जर्मनी की एक पत्रिका ने दुनिया के 25 ऐसे मुल्कों की सूची जारी की है जिनके पास फ़ौज नहीं है. ये सभी देश अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के आस पास हैं. इन देशों में इंदोरा, बारबाडोस, कोस्टारिका, डोमेंकेन, ग्रेंडा, हैती, आइस्लॅंड, कैर्बै, लॅकटन स्टेन, मिकरोनेसिया, मोनाकाओ, पनामा, तुवालो, वेटिकन सिटी, समउवा आदि प्रमुख हैं. जब मैंने यह खबर पढी तो मैंने इन देशों का डाटा जमा करना शुरू किया. मालूम हुआ कि सभी मुल्क फ़ौज के बिना भी अपना वजूद बरकरार रखे हुए हैं और साथ-साथ तरक्की भी कर रहे हैं. छोटे मुल्क होने के उपरान्त भी कुछ ऐसी विशेषता है जो और किसी मुल्क के पास नहीं है.
सब से पहले हैती को देखिये. 1804 में संसद बना और अभी तक चल रहा है. इसलिये इसे दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र कहा जाता है. दोमैन्केन 1844 में आज़ाद हुआ और अब तक 100 से अधिक राष्ट्रपति लोकतांत्रिक तरीके से चुन कर आ चुके हैं. कोस्टारिका 1825 में आज़ाद हुआ. 1945 तक गृहयुद्ध में उलझा रहा. उसने 1946 में अपनी फ़ौज खत्म कर दी और सभी नागरिकों के लिये शिक्षा मुफ्त और अनिवार्य कर दिया. बार्बडस 1966 में आज़ाद हुआ. वहां भी राष्ट्रपति जम्हुरी तरीके से ही चुने जाते हैं. एंडोरा फ्रॅन्स और स्पेन के मध्य एक छोटा सा मुल्क है जिसकी जनसंख्या 70 हज़ार है मगर हर साल यहाँ 1 करोड़ से अधिक पर्यटक घूमने आते हैं.
आइस लेंड यूरोप का पहला मुल्क है जहां 930 में पार्लियामेंट बनी और विश्व की पहली महिला राष्ट्रपति भी यहीं चुनी गयी जिसका नाम माज़ोगरस फैल बोगात्रो था और वे चार बार राष्ट्रपति रहीं. केरिबॉयी 33 टापुओं को मिला कर बना है. यह 1979 में आज़ाद हुआ. वहां की जनता ने 29 साल के नौजवान को राष्ट्रपति चुना और उसने लगभग 15 साल तक हुकूमत किया. लेक्टान स्टेन ऑस्ट्रेलिया और स्विट्ज़रलैंड पास एक छोटा सा मुल्क है जो 1866 में आज़ाद हुआ. 2000 में यहां के लोगों का जीवन स्तर यूरोप में सभी मुल्कों से अच्छा था और इस मुल्क में कोई भी गरीब नहीं है. मार्शल आइलैंड 1991 में आज़ाद हुआ. उसमें 24 एयरपोर्ट हैं. इसने 1993 में अमरीका पर न्यूक्लियर प्रदूषण फैलाने का इल्जाम लगाया और अमरीका से 183 मिलियन डॉलर का हर्जाना वसूल किया. अमेरिका से हर्जाना वसूल करने वाला यह दुनिया का पहला मुल्क था. माइक्रॉनिशियीया 1991 में आज़ाद हुआ. यहां आज तक लोगों को पेड़ नहीं काटने दिया गया इसलिये वहां बहुत बारिश होती है.
मोनाको दुनिया का दूसरा छोटा मुल्क है. इसे अमीर लोगो का स्वर्ग कहा जाता है. यह मुल्क टूरिस्ट से इतना कमा लेता है जितना जापान गाड़ी बेच कर कमाता है. पिलाव 1994 में आज़ाद हुआ. यहां जज जिंदगी भर के लिये चुने जाते हैं. यह पूरे अमरीका को सब्जी सप्लाइ करता है. पनामा 1903 में आज़ाद हुआ लेकिन 1993 तक गृह युद्ध में फंसा रहा. वहां की संसद ने 1994 में फ़ौज खत्म कर दी. तवालु 1978 में आज़ाद हुआ. इसने भी टूरिस्ट इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया. सन मारीतु 1931 में आज़ाद हुआ. उसने अंगूर, जानवर, डाक टिकट को अपना बिजनेस बनाया. छोटे देश सामउवा ने मछली की पैकिंग और टूरिज्म को कमाई का आधार बनया. सॉलुमून, सेण्ट किट्स, सेण्ट लुसिया, नावृ और सेण्ट विनसेण्ट आंड ग्रेंदान आदि देश बिना फ़ौज के भी तरक्की कर रहे हैं.
अगर आप इन मुल्कों को देखें तो पता चलेगा कि ये क्षेत्र, जनसंख्या और अन्य सुविधा में सभी मुल्कों से पीछे हैं मगर फिर भी वो तरक्की कर रहे हैं. याद रहे कि इन सभी मुल्कों के पास फ़ौज नहीं है फिर भी उन्होंने अपना वजूद क़ायम रखा है. भले ही इनके मुल्क में फ़ौज नहीं है मगर अदालत, स्कूल, हॉस्पिटल है. इन मुल्कों मे शिक्षा, स्वास्थ्य, इंसाफ का बहुत ही अच्छा
प्रबंध है. इससे यह जाहिर होता है कि फ़ौजों के बिना भी मुल्क रह सकते हैं, अगर उस मुल्क में अदालत, स्कूल, हॉस्पिटल है. लेकिन दुनिया का कोई मुल्क भी बगैर इंसाफ, दवा, किताब के तरक्की नहीं कर सकता.
लेखक अफ़ज़ल ख़ान का जन्म समस्तीपुर, बिहार में हुआ. वर्ष 2000 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई कंप्लीट की. इन दिनों दुबई की एक कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत हैं. 2005 से एक उर्दू साहित्यिक पत्रिका 'कसौटी जदीद' का संपादन कर रहे हैं. संपर्क: 00971-55-9909671 और [email protected] के जरिए.
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