंह सुबह आठ – नौ बजे ही आफिस पहुंच जाते हैं और रात नौ दस बजे तक जमे रहते हैं. इस बीच दिन भर मीटिंग बैठकों का दौर चलता रहता है. रिपोर्टरों की अलग मीटिंग होती है. डेस्क वालों की अलग होती है. प्रबल प्रताप अपने हिसाब से रिपोर्टरों को कसते हैं तो एनके सिंह अपने हिसाब से कर्मियों को दिशा-निर्देश देते हैं. एनके सिंह के कड़क स्वभाव की चर्चा भी चैनल में हो रही है. ईटीवी और साधना के दौर के लोग उनके बारे में यही फीडबैक लाइव इंडिया वालों को दे रहे हैं कि इनसे पार पाना मुश्किल है.

प्रबल प्रताप रिपोर्टिंग के आदमी रहे हैं और इसलिए उनका ज्यादा ध्यान रिपोर्टरों की तरफ है. लोगों का कहना है कि प्रबल में प्रबंधकीय गुण नहीं हैं, इसलिए उनसे यह उम्मीद करना बेकार है कि वे चैनल को कोई बड़ी दिशा दे पाएंगे. वे निजी तौर पर और रिपोर्टरों के सहारे कुछ बड़ी खबरें ब्रेक करा सकते हैं, यही ज्यादा से ज्यादा संभव होगा. चैनल चलाने में आजकल पर्दे के पीछे के मजबूत निर्माता-निर्देशकों की जरूरत पड़ती है, जो लाइव इंडिया में बिलकुल नहीं है. प्रबल और एनके दोनों ही पर्दे के आदमी हैं, पर्दे के पीछे के नहीं.

देखना है कि आगे आने वाले दिनों में चैनल की दशा-दिशा क्या होती है. वैसे कहने वाले कहते हैं कि चिटफंड के कारोबारियों के इस चैनल में मैनेजमेंट की पहली चिंता चैनल अच्छे से चलाने की नहीं बल्कि अपनी कंपनियों और धंधों के नीतिगत मसलों को सही तरीके से निपटवाने की होती है. कहने वालों का कहना है कि एनके और प्रबल इस तरह के कामों में कोई खास रुचि दिखाएंगे, इसमें संदेह है. ऐसे में माना जा रहा है कि लाइव इंडिया में बहुत दिनों तक शांति बने रहने की संभावना नहीं है. फिलहाल तो सब कुछ नया नया है, इसलिए हर कोई मौन है और दम साधे दोनों के हर एक कदम को देख परख रहा है. (कानाफूसी)

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