सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार लिंगाराम कोडोपी और आदिवासी शिक्षिका सोनी सोरी की जमानत याचिका पर छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किये. ये दोनों माओवादियों से कथित संपर्क के आरोप में जेल में हैं. न्यायमूर्ति सुरिन्दर सिंह निज्जर और न्यायमूर्ति एफ एम इब्राहिम कलीफुल्ला ने सोरी और कोडोपी की जमानत याचिका पर छत्तीसगढ सरकार से जवाब तलब किये हैं. राज्य सरकार को 28 अक्तूबर तक अपना जवाब दाखिल करना है.
सोरी और कोडोपी की जमानत अर्जी छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आठ जुलाई को खारिज कर दी थी. इन दोनों को छत्तीसगढ़ में माओवादियों की ओर से इस्सार समूह से धन स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. सोरी और उनके 25 वर्षीय भतीजे कोडोपी को इस समूह द्वारा माओवादियों को संरक्षण के लिये कथित रूप से दिये जाने वाली रकम के संपर्क सूत्र के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार कोपोडी और इस्सर स्टील लिमिटेड से संबंधित भवन निर्माता बी के लाला को 15 लाख रूपए की नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि ये रकम नौ सितंबर, 2011 को दंतेवाड़ा में माओवादियों को सौंपी जानी थी. पुलिस का यह भी दावा है कि सोरी भी कोडोपी की साथी लेकिन वह मौके से बच निकलने में सफल हो गयी थी. इसके बाद सोरी को नयी दिल्ली से चार अक्तूबर, 2011 को गिरफ्तार किया गया था. इस सिलसिले में इस्सर स्टील लिमिटेड के महाप्रबंधक डीवीसीएस वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था. वर्मा और लाला को दंतेवाड़ा की जिला अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया था.





