Kamal K. Jain : यशवंत भाई (Yashwant Singh Yashwant Singh Bhadas4media ) से वास्तविक दुनिया में तो कोई जान-पहचान नहीं है, उन्हें जितना जाना समझा यही इसी दुनिया में जाना… बड़ा बिंदास कैरेक्टर है. उनसे सीखा कि कैसे अपनी बात को लोगो के सामने रखा जाता है, बिना अच्छे-बुरे के फेर में पड़े.. अपने मन की करना भी उनसे बेहतर कौन सिखा सकता है.
मिजाज़ ऐसा फक्कड़ की जब जेल गए तो उसे भी उत्सव बना डाला.. उनकी उसी जेल यात्रा का वृतांत पुस्तक रूप में मिला, कल ही. (कुछ तकनीकी खामी के चलते किताब लेट मिली, मगर उसके साथ "काव्यनाद" की एक मुफ्त सी डी भेज कर देरी की भरपाई कर दी गयी है)..
इसमें से काफी कुछ अनुभव तो हम लोग भड़ास और फेसबुक पर पढ़ ही चुके थे, मगर अपनी तो आदत है की जब तक कागज पर न पढ़ ले चैन नहीं मिलता.. तो शुरुआती कुछ पन्ने पलटने के बाद.. आज इत्मीनान से उसका वचन किया जायेगा..
तब तक..
जय हो आपकी (किताब के प्रथम पेज पर यशवंत भाई का लिखा सन्देश)
कमल के. जैन के फेसबुक वॉल से.





