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लखनऊ

कागज पर ‘मोज़र बेयर’ के मालिक दीपक पुरी हैं, जो कमलनाथ के बहुत नजदीकी रिश्तेदार हैं

Prabhat Ranjan Deen : कमलनाथ के हित पर उत्तर प्रदेश का हित कुर्बान.. यूपी को 25 साल तक प्रति वर्ष लगेगा चार हजार करोड़ का धक्का.. 'सत्यमेव जयते दिवस' के पहले मन गया 'मोज़र बेयर जयते दिवस'..  उत्तर प्रदेश को चार हजार करोड़ रुपए सालाना का नुकसान पहुंचाने की तैयारी है या केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को उपकृत करने के लिए यह प्रदेश के हित को ताक पर रखने की साजिश है? उत्तर प्रदेश सरकार को चार हजार करोड़ का सालाना झटका 25 साल तक लगता रहेगा। यानी 25 वर्षों में एक लाख करोड़ रुपए के नुकसान की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने आधारशिला रख दी है। पावर कारपोरेशन के आला अधिकारियों ने एक अक्टूबर को बैठक कर आनन-फानन में ऐसा विवादास्पद फैसला किया, जिससे प्रदेश को भीषण क्षति होने वाली है।

Prabhat Ranjan Deen : कमलनाथ के हित पर उत्तर प्रदेश का हित कुर्बान.. यूपी को 25 साल तक प्रति वर्ष लगेगा चार हजार करोड़ का धक्का.. 'सत्यमेव जयते दिवस' के पहले मन गया 'मोज़र बेयर जयते दिवस'..  उत्तर प्रदेश को चार हजार करोड़ रुपए सालाना का नुकसान पहुंचाने की तैयारी है या केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को उपकृत करने के लिए यह प्रदेश के हित को ताक पर रखने की साजिश है? उत्तर प्रदेश सरकार को चार हजार करोड़ का सालाना झटका 25 साल तक लगता रहेगा। यानी 25 वर्षों में एक लाख करोड़ रुपए के नुकसान की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने आधारशिला रख दी है। पावर कारपोरेशन के आला अधिकारियों ने एक अक्टूबर को बैठक कर आनन-फानन में ऐसा विवादास्पद फैसला किया, जिससे प्रदेश को भीषण क्षति होने वाली है।

बिजली खरीदने के लिए सरकार ने उस कम्पनी के साथ करार करने का फैसला किया है जिसने निविदा में बिजली की ऊंची दर कोट की थी। निविदा में शामिल 17 कम्पनियों में 'मोज़र बेयर' छठे नम्बर पर थी। लेकिन केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के कारण प्रदेश सरकार 'मोज़र बेयर' को उपकृत करने पर आमादा थी। लिहाजा, निविदा में शामिल सात कम्पनियों से बिजली खरीदने का फैसला कर लिया गया। छठे नम्बर की कम्पनी को फायदा पहुंचाने के लिए हुए विचित्र फैसले से सातवें नम्बर की कम्पनी की भी लॉटरी खुल गई, लेकिन न्यूनतम दर कोट करने वाली कम्पनियां सरकार के इस फैसले से खुद को फंसा हुआ और ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। अब वे कम्पनियां जमानत की बड़ी राशि डूबने के डर से बाहर भी नहीं जा सकतीं। निविदा में कम दर कोट करने वाली कम्पनियों को चुनने के पारदर्शी नियम की सरकार ने ऐसी-तैसी कर रख दी। यह तो हो नहीं सकता कि ऐसा फैसला लेने वाले अधिकारियों ने इससे होने वाले नुकसान का आकलन नहीं किया होगा, लेकिन सत्ता गलियारे में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री व नगर विकास मंत्री कमलनाथ के 'आभामंडल' की जो चर्चाएं हैं, उसके सामने चार हजार करोड़ के सालाना नुकसान या एक लाख करोड़ की 25 सालाना क्षति को कौन देखता है! 'मोज़र बेयर' कम्पनी 'येन-केन-प्रकारेण' कमलनाथ से जुड़ी हुई है।

अब आप मामले की तफसील में आएं… पिछले साल यानी 2012 में उत्तर प्रदेश सरकार ने छह हजार मेगावाट बिजली खरीदने के लिए निविदा आमंत्रित की थी। इसमें 17 कम्पनियों ने हिस्सा लिया। बिजली की सबसे कम (न्यूनतम) दर कोट करने वाली कम्पनी 'एनएसएल पावर्स' ने 4.48 रुपए प्रति युनिट की दर से 300 मेगावाट बिजली देने की घोषणा की थी। उसके बाद 'टीआरएन इनरजी' ने 4.886 रुपए प्रति युनिट की दर पर 390 मेगावाट बिजली देने की घोषणा की। 'लैंको बाबंध' ने 5.074 प्रति युनिट की दर पर 390 मेगावाट, 'आरकेएम पावरजेन' ने 5.088 प्रति युनिट की दर पर 350 मेगावाट, 'केएसके इनरजी' ने 5.443 रुपए प्रति युनिट की दर पर 1000 मेगावाट, 'मोज़र बेयर' ने 5.730 रुपए प्रति युनिट की दर पर 361 मेगावाट और 'नवयुग पावर' ने 5.843 रुपए प्रति युनिट की दर पर 800 मेगावाट बिजली देने की घोषणा की।

इनमें से तीन न्यूनतम दर कोट करने वाली कम्पनियां क्रमश: 'एनएसएल पावर्स', 'टीआरएन इनरजी' और 'लैंको बाबंध' चुन भी ली गईं और इनके साथ 'पावर परचेज़ एग्रीमेंट' की औपचारिकता भी पूरी कर ली गई। लेकिन जब मामला केंद्रीय मंत्री कमलनाथ का आए तो छठे नम्बर की कम्पनी 'मोज़र बेयर' को ठेका देने का 'सुअवसर' कैसे गंवाया जाए! लिहाजा उसी मुताबिक नौकरशाही ने ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अलमबरदारों के संकेत पर निविदा आकलन समिति (बिड इवैलुएशन कमेटी) ने आनन-फानन पांचवें, छठे और सातवें नम्बर की कम्पनी को भी चयनित कम्पनियों की सूची में डाल लिया।

'मोज़र बेयर' छठे नम्बर पर थी तो पांचवें और सातवें नम्बर वाली कम्पनियों के भी 'भाग' खुल गए। …और 'सत्यमेव जयते दिवस' के एक दिन पहले एक अक्टूबर को बैठक बुला कर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आला अधिकारियों ने 'मोज़र बेयर जय दिवस' मना लिया। सरकार को एटा के जवाहरपुर में 1320 मेगावाट विद्युत उत्पादन परियोजना के आधे-अधूरे पड़े रहने की कोई चिंता नहीं है, लेकिन 'मोज़र बेयर' को फायदा पहुंचाने की चिंता जरूर है। जो कम्पनियां कम रेट कोट कर निविदा हासिल करना चाहती हैं, उस स्वस्थ प्रतियोगिता की हत्या तो की ही गई, विद्युत दरों के असंतुलन के कारण प्रदेश को चार हजार करोड़ रुपए का सालाना नुकसान पहुंचाने का 25 वर्ष तक का रास्ता भी खोल दिया गया।

बहरहाल, चलते-चलते देश के संसदीय कार्य मंत्री एवं नगर विकास मंत्री कमलनाथ के बारे में… समृद्धतम नेताओं में से एक कमलनाथ देश की तकरीबन दो दर्जन बड़ी कम्पनियों के मालिक हैं और अपनी कई कम्पनियों के लिए हासिल किए विवादास्पद ऋण मामले में उनका नाम रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड से फायदा कमाने जा रही संदर्भित कम्पनी 'मोज़र बेयर' का असली मालिक कमलनाथ को ही बताया जाता है। 'मोज़र बेयर' के कमलनाथ के स्वामित्व का संदर्भ नीरा राडिया टेप में भी आ चुका है। हालांकि कागज पर 'मोज़र बेयर' के मालिक दीपक पुरी हैं, जो कमलनाथ के बहुत नजदीकी रिश्तेदार हैं।

यूपी के वरिष्ठ पत्रकार प्रभात रंजन दीन के फेसबुक वॉल से.

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