अभी तक एक जीनियस लड़का था. अब दूसरा भी आ गया. हिंदी न्यूज चैनलों के लिए आसाराम और जीनियस लड़के, ये दो टीआरपी के सबसे बड़े माध्यम बने हुए हैं. आसाराम का मीडिया ट्रायल जारी है तो जीनियस लड़कों का भविष्य चौपट करने की कवायद. मीडिया के एक मित्र बता रहे थे कि जीनियस कौटिल्य को कुल 900 सवालों के जवाब याद हैं जो उसके दादा ने उसे लिखाए-रटाए हैं. उन सवालों से बाहर का सवाल पूछने पर कौटिल्य जवाब नहीं दे सकेगा. इन्हीं नौ सौ सवालों के बीच के सवाल पूछकर न्यूज चैनल वाले कौटिल्य को महा जीनियस बताने बनाने में जुटे हुए हैं.
लोग कहने लगे हैं कि ये बच्चे कल को वाकई जीनियस बन सकते थे पर न्यूज चैनलों ने इन्हें ओवर एक्सपोजर देकर इन्हें खली टाइप का बनाने का ठान लिया है. खली को जो मीडिया हाइप मिली, उसके बाद उनका परफारमेंस तेल लेने चला गया. खली अब कहां हैं, कोई नहीं जानता. लेकिन वो दौर याद करिए जब खली को मीडिया ने महाबली खली बनाना बताना शुरू किया. हर दूसरे न्यूज चैनल पर खली प्रकट होने लगे और उनका इंटरव्यू अमेरिका तक जाकर न्यूज चैनल वाले करने लगे. टीवी वालों ने खली से टीआरपी खूब निचोड़ लिया और उन्हें छोड़ दिया उनके हाल पर. खली महाबली किधर हैं, अब किसी को नहीं अंदाजा और न ही किसी को उनका इंटरव्यू लेने की सुध है. यही हाल जीनियस बच्चों का हो रहा है.
कुछ दिनों बाद इन जीनियस बच्चों को कोई पूछने वाला नहीं रहेगा और वो बच्चे भी मीडिया व ग्लैमर की चमक-दमक से पढ़ाई लिखाई भूल कर हवामहल की दुनिया में सैर करते मिलेंगे और बाद में पता चलेगा कि इन्हें नया कुछ तो आ नहीं रहा, जो जानते भी थे वो भूल चुके हैं.. धन्य है अपने न्यूज चैनल. अभी अच्छे खासे न्यूज चैनल वाले न्यूज पर लौटे थे लेकिन फिर से ये एक बार पटरी से उतर गए हैं. नान-न्यूज का तमाशा जारी हो गया है. एक दूसरे की देखादेखी अब सभी जीनियस बच्चों को दिखा रहे हैं. आसाराम पर प्रवचन कर करा रहे हैं. ये दोनों निपटेंगे, तब तक कोई तीसरा नान-न्यूज आइटम सामने आ जाएगा.
हम सभी को इस ट्रेंड की निंदा करनी चाहिए और न्यूज चैनलों को खबरों पर चलते रहने के लिए दबाव बनाना चाहिए. अब भी कुछ न्यूज चैनल हैं जो खबरों की ट्रैक पर हैं लेकिन टीआरपी की रेस लंबी खिंची तो उन्हें भी न्यूज छोड़कर ऐसे ही नान-न्यूज पर आना पड़ेगा. इंडिया टीवी ने भी जीनियस बच्चों और आसाराम को पकड़ लिया है. न्यूज24 भी आसाराम पर प्रवचन करा रहा है. इंडिया न्यूज तो इस मामले में लंबे समय से आगे है और नान-न्यूज पर खेल रहा है. यह सब दुर्भाग्यपूर्ण है.
भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.
उपरोक्त पोस्ट पर आए कुछ कमेंट यूं हैं…
शशांक शेखर एक इंडिया न्यूज़ वाले भाई साहब अपनी ही पीठ ठोक रहे हैं कि हम न होते तो आसाराम जेल न जाता ….
Meetu Mee Galti news channels ki nhi hai…audience ki hai…t.r.p kiski badaulat badhti hai…Hamari… Hamara hi taste khraab hai…logo ko b yei sb dekhna hai…hum q dekhtey hai aisi nonsense non news…q dete hai inko t.r.p…. Q badha rahe hai nonsense news ka competition…sir g news channels bhi bhut khush nhi hai aisi wahyaad khrabrei chala chala k…wo log b hum par haste hai…ki janta ko b yei sasta asaan stupid masala chahiye….hum taste btate hai…wo tadka maarte hai.. Aur usse apna hi pet pet bhar k chaltey bntey hai…agla tadka phir tayaar….unko nhi khud ko rokna hoga..unko t.r.p dene se….
Sandeep Verma शुक्र है जीनियस बच्चो के बारे में कुछ तो लिखा गया ,शुक्रिया .
Harish Singh varanasi ke yatharth ko bhool gaye ap
Ashutosh Jha बहुत सुंदर…
Vandana Mishra i agree wid u.
Devendra Surjan Iska arth yah hua ki koutilya kutilta se genius bana hai aur iska ant bhi vaisa hii hogaa jaise Sanjay Datt kaa film Lage Raho Munnabhai men hua tha. Usmen Sanjay ne Gandhi jii ke baare men library men jitna padha tha usase usko yah ilm hone laga ki Gandhi jii kii aatma usme bas gai hai aur tamaam achchhe kaam usase karwa rahi hai lekin press conference men usse Gandhi Sahity se hatkar sawaal poochhe gaye to vah niruttar rah gaya aur is tarah se expose ho gaya. Koutilya kii bhi yahi gati ho sakti hai.
Braj Bhushan Dubey विल्कुल सही कह रहे हैं आप।
Narendra Mishra Vaakai Sahi baat h.
Ajit Singh बिलकुल सटीक
Rakesh Soni correct ho bhai.
Shyamnandan Sharma log media ko jhel rahe hain,sabhi ka ek hi hal hai ,log in betuki baton ko bakvas manane lage hain
Raman Devasar this is professional media yashwant jee
Jitu Patil Sir, I m agree with you,….. YATHA RAJA TATHA PRAJA….. jis tarah humati sarkar Ghotalo par se janta ka dhyan hatane ke liye vikas ka mudda ya koi badi subsidi deti hai thik usi tarah media kaam kar raha hai.
Anil Kumar Singh Yes, Yashwantj kuchh bacchon ne kam umar me padhai puri kar li. Achhi naukari bhi kar rahen hai, per ab unki acharcha nahi hoti. i
Sanjay Soni U r right
Aamir Pasha daudne wala budhiya bhi kaha gya pta nhi.
Bunty Jorwal Sahi kaha bhai
Ram Dayal Rajpurohit बहुत ही अच्छी बात कही, पर आप को आज समझ मे आया ये टी आर पी के लिये कुछ भी कर सकते है किसी के भी भविष्य से खेल सकते है
Sanjay Gupta मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है लेकिन टीआरपी के चक्कर में अपने कर्तव्य को भूल रहे हैं
O.p. Pandey Apna kaam banta… bhad me jaaye… Ajanta hi nahi naitikta bhi. ?
Adarsh Tripathi बहुत ही अच्छी बात कही,
Jitendra Dixit खबरिया चैनल वाले कौटिल्य का मानसिक शोषण कर रहे हैं। यह मामला बाल उत्पीडऩ का है। इसके लिए चैनलों के साथ ही उसके अभिभावक भी जिम्मेदार हैं।
Pankaj Kumar बेचारे का बचपन छिन गया ……
Palash Biswas Dear Yashwant, Usining this piece in my latest write up as anotable quote.
Neh Indwar विज्ञापन देने वाले टीआरपी को देखकर देते हैं। खबरिया चैनलों में धमाचौकडी का चलन अभी रहेगा, अभी इनके खेलने की उम्र ही तो है। बीबीसी, सीएनएन जैसे बनने के लिए उम्रदराज बनना पडता है।
Chandan Srivastava Yashwant भईया ये जो दूसरा बच्चा आया है मृगेन्द्र राज, इस पर स्टोरी लगभग 4 साल पहले कर चुका हूं. "आज का अभिमन्यू" नाम के स्लग से. क्योंकि तब इसके माता-पिता का दावा था कि बचपन मे जब बच्चा कोख मे था तभी उसके पिता उसे ब्यूरोक्रेट बनाने का सपना पाल चुके थे और उसके कोख मे रहते ही उसे जनरल स्टडीज का ज्ञान दिया करते थे.
एक बार इस बच्चे को किसी स्टेज पर भी ले जाया गया था, तब इसकी उम्र महज ढाई-तीन साल थी. बच्चे की तबियत खराब हो गई थी. आज भी बच्चे के साथ जो सर्कस हो रहा है उसके जिम्मेदार बच्चे के माता-पिता ज्यादा हैं. पहले तो एक अबोध मन पर इस तरह के स्टडीज का दबाव और फिर ये ड्रामा. मृगेन्द्र की भी अपनी सीमाएं हैं. उसके पिता ने जितना उसे रटाया है उतना ही जवाब बच्चा दे सकता है. बच्चे के पिता जी ने दिल्ली से फ्राईडे को ही मुझे फोन भी किया था, पहले बच्चे कौटिल्य को देखते हुए मेरा एक बार मन हुआ कि मैं उन्हें राय दूं कि क्यों बच्चे को सर्कस की रिंग मे उतार रहे हो जिसके रिंग मास्टर दीपक चौरसिया हैं लेकिन फिर सोचा उन्हें लगेगा कि मै इर्ष्यावश कह रहा हूं. इसलिए बधाई देकर ही शांत हो गया. ये भी पता चला कि इंडिआ न्यूज ने उसे "विशेष सुरक्षा सेल" मे रखा हुआ है. यानि जिस होटल पर वो रुका है उसका पता किसी को भी बताने पर मनाही है. किसी इंडिआ न्यूजकर्मी को भी नहीं. जो ड्राईवर उन्हें स्टूडिओ के लिए ले जाने आता है उसे उनका रूम नम्बर भी बताने पर रोक है. और तो और फैज़ाबाद मे इस बच्चे को अपने अपने स्टूडिओ ले जाने को वो मार मची कि बच्चे के अभिभावक दिल्ली की ट्रेन के समय से तीन घंटा पहले ही स्टेशन पर भाग गए. खैर अगर बच्चा इंडिआ न्यूज पर ना होता तो किसी और पर होता, प्रयास सभी ने किया था बाजी इंडिआ न्यूज ने मारी. हां प्रोग्राम देखने से एक बात और लगती है कि दीपक चौरसिया बच्चों के साथ बिल्कुल भी सहज नहीं हैं. खुद पर लिखी कविता सुनवाने को इशारे इशारे मे कहते हैं.
Kumar Mohrampuri मीडिया अब पूंजीवादियों के हाथ में है, उनका उद्देश्य सिर्फ धन कमाना है। टीआरपी धन कमाने का फार्मूला है।
Deepak Agarwal Satya vachan
Shilendra Rathore व्यवसायीकरण और पूंजीपतियो के हाथो का खिलौना बन चूका है लोकतंत्र का कहा जाने वाला चौथा स्तम्भ ! दुःख इस बात का भी है कि इन चैनलों और अखबारों में काम करने वाले पत्रकार भी इंसानियत और जमीर को पूरी तरह बेंच कर दलाली का काम कर रहे है ! सड़को पर इंसानियत दम तोड़ती नज़र आती है तब पत्रकार उसका बिक्रीनामा करते है !
Bharat Shah नकली kBC का चलन शुरू हो चुका है
Nil Nishu Yashwant भाई, दीपक चौरसिया को इन दिनों क्या हो गया है…..?
Kamal Sharma फिर खली खाली हो गया जी। आसाराम की सारी आशा धूमिल हो जाएगी। मीडिया के लपेटे में आ गए तो कहीं के नहीं रहते।
Ashish Verma सब टीआरपी का खेल है आगे बढ्ने की होड मे हम कहा जा रहे है ये तक भूल जाते ह ये लोग……………. एक बात को पकड़ कर पूरा दिन उसी मे निकाल देते है
Sanjay Kumar bilkul theek kha rahe hai aap
Indubala Shankar india t.v.wala to sabka bap nikla bhaia……kautilya v / s computer hi chala diya.
Kumar Arvind टीआरपी के खेल में ज्यादातर फेल।
Pankaj Mishra sahamat
Mukesh Kumar I agree with u…
Jaikumar Jha मीडिया कौन मीडिया कैसी मीडिया …आशाराम जैसों के टुकरों पे पलने वाली मीडिया …..ये मीडिया ही आशाराम जैसों को पैदा करती है
Mahesh Sharma Bilkul sahi
Govind Goyal ye ladka to gaya samajho
Mrigank Mohan Bahut Jald hi aapko is "Genius" ki race mein kuch aur Bachche dikhenge.
Praveen Raj Singh गिरावट का दौर है, फ़र्ज़ी नायक – नायिका गढ़े जा रहे हैं। ख़ास नंबर पर मिस काल करके क्रांति का हिस्सा बन जाओ। किसी भी वजह से चार दिन जेल में रह आओ तो स्वतंत्रता सेनानी की तरह किताब लिख मारो। तमाशे का दौर है, बस सबका तरीक़ा अलग- अलग है।
Virendra Tiwari Sahi farmaya aapne
Sunil Singh agreed….





