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कांग्रेस के हसीन सपने

जब संसद में अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने का बिल पेश हो रहा था, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव प्रबंधक अपनी जीत की रणनीति बनाने में जुटे थे। अल्पसंख्यकों को आरक्षण देकर कांग्रेस कितने वोट ‘उगाह’ पाएगी, अभी कहना मुश्किल है, लेकिन कांग्रेस के ‘चुनाव प्रबंधकों’ का दावा है कि कांग्रेस यूपी में सरकार बनाने जा रही है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ जैसा करार देते हैं।

जब संसद में अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने का बिल पेश हो रहा था, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव प्रबंधक अपनी जीत की रणनीति बनाने में जुटे थे। अल्पसंख्यकों को आरक्षण देकर कांग्रेस कितने वोट ‘उगाह’ पाएगी, अभी कहना मुश्किल है, लेकिन कांग्रेस के ‘चुनाव प्रबंधकों’ का दावा है कि कांग्रेस यूपी में सरकार बनाने जा रही है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ जैसा करार देते हैं।

उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, कांग्रेस की न केवल बेचैनी बढ़ गई है, बल्कि उसे लखनऊ की कुर्सी सपने में नजर आने लगी है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का यह भी दावा है कि यदि कांग्रेस अपनी सरकार नहीं बना पाई, तो इतना अवश्य होगा कि उसके बिना सरकार बनाना भी संभव नहीं होगा। जिन इलाकों में कांग्रेस ने दो दशकों से एक भी सीट नहीं जीती, उन इलाकों की अधिकतर सीटें कांग्रेस की झोली में जाने का दावा कांग्रेस के चुनाव प्रबंधक कर रहे हैं। याद रहे कि बिहार के चुनावों के दौरान कांग्रेस के प्रबंधकों ने राहुल को चुनाव जीतने की तस्वीर पेश की थी और मुंह के बल गिर पड़े थे। कांग्रेस की चुनावी रणनीति और क्षेत्र में जुटे चुनाव प्रबंधकों की सही तस्वीर हम आपके सामने रखेंगे, लेकिन उससे पहले एक ‘ओपिनियन पोल’ पर चर्चा कर लेते हैं।

अभी पिछले हफ्ते ही एक निजी चैनल ने चुनाव से पहले का ओपिनियन पोल जारी कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शिरकत करने वाली तमाम बड़ी राजनीतिक पार्टियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस पोल में जहां बसपा को मात्र 120 सीटें देकर उसकी स्थिति कमजोर बताई गई है, वहीं सपा को 135 सीटों के साथ सबसे मजबूत उभरती पार्टी दिखाया गया है। इसी तरह कांग्रेस को 68 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। सीटें बढ़ने की बात तो भाजपा के बारे में भी कही गई हैं। इस सर्वे में भाजपा को 65 सीटें आने की बात कही गई है। पिछले चुनाव में भाजपा को 51 सीटें मिलीं थी। कुल मिलाकर यह शुरुआती ओपिनियन पोल जहां बसपा को सत्ता से बाहर कर रहा है, वहीं सपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती नजर आ रही है। लेकिन कांग्रेस के चुनाव प्रबंधकों को 65 सीटों पर नाराजगी है। 22 से 65 सीटें मिलने के बावजूद कांग्रेस का मानना है कि उसके साथ पोल करने वालों ने छल किया है। किसी साजिश के तहत उसे कम आंका गया है।

403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा वाले राज्य को कांग्रेस ने चुनावी रणनीति के तहत 10 जोनों में बांटकर वहां अपने महत्वपूर्ण और राजनीति के चतुर सुजान घाघ लोगों को बैठा दिया है। हर जोन के पास लगभग 40 सीटों की जिम्मेदारी है। आप यह भी कह सकते हैं कि सात से आठ जिलों को मिलाकर यह जोन बनाया गया है। इन 10 जोनों के प्रमुख हैं- सदानंद सिंह, मदनमोहन झा, जगदीश मेहरा एवं प्रेमचंद्र गुड्डू, अश्क अली टाक, मुजफ्फर हुसैन, भाई जगत प्रताप, रामेश्वर नीखरा, अशोक कुमार, चंदन बागची और शकिरूर्जमां अंसारी।

सबसे पहले आपकी मुलाकात मदनमोहन झा से कराते हैं। झा साहब बिहार की राजनीति करते रहे हैं। चुनावी गणित की अच्छी जानकारी रखने वाले झा साहब जोन नंबर 10 में तैनात हैं। जोन 10 में बुंदेलखंड का इलाका है। कानपुर से चित्रकूट तक का इलाका। इस जोन में करीब 40 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस जोन से 2007 के चुनाव में कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। झा साहब को इस बार यहां से 20 से ज्यादा सीटें आने की संभावना दिखाई पड़ रही है। इसके पक्ष में उनका तर्क भी है। वे कहते हैं, ‘अभी 40 में से 20 सीटों की उम्मीदवारी ही हम तय कर पाए हैं और बाकी सीटें अभी तय होनी हैं। इस बार हम इस इलाके से 20 से ज्यादा सीटें जीतने की स्थिति में हैं। लोग मुलायम और माया के राज से तंग आ चुके हैं और यहां राहुल गांधी का करिश्मा चल रहा है।’ झा साहब की यह भविष्यवाणी कितनी खरी उतरती है, यह तो वक्त ही बताएगा।

बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह को कांग्रेस ने इलाहाबाद जोन में तैनात किया हुआ है। इस जोन में 39 सीटों पर नजर रखने की जिम्मेदारी सदानंद सिंह पर है। सिंह साहब कहते हैं कि हमारी स्थिति करीब 28 सीटों पर अच्छी है और सीधे टक्कर वाला मामला है। राहुल और कांग्रेस के पक्ष में लोगों को देखकर सपा और बसपा के लोग भयभीत हो रहे हैं। मुलायम शासन में गुंडई और माया राज में पार्क के नाम पर करोड़ों की लूट को जनता देख रही है। हम विकास के नारों पर काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि लोकपाल से गरीबों का कोई लेना-देना नहीं है। हम उनके लिए फूड सिक्योरिटी बिल ला रहे हैं।’

एक हैं भाई जगत प्रताप। महाराष्ट्र में अभी एमएलसी हैं। पार्टी ने चुनावी जोन चार में इनकी तैनाती की है। इस जोन के तहत शाहजहांपुर, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और फर्रुखाबाद जिले हैं। इस जोन में 43 सीटें आती हैं। पिछले चुनाव में इस जोन से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी। बाद में एक भाजपा से और एक सपा के विधायक कांग्रेस में शामिल हुए। भाई जगत प्रताप कहते हैं, ‘भले ही पिछले चुनाव में यहां से कोई सीट पार्टी को नहीं मिली हो, लेकिन इस बार 20 से ज्यादा सीटें हम जीत रहे हैं। हम या तो खुद सरकार बनाने की स्थिति में होंगे, नहीं तो हमारे बगैर सरकार नहीं बन सकती है। आने वाले दिनों में हम और बेहतर होंगे।’

पूर्व सांसद जगदीश मेहरा को कांग्रेस ने जोन एक (गाजियाबाद, पश्चिमी उप्र) की जिम्मेदारी दे रखी है। इनके साथ उज्जैन के सांसद प्रेमचंद्र गुड्डू को भी लगाया गया है। मेहरा कहते हैं कि हमें कम से कम 80 से 90 सीटें तो मिल ही जाएंगी और सब कुछ ठीक-ठाक रहा, तो हम 100 से ऊपर भी जा सकते हैं। राहुल जी की वजह से कांग्रेस के प्रति युवाओं में जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वह कल्पना से परे है। बसपा और सपा की राजनीति से लोग तंग आ चुके हैं, इसलिए एक बार कांग्रेस की सरकार को भी युवा पीढ़ी देखना चाह रही है।’

रामेश्वर नीखरा की जिम्मेदारी जोन पांच को संभालने की है। जोन 5 का मुख्यालय लखनऊ में रखा गया है। नीखरा अपने इलाके में ‘चाणक्य’ के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने कहा कि जो ओपिनियन पोल हाल में सामने आए हैं, वह गलत है और झूठे भी। आज सारा वातावरण कांग्रेस के पक्ष में है और हम सरकार बनाने की स्थिति में हैं। हम विकास का मुद्दा लेकर जनता के पास जा रहे हैं और जहां तक भ्रष्टाचार का सवाल है, यह सब मीडिया का इश्यू है। लखनऊ में बैठे नीखरा को वहां के ग्रामीण जिला अध्यक्ष सिराज भाई का सहयोग मिल रहा है। सिराज भाई पर कांग्रेस को जिताने की जिम्मेदारी है, लेकिन सिराज भी राहुल की भाषा ही बोलते नजर आ रहे हैं। सिराज कहते हैं, ‘पिछले 22 सालों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है और नई पीढ़ी को कांग्रेस शासन का अहसास भी नहीं है। अब प्रदेश के युवा राहुल के साथ आ रहे हैं और भीड़ में आने वाले युवा वोट में बदल गए, तो कांग्रेस की बड़ी जीत पक्की है।’

चंदन बागची को तो आप जानते ही होंगे। बिहार विधानसभा चुनाव में भी बागची सक्रिय थे। बिहार में भी कांग्रेस की सरकार को सभी ‘चुनाव प्रबंधक’ बना रहे थे। हालांकि राहुल को बिहार की स्थिति की सही जानकारी थी, लेकिन इतना खराब परिणाम आएगा, इसकी कल्पना राहुल को नहीं थी। इस बार कांग्रेस ने बागची साहब को भी उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है। बागची साहब जोन 7 को देख रहे हैं। गोरखपुर समेत 40 विधानसभाओं की जिम्मेदारी बागची पर है। वह कहते हैं, ‘इस बार माया और मुलायम गफलत में न रहें। कांग्रेस के सामने उनकी नैया डूब चुकी है। माया और मुलायम ने जिस तरह से यूपी को बर्बाद किया है, उसी तरह जनता इन्हें समाप्त करने जा रही है। हम इस बार सरकार बनाने जा रहे हैं। हम पूर्वांचल और बनारस में अच्छी सीटें ला रहे हैं। परिणाम देखकर आप दंग हो जाएंगे।’

जोन 6 बस्ती और उसके पड़ोसी जिले को नियंत्रित कर रहा है। यहां के प्रभारी हैं समस्तीपुर के अशोक कुमार। वह राहुल के काफी नजदीक भी हैं। कांग्रेस को इस जोन में कुल दो सीटें पिछले चुनाव में मिलीं थीं। इस जोन में कुल 40 सीटें हैं और अशोक कुमार को यकीन है कि इस बार इस जोन से 20 से ज्यादा सीटें कांग्रेस को मिल सकती हैं। अशोक कुमार कहते हैं, ‘सर्वे में कांग्रेस को कम सीटें दिखाई गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस के अलावा किसी पार्टी के लिए कोई जगह नहीं है। हम कई इलाकों में वन-टू-वन फाइट में हैं। इस इलाके से भाजपा का सफाया हो रहा है। हम 150 से ज्यादा सीटें ला रहे हैं। हम सरकार बनाएंगे और सरकार नहीं बनती है, तो किसी के साथ एलायंस नहीं करेंगे।’

जोन दो की जिम्मेदारी अश्क अली टाक को दी गई है। इस जोन में आगरा, अलीगढ़ समेत 43 जिले हैं। टाक कहते हैं, ‘पिछले चुनाव में यहां से तीन सीटें कांग्रेस को मिलीं थी, लेकिन इस बार 15 से 20 सीटें हमें मिल रही हैं। यहां से बसपा और सपा का नामों-निशान नहीं बचेगा। चुनाव होने दीजिए, तब पता चलेगा कि असली हीरो कौन है। राहुल के सामने कोई टिकेगा नहीं।’ कांग्रेस की जमीनी हकीकत चाहे जो हो, आप इतना तो देख ही रहे हैं कि कांग्रेस के सभी दिग्गज चुनाव प्रबंधक ‘राहुल फोबिया’ के शिकार हैं। ये वही सारे लोग हैं, जो बिहार चुनाव में भी राहुल की जीत मान रहे थे। संभव है कि राहुल की मेहनत से प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को कुछ सीटें और मिल सकती हैं, लेकिन सरकार बनाने की बात लोगों के गले उतर नहीं रही है। गरोठ, झांसी के सपा विधायक और अखिलेश यादव के नजदीकी दीपनारायण यादव कहते हैं कि चुनाव के पहले कुछ भी कहना ज्यादा है। राहुल मीडिया में भले ही दिखाई पड़ रहे हों, लेकिन वह चुनाव जीतने नहीं जा रहे हैं। सपा अपने सिद्धांतों पर चल रही है और हमारी जीत तय है। यह तो चुनाव में ही तय हो जाएगा कि असली हीरो कौन है?’

वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अखिल का यह लिखा हमवतन अखबार में प्रकाशित हुआ है. वहीं से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

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