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गालिब का व्यक्तित्व ‘भारत रत्न’ से बड़ा : यश मालवीय

: ग़ालिब को भारत रत्न दिए जाने के विषय पर बैठक : इलाहाबाद। साहित्यिक पत्रिका ‘गुफ्तगू’ के तत्वावधान में हरवारा, धूमनगंज में बैठक आयोजित की गई, जिसमें मशहूर शायर मिर्ज़ा गालिब को ‘भारत रत्न’ पुरस्कार दिए जाने की मांग पर चर्चा की गई। एहराम इस्लाम ने कहा कि पूरी दुनिया मिर्जा गालिब की शायरी की कायल है, उर्दू अदब के नाक हैं गालिब, इसलिए यदि उनको भारत रत्न एवार्ड दिया जाता है तो यह हम सभी के लिए हर्ष का विषय होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुझे लगता है कि यदि भारत सरकार ऐसा निर्णय लेती है तो इसका कोई विरोध भी नहीं करेगा।

: ग़ालिब को भारत रत्न दिए जाने के विषय पर बैठक : इलाहाबाद। साहित्यिक पत्रिका ‘गुफ्तगू’ के तत्वावधान में हरवारा, धूमनगंज में बैठक आयोजित की गई, जिसमें मशहूर शायर मिर्ज़ा गालिब को ‘भारत रत्न’ पुरस्कार दिए जाने की मांग पर चर्चा की गई। एहराम इस्लाम ने कहा कि पूरी दुनिया मिर्जा गालिब की शायरी की कायल है, उर्दू अदब के नाक हैं गालिब, इसलिए यदि उनको भारत रत्न एवार्ड दिया जाता है तो यह हम सभी के लिए हर्ष का विषय होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुझे लगता है कि यदि भारत सरकार ऐसा निर्णय लेती है तो इसका कोई विरोध भी नहीं करेगा।

गीतकार यश मालवीय की राय उनसे भिन्न रही। उन्होंने कहा कि गालिब का व्यक्तित्व भारत रत्न से बहुत बड़ा है, सौ भारत रत्न मिलकर भी गालिब की बराबरी नहीं कर सकते। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस तरह की मांग उठाने का कोई औचित्य नहीं है, अगर ऐसी मांग होगी तो फिर तुलसी, मीर, सूर आदि कवियों को भारत रत्न क्यों नहीं दिया जा सकता? दरअसल, इन सब रचनाकारों का व्यक्तित्व ‘भारत रत्न’ से बहुत बड़ा है।

गुफ्तगू पत्रिका के संरक्षक इम्तियाज अहमद गाजी का कहना था कि गालिब, सूर, निराला, मीर आदि कवियों का व्यक्तित्व और कृतित्व बहुत बड़ा है, इसलिए इनको भारत रत्न दिए जाने के बजाए वर्तमान समय के जो बड़े रचनाकार हैं, जिनकी रचनाओं में देशभक्ति के पुट हैं, उनको यह एवार्ड दिए जाने की मांग उठानी चाहिए। यह बड़े दुख की बात है कि भारत रत्न के लिए जिन लोगों के नामों पर चर्चा की जा रही है, उनमें साहित्यकारों को शामिल नहीं किया गया है। साहित्यकार जयकृष्ण राय तुषार ने कहा कि गालिब जैसे रचनाकार तब के हैं, जब भारत रत्न पुरस्कर की शुरुआत भी नहीं हुई थी, उनको यह एवार्ड दिए जाने की मांग करना ठीक नहीं हैं, उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इससे बेहतर तो यह होता कि निदा फाजली जैसे शायरों को गालिब एवार्ड दिए जाने की बात की जाती, क्योंकि निदा फाजली के पिता पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन वे भारत में ही रहे, उनके व्यक्तित्व में भारतीयता झलकती है।

मुशायरों के मशहूर संचालक नजीब इलाहाबादी ने कहा कि गालिब जैसे बड़े शायर को यह एवार्ड जरूर दिया जाना चाहिए, क्योंकि इन्होंने अपनी शायरी का परचम पूरे विश्व में लहराया है। आसरा फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी का कहना था कि जिस तरह भारत रत्न पुरस्कार देने के लिए खिलाड़ियों के नाम पर चर्चा की जा रही है, उसी तरह निश्चित रूप से साहित्यकारों के नाम पर भी विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। बैठक में इनके अलावा स्वालेह नदीम, अख्तर अजीज, संतोष तिवारी, शिवपूजन सिंह, वाकिफ अंसारी, सुनील दानिश, रमेश नाचीज, संजय सागर, डा0 शैलेष गुप्त ‘वीर’ आदि ने विचार रखे।

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