भदोही । पुलिसिया उत्पीड़न से त्रस्त जनसंदेश टाइम्स के पत्रकार अपने हक की लडायी लडने में लगे हुए हैं। इसमें उनको सफलता भी मिल रही है। कुछ माह पहले ही पत्रकार सुरेश गांधी के उपर गुण्डा एक्ट के तहत कर्रवाई कर जिला बदर घोषित कर दिया गया था। इसके बाद कोर्ट ने सुरेश गांधी के जिला बदर पर रोक लगा दी।
रोक लगने पर जब सुरेश गांधी भदोही पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और सरेराह बेइज्जत करते हुए थाने ले गयी, वहां उनके साथ बुरा बर्ताव भी किए जाने की बात सामने आयी और फिर आपराधिक धाराएं लगा दी गयी। इसे लेकर सुरेश जायसवाल उर्फ सुरेश गांधी द्वारा न्यायालय में मानवाधिकार के हनन व उत्पीड़न को लेकर याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवायी करते हुए हाईकोर्ट ने डीएम-एसपी और कोतवाल को तलब किया है।
पत्रकार सुरेश गांधी की याचिका पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की डबल बेंच के न्यायमूर्ति वी0के0 शुक्ला एवं राकेश श्रीवास्तव ने प्रमुख गृह सचिव सहित जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं थाना प्रभारी भदोही संत रविदास नगर भदोही को तलब किया है। इसके अलावा पत्रकार पर हो रही सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक, उच्च स्तरीय जांच एवं उनके कमरे का ताला तोड़कर लाखों की लूट आदि मामले में मुआवजे की मांग की गयी थी। इसमें माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका को संज्ञान में लेकर एक माह के भीतर प्रशासनिक अफसरों से रिपोर्ट देने को कहा है।
अभियोजन पक्ष के सीनियर अधिवक्ता के0के0 राय व शम्स विकास ने बताया कि पत्रकार सुरेश गांधी की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसमें जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की उत्पीड़नात्मक कार्यवाईयों की बात कही गयी थी। याचिका में कहा गया है कि पुलिस एवं जिला प्रशासन ने फर्जी तरीके से उन तीन मामलो को आधार बनाकर गुण्डा एक्ट एवं जिला बदर की कार्यवाही की, जो न्यायालय से दोषमुक्त है या पुलिस ने खुद फाइनल रिपोर्ट लगायी है। कार्यवाही के दौरान ही जब गांधी जिले से बाहर थे उसी समय पुलिस ने मकान मालिक की फर्जी रिपोर्ट दर्ज की बल्कि उनके कमरे का ताला तुड़वाकर 25 लाख से भी अधिक का घरेलू सामान लुटवा दिया। इसके अलावा मकान मालिक द्वारा दर्ज करायी गयी फर्जी रिपोर्ट व जिला बदर की कार्यवाही का माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश दिये जाने के बावजूद भी गांधी को पकड़कर पुलिस ने न सिर्फ मारापीट बल्कि एक और फर्जी मुकदमा दर्ज कर दी। पुलिस एवं प्रशासन की उत्पीडनात्मक कार्यवाही से न सिर्फ वे बेघर हो चुके है बल्कि बच्चों की पढ़ाई लिखाई बांधित होने के साथ ही वह अपनी पत्रकारिता भी सूचारू रूप से नहीं कर पा रहे है।





