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आसाराम की ‘रासलीला’ के एपिसोड दिखाकर बैंक बैलेंस बढ़ने की उम्मीद कर रहे खबरिया चैनल

संतगिरी की आड़ में ‘सेक्स’ के भूखे तथाकथित संत आसाराम बापू की जेलयात्रा अगर लंबी होती जा रही है और राम जेठमलानी जैसा तेजदिमाग वकील रखने के बाद भी उसकी जमानत नहीं हो पा रही है, तो इसके लिए बिना किसी शक के मीडिया, खासकर खबरिया चैनलों को सलाम करना चाहिए। टीआरपी की खातिर ही सही, लेकिन अगर ये खबरिया चैलन आसाराम की कारगुजारियां अपने प्राइम टाइम पर नहीं दिखाते, तो बहुत संभव था कि अरबो-खरबों की बेनामी संपत्ति का मालिक बन बैठा आसाराम इस पैसे के दम पर हमेशा की तरह ही सभी बिक सकने वालों को खरीद लेता और खाल के पीछे छिपा भेड़िया कभी भी सामने नहीं आ पाता।

संतगिरी की आड़ में ‘सेक्स’ के भूखे तथाकथित संत आसाराम बापू की जेलयात्रा अगर लंबी होती जा रही है और राम जेठमलानी जैसा तेजदिमाग वकील रखने के बाद भी उसकी जमानत नहीं हो पा रही है, तो इसके लिए बिना किसी शक के मीडिया, खासकर खबरिया चैनलों को सलाम करना चाहिए। टीआरपी की खातिर ही सही, लेकिन अगर ये खबरिया चैलन आसाराम की कारगुजारियां अपने प्राइम टाइम पर नहीं दिखाते, तो बहुत संभव था कि अरबो-खरबों की बेनामी संपत्ति का मालिक बन बैठा आसाराम इस पैसे के दम पर हमेशा की तरह ही सभी बिक सकने वालों को खरीद लेता और खाल के पीछे छिपा भेड़िया कभी भी सामने नहीं आ पाता।

खबरिया चैनलों ने ही आसाराम के पीछे पड़कर भारत की अंधविश्वासी जनता के सामने पर्दाफाश कर दिया कि इस बाबा ने किस तरह संतगिरी में क्रांतिकारी बदलाव लाने के बजाय ‘संभोग की दुनिया’ में क्रांतिकारी बदलाव की आकांक्षा पाली हुई थी, जो बहत्तर साल की उम्र में मासूमों का यौन शोषण इस घटिया मानसिकता के साथ करता है कि इससे वह एक सौ पचास साल की उम्र तक जियेगा।

सो, खबरिया चैनलों ने जो कुछ किया आसाराम की असलियत दुनिया के सामने लाने के लिए, उसके लिए साधुवाद। लेकिन अब जबकि आसाराम के काले-चिट्ठे पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं, तीस दिनों से ज्यादा समय तक जेल की सलाखों के पीछे बिताने के बाद खुद को मसीहा और भगवान के समकक्ष समझने और कानून को अपनी जेब में रखने का दावा करने वाले आसाराम की सारी हेकड़ी धरी की धरी रह गई है, तो अब भी खबरिया चैनलों का उसके पीछे हाथ- मुँह धोकर पड़ जाना संदेह पैदा करता है। कायदे से तो मीडिया का काम होना चाहिए कि किसी खबर को उजागर किया, जनता को जागरूक किया और फिर आगे बढ़ गए। लेकिन, आसाराम के मामलें में तो खबरिया चैनलों की नए-नए राजफाश करने की कोशिश थम ही नहीं रही। इस कवायद में हर कोई एक-दूसरे को पछाड़ देना चाहता है। 

ऐसे में सवाल यह जेहन में आता है कि आसाराम की रासलीलाएं दिखाकर कहीं खबरिया चैनल वाले आने वाले वक्त में अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने का इंतजाम तो नहीं कर रहे ? यह संदेह इसलिए, क्योंकि एक और ढोंगी निर्मल बाबा की कारगुजारियां जब सामने आई थी, तब भी हमें ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। कही हप्तों, महीनों तक निर्मल बाबा की असिलयत इन खबरिया चैनलों पर दिखाई जाती रही। इस दौरान बाबा खबरिया चैनलों को ‘चढ़ावे’ के तौर पर जो विज्ञापन दे दिया करते थे, वे भी बंद हो गए थे। लगा कि, भारतीय मीडिया एकदम से सुधर गया है, अपने कर्तव्यों को लेकर जागरूक हो गया है। लेकिन अब जब  टीवी के सामने बैठे चैनल पलटते हैं, तो सिर पीटने का मन करता है।

वजह, निर्मल बाबा के विज्ञापन फिर से खबरियां चैनलों पर आ गए है। दिन में दो से चार बजे के बीच लगभग सभी बड़े चैनलों पर उनके विज्ञापन देखे जा सकते है। जाहिर है, इन खबरिया चैनलो ने बाबा से एक लंबी-चौडी डील फाइनल कर ली होगी और बाबा ने भी इस बार दिल खोलकर पैसा दिया होगा, इस करार के साथ कि अब भविष्य में हमारी इस तरह से कलई मत खोलियो ! पर्दे के पीछे जो खेल चल रहा है, उसे चलने देना !

इसीलिए, अब जब खबरिया चैनल आसाराम को उसके अंजाम तक पहुंचाने के बाद भी उसके पीछे पड़े हुए है, तो ऐसे में जेहन में आता है कि आने वाले कल में, जब आखिरकार जेठमलानी जी की कोशिशों से आसाराम जेल से बाहर आ जाएगा, तो फिर निर्मल बाबा की तरह ही कहीं वो भी तो पुनर्वतरित नहीं हो जाएगा ? अगर ऐसा होता है, तो फिर तो आप-हम सभी को समझ में आ जाएगा, कि इस बार भी पर्दे के पीछे एक बड़ा खेल हो गया है।

लेखक पुष्पेंद्र आल्बे पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं तथा आजकल मुम्बई से फिल्म डाइरेक्शन का कोर्स कर रहे हैं. ये खबर इंडिया नामक वेबसाइट भी संचालित करते हैं. इनसे संपर्क 09826910022 के जरिये किया जा सकता है.

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