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सतीश के. सिंह की पाजिटिव मीडिया से विदाई, इंद्रजीत राय व आमोद राय भी हटे, संजीव श्रीवास्तव के आने की चर्चा

महीने दो महीने से ज्यादा नहीं हुए होंगे जब सतीश के. सिंह ने लाइव इंडिया के एडिटर इन चीफ पद से इस्तीफा देकर नवीन जिंदल और मतंग सिंह वाले पाजिटिव मीडिया ग्रुप के साथ जुड़े थे. अपने साथ कई लोगों को भी उन्होंने सीनियर पदों पर जोड़ा था. पर सूचना आ रही है कि सतीश के. सिंह कार्यमुक्त हो गए हैं. उन्होंने इतना जल्दी खुद तो इस्तीफा दिया नहीं होगा.

महीने दो महीने से ज्यादा नहीं हुए होंगे जब सतीश के. सिंह ने लाइव इंडिया के एडिटर इन चीफ पद से इस्तीफा देकर नवीन जिंदल और मतंग सिंह वाले पाजिटिव मीडिया ग्रुप के साथ जुड़े थे. अपने साथ कई लोगों को भी उन्होंने सीनियर पदों पर जोड़ा था. पर सूचना आ रही है कि सतीश के. सिंह कार्यमुक्त हो गए हैं. उन्होंने इतना जल्दी खुद तो इस्तीफा दिया नहीं होगा.

माना जा रहा है कि प्रबंधन ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा है. कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही है. एक तो ये बताया जा रहा है कि नवीन जिंदल ने सतीश के. सिंह पर जी ग्रुप के खिलाफ काम करने का लगातार दबाव बनाया. जिदंल ने एसआईटी टीम पर लगातार जी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा का स्टिंग करने और जी के वकीलों के खिलाफ स्टोरी करने का जबरदस्त दबाव बनाया था.

खबर ये भी है कि एसआईटी हेड इंद्रजीत राय और हमार टीवी के इनपुट एडीटर आमोद राय ने भी इस्तीफा दे दिया है. चर्चा है कि सतीश के. सिंह द्वारा जी के खिलाफ एजेंडा के तहत खबर बनाने या चलाने से मना करने के बाद बेहद नाराज नवीन जिदंल ने हमार ग्रुप के ग्रुप एडीटर पद पर संजीव श्रीवास्तव को लाने का मन बनाया है. संजीव श्रीवास्तव सहारा समय के सीईओ रह चुके हैं. उसके पहले बीबीसी के भारत संपादक हुआ करते थे. इन दिनों दूरदर्शन में प्राइम टाइम के संपादक हैं. आरोप है कि जिदंल मीडिया में सिर्फ और सिर्फ जी ग्रुप से बदला लेने के लिए आए हैं, उनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है.

उधर, कुछ दूसरे लोगों का कहना है कि पॉजीटिव टीवी ग्रुप के न्यूज़ डॉयरेक्टर सतीश के. सिंह को संस्थान से एक ही महीने में नौकरी से निकाल दिया गया. उनके साथ पॉजीटिव टीवी ग्रुप में आए इंद्रजीत राय और आमोद राय को भी नौकरी से निकाल दिया गया है. सतीश के सिॆंह पर आरोप है कि वे संस्थान की बातें यहां से वहां कर रहे थे. यह भी बताया जाता है कि वो ज्यादा ज़ी न्यूज़ से भी संपर्क में थे. कुछ का कहना है कि सतीश के. सिंह पर गलत सैलरी बताकर अपने साथियों को संस्थान में लाने के आरोप भी लगे हैं.  

मतलब यह कि जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं. सच्चाई क्या है, यह तो नवीन जिंदल और सतीश के. सिंह बता सकते हैं. माना जा रहा है कि पाजिटिव मीडिया ग्रुप में अभी काफी उठापटक होगा.

भड़ास तक सूचनाएं [email protected] के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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