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मध्य प्रदेश

लो, भाजपा भी अखबारों में गांधी जी के विज्ञापन छपवाने लगी!

देशभर में इन दिनों चुनावी माहौल है। लोकसभा चुनाव तो खैर अभी दूर है, लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए रण का मैदान सज चुका है। सो, इस चुनावी माहौल में हर मामलें का राजनीतिक लाभ उठाने की नेताओं और पार्टियों की कुदरती खूब फिर से दिखने लगी है। जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले है, उनमें मप्र भी शामिल है, सो दो बार विकास के घोड़े पर सवार होकर सत्ता तक पहुंच चुके प्रदेष के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान सत्ता की हैट्रिक लगाने की कोशिश में गांधीजी को भी याद करने से परहेज नहीं कर रहे हैं।

देशभर में इन दिनों चुनावी माहौल है। लोकसभा चुनाव तो खैर अभी दूर है, लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए रण का मैदान सज चुका है। सो, इस चुनावी माहौल में हर मामलें का राजनीतिक लाभ उठाने की नेताओं और पार्टियों की कुदरती खूब फिर से दिखने लगी है। जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले है, उनमें मप्र भी शामिल है, सो दो बार विकास के घोड़े पर सवार होकर सत्ता तक पहुंच चुके प्रदेष के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान सत्ता की हैट्रिक लगाने की कोशिश में गांधीजी को भी याद करने से परहेज नहीं कर रहे हैं।

इसी के तहत दो अक्टूबर को गांधी जी को याद करने के बहाने प्रदेश की भाजपा सरकार ने लगभग सभी बड़े अखबारों में एक या फिर आधे पन्ने का भरा-पूरा विज्ञापन दिया, जो पूरी तरह से चुनावी ही लग रहा था। गांधी जी को याद करने से ज्यादा यह विज्ञापन यह दिखा रहा था, कि भई ! चुनावी बेला आ गई है, तो अब विकास न सही, देश के राष्टपिता को याद करके ही हमें वोट दे देना ! अब जरा इस विज्ञापन का मजमून भी पढ़ लीजिए- कांग्रेस मुक्त भारत ही बापू को सच्ची श्रद्धांजलि….

विज्ञापन के मजमून से ही पता चल जाता है कि भाजपा गांधीजी के कट्टर समर्थकों को भी अपनी तरफ करने का पांसा फेंक रही है। गांधी के समर्थक, यानी कांग्रेस के समर्थक। सो, ऐसे कट्टर गांधीवादी और कट्टर कांग्रेसियों को पटाने के लिए ही मप्र भाजपा ने इस विज्ञापन के जरिए समझाने, या कहें कि बरगलाने के लिए सौ-दो सौ शब्दों की भाषणबाजी के साथ बताया है कि आप जिस गांधीजी से प्रभावित होकर कांग्रेस को वोट देने का वंशवादी फैसला किए बैठे हो, असल में वे गांधीजी ही कांग्रेस के सख्त खिलाफ थे। इतना खिलाफ, कि अपनी मौत से ठीक एक दिन पहले ही उन्होंने कांग्रेस को भंग करने का निर्णय ले लिया था।

शिवराज सरकार ने इस विज्ञापन में यह भी बताया है कि यह गांधी जी की आखिरी इच्छा थी, उनकी आखिरी वसीयत ! तो, अब गांधीजी की इस आखिरी इच्छा को मप्र की जनता के बीच लाने के लिए भाजपा ने कमर कस ली है। लाखों-करोडो रूपए तो दो अक्टूबर को ही विज्ञापनबाजी में खर्च कर डाले। अब भाजपा को उम्मीद ये है कि इस शोषेबाजी का कुछ चुनावी फायदा भी मिल जाए, तो फिर तो गांधी जी को याद करने का कोई मतलब भी निकले। वैसे, शिवराज ही नहीं, उनकी पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री के प्रत्याशी के तौर पर घोषित नरेन्द्र मोदी ने भी 25 सितंबर को भोपाल में ‘पार्टी के महामिलन’ के दौरान गांधी जी को खूब याद किया था। अब देखना है कि भाजपा की इस चुनावी कवायद का कुछ फायदा भी होता है या नहीं !

पुष्पेंद्र आल्बे

09826910022

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