'..मुझे बेंगलुरु में काम करते हुए 12 साल हो गए हैं, लेकिन मैं कुछ पैसे कमाने और संपत्ति बनाने में नाकाम रहा हूं. आर्थिक तंगी के चलते मैं अपने बूढ़े मां-बाप की देखभाल भी नहीं कर पाया, यह मुझे बड़ा दुख देता है. बेंगलुरु में रहना बड़ा मुश्किल है और इसलिए मैं इस शहर से नफरत करता हूं. बेंगलुरु में सच्चाई और मानवीय मूल्यों का कोई मोल नहीं है. मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नाकामी से भी दुखी हूं. पाकिस्तानी सैनिक हमारी सीमा में घुस रहे हैं. हमारे सैनिकों को मार रहे हैं, उनका गला तक काट रहे हैं. इसके बावजूद सरकार कुछ नहीं कर रही है. अगर पुनर्जन्म जैसी कुछ चीज है तो मैं एक भारतीय सैनिक के रूप में जन्म लूंगा और देश की सेवा करूंगा..'
उपरोक्त अंश एक सेल्समैन के सुसाइड नोट से लिया गया है. बेंगलुरु के इस सेल्समैन, जो जूता कंपनी में है, ने आर्थिक तंगी के चलते जान दे दी. अपने सुइसाइड नोट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी नाम डाल दिया है. उसका खुदकुशी पत्र इशारा करता है कि वह पीएम मनमोहन सिंह की प्रशासनिक नाकामी, सरकार जनित करप्शन व महंगाई से दुखी होकर आत्महत्या करने को मजबूर हुआ. यह सेल्समैन चिकमंगलूर के दसराहल्ली का रहने वाला है. उम्र 32 साल. नाम संतोष कुमार अप्पास्वामी गौड़ा. इसका शव गुरुवार को उसके कमरे में पंखे से लटका मिला.
पड़ोसियों ने घर के आधे खुले दरवाजे से संतोष को पंखे से लटका देखा, तो इसकी सूचना पुलिस को दी. पुलिस के मुताबिक संतोष 12 साल पहले बेंगलुरु आया था. उसने कई कंपनियों में सेल्समैन की नौकरी की. वह पिछले चार साल से एक जूते की कंपनी में सेल्समैन की नौकरी कर रहा था. संतोष के दोस्तों के मुताबिक आर्थिक तंगी और करियर में कामयाबी न मिलने से वह बड़ा दुखी था.
पुलिस ने संतोष के कमरे से तीन पेज का एक सूइसाइड नोट बरामद किया है. यह नोट कन्नड़ में लिखा गया है. पहले दो पेज में उसने अपनी आर्थिक तंगी और बूढ़े मां-बाप की देखभाल न करने पाने का जिक्र किया है, जबकि आखिरी पेज पर उसने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम लेते हुए देश के राजनीतिक हालात पर लिखा है.





