महाराष्ट्र में पिछले दो दिन में तीन पत्रकारों के उपर जानलेवा हमले हुए हैं. इनमें जय महाराष्ट्र न्यूज चैनल के विकास बडे, टीवी9 के रिपोर्टर रामराजे शिंदे व सागर कुलकर्णी और अहमद नगर जिले के श्रीरामपूर के पत्रकार धनंजय कानगुडे का अंतर्भाव है. विकास बडे को जात पंचायत के कुछ कार्यकर्ताओं ने कमरे में दो घंटे तक बंद करके बुरी तरह से पीटा, जिससे उन्हें हॉस्पिटल में भरती कराना पड़ा. इस कांड के नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. मुंबई के जोगेश्वरी में यह घटना घटी.
रामराजे शिंदे और सागर कुलकर्णी को मुख्यमत्री के बॉडी गार्ड ने ही जमकर पीटा. जब कल टीवी9 के कुछ पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से इस बारे में बात कही तो उन्होंने इस घटना के उपर खेद प्रकट करते हुये जिम्मेदार के उपर कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया. तीसरी घटना श्रीरामपुर में हुई. जाति धर्म की अनिष्ठा प्रथा के विरोध में लिखने वाले पत्रकार कानगुडे को बुरी
तरह से पीटा गया. इस मामले मे श्रीगोंदा पुलिस मे एफआईआर दर्ज किया है.
इन तीन घटना से महाराष्ट्र के पत्रकार जगत में काफी आक्रोश है. इन तीन घटना की निंदा और पत्रकारों के उपर बढते हमले के विरोध मे कल गांधी जयंती के अवसर पर महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती और पुणे जिला मराठी पत्रकार संघ की और से समिति के अध्यक्ष एस.एम.देशमुख के नेतृत्व में पुणे में 200 पत्रकारों ने एक मूक मोर्चा का आयोजन किया था. ससून चौक से मोर्चा गांधी पुतले तक गया. वहां डेमॉस्ट्रेशन किये गये.
इस समय पत्रकारों को संबोधित करते वक्त देशमुख ने 16 नवंबर राष्ट्रीय पत्रकारिता दिन महाराष्ट्र में काला दिन (black day) के तौर पर मनाने का ऐलान किया. इस दिन महाराष्ट्र के सभी तालुका और जिला स्तर पर रास्ता रोको किया जायेगा और सरकार पत्रकारों के मांगों की तरफ कर रही अनदेखी के विरोध में सरकार के पुतले का भी प्रतीकात्मक दहन हर जिले में तहसील स्तर पर किया जाएगा. बाद में सुभाष भारद्वाज, शरद पाबळे, बापूसाहेब गोरे, राजेंद्र कापसे और कांकरिया के नेर्तृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने निवासी जिलाधिकारी से भेट कर एक ज्ञापन दिया.





