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”भूमाफिया पत्रकार स्वतंत्र मिश्रा के खिलाफ गैंगेस्टर के तहत कार्यवाही के संबंध में”

सेवा में, माननीया मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ। विषय- भूमाफिया पत्रकार स्वतंत्र मिश्रा के खिलाफ गैंगेस्टर के तहत कार्यवाही के सम्बन्ध में। महोदय, निवेदन है कि नरेन्द्रनगर कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाईटी लि0, लखनऊ को एल0डी0ए0 द्वारा 51 भूखण्ड कपूरथला स्थित सेक्टर-एफ अलीगंज में आवंटित एवं निबंधित है। एक पूर्व सचिव कुँवर सिंह द्वारा वर्ष 2002 में उक्त भूखण्डों में से बी-1/8, बी-1/9, बी-1/10 (सभी 3803 वर्गफीट) रजिस्ट्रयां कर दी गयी थीं। इनके विरूद्ध मध्यस्थ न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय वर्ष 2004 पर पीड़ित पक्षों द्वारा उक्त समिति के विरूद्ध अपीलें दायर की गयी जो आज भी उ0प्र0 सहकारी ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।

सेवा में, माननीया मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ। विषय- भूमाफिया पत्रकार स्वतंत्र मिश्रा के खिलाफ गैंगेस्टर के तहत कार्यवाही के सम्बन्ध में। महोदय, निवेदन है कि नरेन्द्रनगर कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाईटी लि0, लखनऊ को एल0डी0ए0 द्वारा 51 भूखण्ड कपूरथला स्थित सेक्टर-एफ अलीगंज में आवंटित एवं निबंधित है। एक पूर्व सचिव कुँवर सिंह द्वारा वर्ष 2002 में उक्त भूखण्डों में से बी-1/8, बी-1/9, बी-1/10 (सभी 3803 वर्गफीट) रजिस्ट्रयां कर दी गयी थीं। इनके विरूद्ध मध्यस्थ न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय वर्ष 2004 पर पीड़ित पक्षों द्वारा उक्त समिति के विरूद्ध अपीलें दायर की गयी जो आज भी उ0प्र0 सहकारी ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।

यह कि उक्त अपीलों के दौरान दूसरे सचिव श्री रमेश चन्द्र मिश्रा ने जब वर्ष 2005 में उपरोक्त भूखण्डों को क्रमशः सरलावर्मा, नीरजवर्मा, राजकपूर को अत्यन्त कम मूल्य मात्र रू0 14/- प्रति वर्ग फुट की दर पर निजी लाभवश, मनमाफिक रजिस्ट्रियां समिति की अनुमति के बिना कर दीं, तब समिति ने उन्हें दि0 12.17.05 को सचिव पद से बर्खास्त कर दिया और थाना अलीगंज में एफ0आई0आर0 सं0 362/07, व 319/07 दर्ज करायी जिसमें वह पांच माह तक जेल में रहे और पुलिस द्वारा चार्जशीटेड हैं।

जैसा कि ज्ञात हुआ है कि उक्त भूखण्डों को विवादित होने के बाद भी तीसरी बार राज कपूर से सहारा के पत्रकार स्वतंत्र मिश्रा ने अपनी माँ भगवती देवी के नाम और नीरज वर्मा से स्वतंत्र मिश्रा ने अपने रिश्तेदार पवन शुक्ला के पिता गिरधारी लाल शुक्ला के नाम समिति को कोई जानकारी के बिना धोखाधड़ी से लिखवालिया। जबकि स्वतंत्र मिश्रा अच्छी तरह जानते थे कि यह प्लाट विवादित है और इसी प्लाट के सम्बन्ध में खाना अलीगंज में मुकदमा दर्ज हो चुका है और सम्बन्धित व्यक्ति को जेल हो चुकी है फिर भी उन्होंने धोखाधड़ी की नियत से और अपने पत्रकारिता के प्रभाव का इस्तेमाल करने की नियत से तथा जबरदस्ती कब्जा करने की नियत से प्लाट की रजिस्ट्री 5 लाख रूपये में करायी थी। क्योंकि स्वतंत्र मिश्रा को पता था कि एक प्लाट लगभग 2 करोड़ रूपये का है तथा दोनो प्लाटों की कीमत मार्केट रेट से 4 करोड़़ रूपया बनती है।

यह कि दि0 10.12.11 को प्रातः 10 बजे चैकीदार के परिवार द्वारा सूचना मिलने पर कि कुछ बाहरी व्यक्ति उक्त भूखण्डों, पर नाजायज कब्जा करने की नियत से खोदाई कर रहे हैं, समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे तो खोदाई कराने वालों में एक ने अपना नाम पवन शुक्ला, भूखण्ड बेचने और प्रापर्टी डीलिंग का काम करने वाला, चन्द्रलोक व चाँदगंज गार्डेन्स में अनेक भवन/भूखण्डों का स्वामी बताते हुए कहा कि भूखण्ड सं0 बी-1/9, पहले से था और बी-1/10 उसने और खरीद लिया है। काफी पैसा लग गया है, निर्माण हर हालत में किया जायेगा। हम सक्षम हैं, कोई रोक नहीं सकता। आगे जे0सी0बी0 से खोदाई की जाएगी। हम सोसाइटी को नहीं जानते और न ही किसी की परमीशन की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि जिन भूखण्डों की अवैधानिक रजिस्ट्रियों के लिये श्री मिश्रा जेल गये और चार्जशीटेड है, उन्हीं भूखण्डों पर जबरन कब्जा करने की साजिश हैं।

यह कि नीरजवर्मा व राजकपूर की, श्री रमेश चन्द्र मिश्रा द्वारा फर्जी दिखाई गयी सदस्यता को समिति के प्रस्ताव सं0- क्रमशः 2 व 4 दि0 15.12.10 द्वारा समाप्त कर दी गयी, और गैर-सदस्यों को भूखण्ड दिये जाने का कोई प्राविधान हीं है। यह कि उक्त की सूचना पुलिस को मौखिक रूप से दे दी गयी थी। तथा उसमें यह भी कहा गया था कि उक्त भूमाफियाओं ने फिलहाल कब्जा करने की कार्यवाही टाल दी है परन्तु यह किसी समय जोर जबरदस्ती से कब्जा कर सकते है। अतः इनके खिलाफ कार्यवाही की जाय।

परन्तु स्वतंत्र मिश्रा और उसके समर्थक पवन शुक्ला के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। बल्कि दिनांक 26.12.11 को स्वतंत्र मिश्रा ने अपने पत्रकारिता का प्रभाव इस्तेमाल करते हुये पुलिस से मिलकर उक्त प्लाट पर कब्जा करने का प्रयास किया तथा उसकी नींव तथा बाउन्ड्री बनवाना चालू कर दिया। जिसकी जानकारी समिति के सदस्यों पर होने पर उन्होंने इसकी शिकायत डी0आई0जी0 एवं जिलाधिकारी से की जिस पर डी0आई0जी0 ने कब्जा रोकने का आदेश अलीगंज खाना को दिये। परन्तु फिर भी 27.12.11 की शाम 4 बजे तक स्वतंत्र मिश्रा की गुण्डागर्दी का खुला तमासा चलता रहा और पूरा शहर उसकी गुन्डई देखता रहा। दिनांक 27.12.11 को समिति के सदस्य जब व्यक्तिगत रूप से डी0आई0जी0 से मिले तब उन्होंने दोबारा फिर पुलिस को हड़काया और कहा की अगर स्वतंत्र मिश्रा कब्जा नहीं रोकता है तो उसको उठाकर जेल में बन्द कर दो। इस धमकी के बाद स्वतंत्र मिश्रा ने नजायज कब्जा रोका। इसमें जिलाधिकारी ने भी पूरा हस्तक्षेत्र किया था। इससे यह बात पूरी तरह सिद्ध हो गयी कि यदि उक्त अधिकारी इतना सहयोग न करते तो आम आदमी स्वतंत्र मिश्रा के गुन्डई को कैसे बरदास्त कर सकता है। यही कारण है कि सीतापुर रोड पर तथा बक्शी के तालाब पर इस भूमाफिया के नाम की तूती बोलती है। जहाँ दर्जनों प्लाटो और जमीनों पर लगभग 70 करोड़ से अधिक की प्रापर्टी पर कब्जा किया है।

यह कि उक्त सोसाइटी पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा गठित की गई थी जिसमें कई सम्भ्रान्त एवं प्रशासनिक अधिकारियों के प्लाट है जिसमें आज भी नारायण दत्त तिवारी का एक प्लाट है जो उनके भाई देख-रेख करते है। यही नहीं इसमें एक प्लाट सी0बी0आई0 के एस0एस0पी0 के पिता का भी है। इतने अधिकारियों के प्लाट होने के बाद भी इस माफिया की गुण्डागर्दी देखते ही बनती थी।

स्वतंत्र मिश्रा ने प्लाट कब्जा करने से पहले समिति के पदाधिकारियों को काफी धमकाया भी था तथा कहा था अगर नहीं मानोगे तो अपने अखबार में तुम्हारे खिलाफ सीरीज छपवा दी जायेगी। इसकी जानकारी समिति के सदस्यों से की जा सकती है। यह पत्रकारिता के नाम पर खुली ब्लैकमेलिंग है। उक्त व्यक्तियों ने जबरन नाजायज कब्जा करने की कार्यवाही यद्यपि फिलहाल टाल दी है, किन्तु आशंका है कि उक्त व्यक्ति किसी भी समय कब्जा करने की जोर-जबदस्ती कर सकते हैं, जिसे शान्त भंग व कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है।

स्वतंत्र मिश्रा लखनऊ के बदनाम माफिया पत्रकार है इनकी आम छवि दलाली और जबरदस्ती जमीनों पर कब्जा करना तथा हथियारों के सौदागर के रूप में जानी जाती है तथा समाचार पत्रों में इसके खिलाफ खूब छपता रहता है। स्वतंत्र मिश्रा ने बक्सी तालाब क्षेत्र में लगभग 70 करोड़ रूपया की सम्पत्तियों पर जबरदस्ती और प्रभाव का इस्तेमाल करके कब्जा किया है। जिनमें कई सम्पत्तियां हरिजनों की है। जिनकों पुलिस से धमका कर जबरदस्ती लिखवाया गया और उनका पैसा भी नहीं दिया गया। कई लोगों को पुलिस से मिलकर फर्जी मुकदमों में बन्द करा दिया गया। ताकि वह डर की वजह से मुह न खोल सके। यहीं नहीं दो सम्पत्तियों पर स्वतंत्र मिश्रा ने अप्रत्यक्ष रूप से दो पक्षों में लड़ाई कराकर एक पक्ष की हत्या करा दी तथा दुसरा पक्ष जेल चला गया।
बाद में उनके परिवार वालों से अपने नाम रजिस्ट्री करा ली। बक्सी के तालाब में इसके दो बड़े फार्म हाउस पूरी तरह कब्जा करके बनवाये गये। इसने और इसके साथ पवन शुक्ला ने एक मरे व्यक्ति की रजिस्ट्री एक फर्जी व्यक्ति को खड़ा करके करा ली थी। दिनांक 2004-2005 में जिसकी एफ0आई0आर0 बक्सी के तालाब के थाना में हुई थी। स्वतंत्र मिश्रा का पूरा गिरोह है जो प्रापर्टी डीलिंग के साथ हथियारों की खरीदफरोक्त का काम भी करता है। स्वतंत्र मिश्रा के पिता के नाम बने हथियारों की फर्जी दुकानो की स्टोरी कई अखबार छाप चुके है। जिससे स्पष्ट है यह व्यक्ति पूरी तरह देशद्रोही गतिविधियों में शामिल है।

परन्तु पुलिस की मिली भगत और पत्रकारिता के प्रभाव में इसका कुछ नहीं होता। जो इसकी शिकायत करता है पुलिस उसी के खिलाफ कार्यवाही करने में जुट जाती है और उसी की छान-बीन चालू कर देती है। इसलिए इसके खिलाफ शिकायत करने वाले या तो अपना पता बदल देते है या डर की वजह से बयान बदल देते है। यह इस समय प्रदेश का सबसे बड़ा माफिया है। जो पत्रकारिता की आढ़ में जेल जाने से बचा हुआ है। जबकि इसके काले कारनामे सर्वविदित है।

स्वतंत्र मिश्रा द्वारा पत्रकारिता की आढ़ में लगभग 125 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति बनाई है। जिसमें लखनऊ, उन्नाव, नोएडा, एवं देहरादून की सम्पत्तियां शामिल है। स्वतंत्र मिश्रा मानसिक रूप से एक बहुत बड़ा क्रिमिनल है तथा बहरूपिया प्रवृत्ति का व्यक्ति है। प्रदेश के कई आई0पी0एस0 एवं आई0एस0 अधिकारियों को इसने अपने जाल में फास रखा है। जो इसके गलत धन्धों में इसका साथ देते है तथा अवैध व्यापार में हिस्सेदार भी है। कई अधिकारियों को इसने जमीने खरीदवायी है। तथा कई अधिकारियों का इसकी प्रापर्टी डीलिंग में पैसा फसा लगा हुआ है। ऐसी स्थिति में वह इसकी मदद करते है। 26.12.11 को अलीगंज धानाध्यक्ष ने इसकी खुली मदद की जबकि अधिकारी निर्माण बन्द कराने का आदेश देते है। और थानाध्यक्ष ने जानबूझ कर सभी फोर्स बाहर भेज दिया था।

स्वतंत्र मिश्रा ने उक्त दोनो प्लाटों की दाखिल खारिज कराने के लिये 13.04.2007 को लखनऊ विकास प्राधिकरण में अपनी माता के नाम से लिये गये प्लाट के लिये आवेदन किया था। परन्तु प्लाट विवादित होने के बाद भी विकास प्राधिकरण ने दाखिल खारिज नहीं किया और न ही उसका नक्शा पास किया।

यह कि इतना सब होने के बाद भी प्रशासन ने फिलहाल कब्जा रोकवा दिया है परन्तु स्वतंत्र मिश्रा का ईटा अभी वहीं पड़ा हुआ है। और कभी यह दोबारा कब्जा कर सकता है। जिलाधिकारी द्वारा ए0सी0एम0 अलीगंज को इसकी जांच के आदेश दे दिये गये है। जहां यह पत्रकारिता के नाम की धौस दे रहा है। इस प्रकरण में समिति के सदस्य जिनका मोबाइल नम्बर 9453175900 एवं 9415407878 से फोन कर पूछा जा सकता है।

अतः अनुरोध है कि सम्भावित अवैधानिक निर्माण को न किए जाने के लिए न्यायहित में आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें तथा प्लाट पर पड़ी सभी सामग्री को जब्त कर बाउण्ड्री गिरवाने का कष्ट करें तथा स्वतंत्र मिश्रा के खिलाफ भूमाफिया के रूप में दी गयी अलीगंज थाने में एफ0आई0आर0 दर्ज करवाने का आदेश पारित करने का कष्ट करें तथा स्वतंत्र मिश्रा को गैंगेस्टर में बंद कर इसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने का कष्ट करें तथा इसके द्वारा कब्जायी गयी सभी जमीनों की जांच करवाने की कृपा करें।

भवदीय
(धर्मेन्द्र वाष्णेय)
उपाध्यक्ष
अलीगंज वेलफेयर सोसाइटी
लखनऊ

दिनांकः 28.12.11

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