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प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट सूरतसिंह शेखावत का निधन

झुंझुनूं। कार्टूनिस्ट सूरत सिंह शेखावत का 87 साल की उम्र में गुरुवार रात करीब 9 बजे हृदय गति रुकने से राजस्थान के झुंझुंनू जिले के झेरली गांव में निधन हो गया। उनका दाह संस्कार शुक्रवार को उनके पैतृक गांव झेरली में ही किया गया। उनके दाह संस्कार में विधायक सुन्दरलाल सहित सहित सभी पार्टियों के कई प्रमुख राजनीतिज्ञों और उनके चाहने वाले क्षेत्र के हजारों लोगों ने शामिल होकर उन्हें अन्तिम विदाई दी।

झुंझुनूं। कार्टूनिस्ट सूरत सिंह शेखावत का 87 साल की उम्र में गुरुवार रात करीब 9 बजे हृदय गति रुकने से राजस्थान के झुंझुंनू जिले के झेरली गांव में निधन हो गया। उनका दाह संस्कार शुक्रवार को उनके पैतृक गांव झेरली में ही किया गया। उनके दाह संस्कार में विधायक सुन्दरलाल सहित सहित सभी पार्टियों के कई प्रमुख राजनीतिज्ञों और उनके चाहने वाले क्षेत्र के हजारों लोगों ने शामिल होकर उन्हें अन्तिम विदाई दी।

उनके एक पुत्र डॉ. मूलसिंह शेखावत झुंझुनूं से विधायक भी रह चुके हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद शीशराम ओला से भी उनके करीबी रिश्ते रहे हैं। सूरत सिंह एक बार सूरजगढ़ पंचायत समिति के प्रधान, 12 साल तक उपप्रधान और लगातार 35 साल तक झेरली ग्राम पंचायत के सरपंच भी रहे थे। उनके निधन का समाचार पता चलते ही जिले भर में शोक की लहर फैल गई। स्व.सूरतसिंह देश में ख्यातनाम कार्टूनिस्ट थे, उनके बनाये कार्टून देश के हिन्दी व अंग्रेजी समाचार पत्रों व विभिन्न पत्रिकाओं में वर्षों तक छपते रहे हैं। ख्यातनाम कार्टूनिस्ट आर के. लक्ष्मण के करीबी रहे स्व. सूरतसिंह को राजस्थान के बेस्ट कार्टूनिस्ट के पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

सूरतसिंहजी की हाजिरजवाबी के किस्से पूरे इलाके में चर्चित रहे हैं। वे आजादी से र्पूव प्रतिष्ठित जे स्कूल ऑफ आर्टस के विद्यार्थी रहे हैं, जिस स्कूल में उनके साथी रहे प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर के. लक्ष्मण को भी प्रवेश नहीं मिल सका था। उनके कार्टून से नाराज होकर एक बार डॉ. भीमराव अंबेडकर ने उन पर मुकदमा भी दर्ज करवा दिया था, मगर जब वे सूरतसिंहजी से मिले तो उनकी हाजिरजवाबी और तर्कों से सहमत ही नहीं हुए, बल्कि उन पर किया गया मुकदमा भी वापस ले लिया।

दरअसल डॉ. अंबेडकर लोकसभा में एक बिल लेकर आए थे, जो सूरतसिंहजी के दृष्टिकोण से सही नहीं था। इस बिल को टारगेट कर सूरतसिंहजी का एक कार्टून प्रतिष्ठित अखबार में छपा। कार्टून में एक मरे भैंसे को आदमी को घसीटते हुए दिखाया गया था। डा. अंबेडकर को यह बुरा लगा, पर जब दोनों की मुलाकात हुई तो अंबेडकर उनकी बातों से सहमत हो गए। सूरतसिंहजी के चाहने वालों ने इसे एक जिंदादिल इंसान, हाजिर जवाब राजनेता का जाना तथा एक युग का अवसान बताते हुए शोक जताया है। वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़कर गए हैं।

झुंझुनूं से रमेश सर्राफ की रिपोर्ट.

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