प्रदेश में आखिरी चुनाव 2009 में पार्लियामेंट के लिए हुआ। कांग्रेस बिजनौर, मेरठ, बुलन्दशहर व सहारनपुर में चौथे स्थान पर रही। गाजियाबाद में यह राजनाथ सिंह से सीधे मुकाबले में दूसरे नम्बर पर रही। यहाँ राजनाथ सिंह को हराने के लिए सपा ने कांग्रेस को समर्थन कर दिया था। लोक सभा चुनावों में भी सोनिया गाँधी व राहुल गाँधी स्टार प्रचारकों में थे, परन्तु कोई प्रभाव मतदाता पर नहीं छोड़ पाये। मुस्लिम मतदाताओं की धारणा है कि भाजपा को तीसरे नम्बर पर स्थापित करने का कार्य सपा ने ही किया हैं।
कांग्रेस को चार नम्बर से उठा कर संघर्ष में लाने का काम तो कोई चमत्कार ही कर सकता है। वैसे भी 2009 से अब तक केन्द्र सरकार ने कोई ऐसा कार्य नहीं किया कि वोटर भरोसा कर सके। अधिक समय घोटाले करने व उससे बचने में ही रहा। सहारनपुर से प्रभावशाली मुस्लिम नेता रसीद मसूद इस बार कांग्रेस के साथ हैं। सहारनपुर में समर्थकों से अधिक विरोध की राजनीति प्रभावी है। सहारनपुर में सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व कद्दावर रहे नेता स्व0 राम शरणदास, पुराने कांग्रेसी चौ0 यशपाल सिंह व रसीद मसूद त्रिकोण के तीन कोनों पर विरोध की मुद्रा में बैठ रहे। अब रसीद मसूद के राजनीति में दखल करते उनके कुनबे के कारण कभी खास चेले रहे जगदीश राणा व संजय गर्ग भी विरोधी पाले में आ खडे़ हुए हैं।
रसीद मसूद पिछली बार सपा में थे तो उनके विरोधियों ने बसपा को ताकत पहुँचाई थी। उनके प्रभाव का लाभ कांग्रेस को मिले भी तो भी विरोधियों के कारण सपा लाभ में रहेगी। यहाँ बसपा सर्वाधिक हानि में रहेगी। भाजपा ने तीसरे पायदान से उठने की कोशिश
नहीं की, अलबत्ता तीसरा स्थान भाजपा के लिए सुरक्षित रहेगा। ऐसे में कांग्रेस अपने को चौथे पायदान पर रखने में कामयाब रहेगी। देखना है कि बसपा के पांच वर्ष के शासन की त्रासदी का लाभ सपा को कितना मिलता हैं?
लेखक गोपाल अग्रवाल समाजवादी आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। इन दिनों समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति के हिस्से हैं।





