Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

लखनऊ

गांधी को भले ही याद न करो, गांधी को आत्मसात तो करो

कल गांधी जयंती थी। पूरे देश ने हर्ष और उल्लास के साथ महात्मा गांधी को याद किया। मनमोहन सिंह से लेकर सोनिया गांधी तक ने सुबह ही राजघाट पर जाकर गांधी जी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें याद किया।  लेकिन यहाँ जो बेहद अहम सवाल है वो ये कि क्या सच में आज हम सब गांधी जयंती मनाने के लायक हैं जबकि आये दिन हम सब गांधी के विचारों और सिद्धांतो की सरेराह हत्या करते हैं।

कल गांधी जयंती थी। पूरे देश ने हर्ष और उल्लास के साथ महात्मा गांधी को याद किया। मनमोहन सिंह से लेकर सोनिया गांधी तक ने सुबह ही राजघाट पर जाकर गांधी जी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें याद किया।  लेकिन यहाँ जो बेहद अहम सवाल है वो ये कि क्या सच में आज हम सब गांधी जयंती मनाने के लायक हैं जबकि आये दिन हम सब गांधी के विचारों और सिद्धांतो की सरेराह हत्या करते हैं।

गांधी ने सत्य, अहिंसा और मानव प्रेम के रास्ते पर चलने की बात कही थी और हम हिंसा, भ्रष्टाचार, झूठ, स्वार्थ, के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम किस मुंह से गांधी जयंती मना रहे हैं। जबकि गांधी को तो उनकी शहादत के बाद से ही हम भूल गए विशेषकर हमारा युवा वर्ग जिसके कंधे पर कल के भारत का भविष्य है।

अज्ञानता और उन्माद की लपेट में फंसा आज का आधे से ज्यादा युवा खुद को चंद्रशेखर आजाद या भगत सिंह का अनुयायी बताने में ज्यादा गर्व महसूस करता है। उससे गाधी के विषय में पूछो तो सदैव अप्रत्याशित जवाब ही मिलता है। यहाँ मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मेरा इरादा किसी की भी तुलना करना नहीं है अपितु उन विषयों को उठाना है जो समय के साथ ही सही किन्तु इस देश के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। 

देश को आजादी किसी एक दम पर नहीं अपितु सामूहिक प्रयास से मिली थी। एक तरफ जहाँ महात्मा गांधी के नेतृत्व में नरमपंथी दल आजादी पाने के लिए प्रयासरत था तो वही चन्द्र शेखर आजाद और भगत सिंह के नेतृत्व में गरम पंथी दल भी आजादी के लिए कुछ भी कर डालने तैयार था। इन सभी महान आत्माओं का ही संयुक्त प्रयास था कि 15 अगस्त 1947 को इस देश को आजादी मिल गयी।

पर आजादी बाद से ही देश में विघटनकारी शक्तियों द्वारा जिस तरह गांधी को नीचा दिखाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है वह यह बताने के लिए काफी है कि आज के दौर में विघटनकारी शक्तियाँ कितना विकराल रूप इस देश में ले चुकी हैं।

यहाँ चिंता का जो मुख्य कारण है वो ये इन विघटनकारी शक्तियों का प्रभाव सीधा सीधा इस देश के युवा वर्ग पर पड़ रहा है जो अज्ञानता में ही सही लेकिन उनके विचारों को खुद लागू कर रहा है जो किसी भी रूप में इस देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। लिहाजा अब ये समय की मांग है कि झूठ और फरेब का जो मायाजाल इन विघटनकारी शक्तियों ने युवा वर्ग के सामने बुन रखा है उसे तोड़ा जाये। और ये तभी हो पायेगा जब हम गांधी को याद करने की जगह पर गांधी को आत्मसात करेंगे उनके मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएंगे। किन्तु यक्ष प्रश्न तो यही है कि क्या हम गांधी को आत्मसात कर पायेंगे।

लेखक अनुराग मिश्र लखनऊ के युवा और स्वतन्त्र पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 09389990111 के जरिए किया जा सकता है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...