पूर्वी सिंहभूम (झारखंड) के जादूगोड़ा से चिटफंड कंपनी द्वारा अरबों रुपये लेकर भाग जाने के बाद जादूगोड़ा के लोगों के समक्ष खाने के लाले पड़ गए हैं. लोग परिवार समेत आत्महत्या करने की बातें कर रहे हैं. जिनके बच्चे बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे थे उनमें से अधिकतर बच्चे पैसों के अभाव में वापस आ चुके हैं. बेटियों की शादी की चिंता में अभिभावकों की रातों की नींद उड़ गयी है.
यहाँ यह बताना जरूरी है कि जादूगोड़ा के 90% लोगों ने जिनमें बड़ी संख्या में यूसिल माइंस में काम करने वाले लोगों की है, बैंक से एवं कंपनी से सभी प्रकार का लोन लेकर इस चिटफंड कंपनी में इन्वेस्ट कर दिया था. यह चिटफंड कंपनी एक लाख के बदले मासिक पांच हज़ार ब्याज देती थी. ऊँचे ब्याज दर की लोभ में लोगों ने ज्यादा से ज्यादा पैसा इन्वेस्ट किया जिसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि २४ सितम्बर से फरार इस चिटफंड कंपनी के संचालक कमल सिंह, दीपक सिंह एवं इनके सैकड़ों एजेंटों में से किसी को भी प्रशासन द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा सका है. प्रशासन के लोग केवल वारंट एवं इश्तेहार चिपकाकर अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुडा रहे हैं. इन संचालको के ऊपर अभी तक जादूगोड़ा थाने में कुल १२३ लोगों ने करोड़ों के गबन का मामला दर्ज कराया है एवं रोजाना ५ से १० नए लोगों द्वारा थाना आकर ठगी किये जाने का मामला दर्ज कराया जा रहा है.
जादूगोड़ा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
मूल खबर…
चिटफंड कंपनी से पैसे लेकर चुप रहे पर 1500 करोड़ लेकर संचालक भाग गए तो अखबार वाले भी छापने लगे





