Ila Joshi : हम औरतों की निजता के हिमायती हैं, उनको दस तालों, सात पर्दों में रखते हैं, कोशिश करते हैं कि उनके शारीरिक सौष्ठव को ज़्यादा से ज़्यादा छुपाया जा सके.. आदमी उन्हें घूरें नहीं, छेड़ें नहीं, फब्तियां न कसें… लेकिन एक ऐसा उद्योग है जो लगातार न सिर्फ ऊपर लिखी बातों के ख़िलाफ़ काम कर रहा है, बल्कि औरतों और लड़कियों के बीच हीनता बढ़ाने का काम भी करता है…
ब्यूटी पार्लर और बॉडी स्पा उद्योग एक सोची समझी समझी अवधारणा है, जो पैसों के बल पर न सिर्फ "ख़ूबसूरती" बढ़ाने का "तथाकथित" दावा करती है बल्कि औरतों और लड़कियों पर वो सब करने का दबाव डालती है जिसको आपको बचपन से न करने की हिदायतें दी जाती रही होंगी…
"फुल बॉडी ब्लीच", "फुल बॉडी वैक्स", "बॉडी पोलिशिंग", "बिकिनी वैक्स", और ऐसी ही और भी बहुत सारी "ख़ूबसूरती बढ़ाने" की, पति/पार्टनर को अपनी ओर आकर्षित करने वाली प्रक्रियाओं के दौरान आपकी शारीरिक निजता का लगातार हनन होता है, मगर चूँकि आप तो ख़ुद "ख़ूबसूरती" की अंधी दौड़ में शामिल हैं तो आपको इस बात का कभी अहसास तक नहीं होगा…आप एक औरत हैं इसका ये मतलब नहीं होता कि पुरुषों को औरतों संग जिस निजता की मनाही हो तो किसी और औरत को आपसे वो आचरण करने की छूट हो… बराबरी के सही मायने खोजने अभी बाकी हैं दोस्त…
थिएटर और सोशल एक्टिविस्ट इला जोशी के फेसबुक वॉल से





