24 सितम्बर 2013 को मैं ठाणे में एक नए चैनल के साक्षात्कार के लिए गया था, जिसका नाम था 'गर्जा महाराष्ट्र' मराठी न्यूज़ चैनल. ये चैनल सिर्फ इन्टरनेट पर एक पोर्टल जैसा शुरू हुआ है… वहां पहुंचने के बाद मुझे पूना, अमरावती, नागपूर यवतमाल आणि चंद्रपूर के कुछ युवा पत्रकार मिले. हम सब वहां अपनी बारी का इन्तजार कर रहे थे. हम सब एक दूसरे के अनुभवों से परिचित हो रहे थे. उसके बाद चैनल के एंकर स्नेहल ने हमें साक्षात्कार के लिए केबिन में बुलाया. मैं अपने पूरे जोश के साथ अंदर चला गया. एंकर ने मूझसे पूछा कि कुछ लाये हो साथ में? मैंने कहा- हां, मैं अपना सीवी लाया हूं. वो फटाक से कहा- सीवी नहीं कैश, डीडी, या चेक ये लाये हो क्या?
मैं एकदम से चौंक गया कि चैनल में न्यूज़ के बारे में ही पूछा जाता है, जैसे आपको लिखना आता है या नहीं? पीटीसी आती है या नहीं, फ़ोनो आता है या नहीं? लेकिन इन सबके बारे में मुझसे कुछ पूछा ही नहीं, सिर्फ पैसे के बारे में ही पूछते रहे और कहने लगे कि अगर आप चंद्रपुर शहर से रिपोर्टिंग करना चाहते हैं तो आपको पहले 25 हजार रुपये चैनल के नाम पर जमा करने होंगे अन्यथा आपको चैनल में नहीं लिया जायेगा. ये 25 हजार हमारे पास जमा होंगे और जब आप कोई विज्ञापन देंगे तो 60 प्रतिशत चैनल का और 30 प्रतिशत आपका, बाकी बचा 10 प्रतिशत. ये आप अपने 25 हजार से हर महीने या फिर विज्ञापन मिलने पर उससे कटौती कर लें.. अगर आप 25 हजार रुपये हमारे चैनल में जमा करते हैं तो हम आपको तुरंत चैनल का लेटर, बूम और आईडी दे देंगे. साथ में ये भी कहा कि चंद्रपुर शहर के लिए हमने किसी और को रख लिया है.

मैंने कहा कि कोई बात नहीं, मैं तो यहाँ जिला प्रतिनिधि के लिए आया हूं. तभी एंकर के साथ बैठे सज्जन ने अपने लैपटॉप द्वारा चंद्रपुर की जानकारी निकाली और खुश होकर कहा कि आपके चंद्रपुर जिले में कुल 15 तहसील हैं. आप एक काम करें. हर तहसील से 25 हजार रुपये निकालें और कुल तीन लाख 25 हजार रुपये हमारे चैनल के नाम से अपना सिकुरिटी डिपोसिट करें. मेरे तो तब होश ही उड़ गए. मैंने कहा- मैं पत्रकार हूं, कोई विज्ञापनदाता नहीं. नहीं करना आपके चैनल में काम… राम राम….
फिर जैसे ही मैं केबिन के बाहर निकला तो देखा कि चैनल के एमडी अनिल महाजन सभी नियुक्त उम्मीदवारों (नए पत्रकारों को) को चैनल के बैंक खाते का नम्बर दे रहे थे… इस चैनल के कुछ लोग एमके न्यूज़ से आये हुए हैं जो अब एकांतवास में चला गया है..
ये है आज के चैनल के मालिक. अब नौसिखिये भी पत्रकारिता करेंगे. वो भी पैसे देकर… इस क्षेत्र में मैं पिछले चौदह सालों से कार्यरत हुं लेकिन इन १४ सालों में ये मेरा पहला अनुभव था…
क्या अब पत्रकारिता और पत्रकारों का दौर ख़त्म हो रहा है… अब सिर्फ पैसे देकर ही पत्रकार जन्म लेंगे?
प्रकाश डि. हांडे
चंद्रपूर, (महाराष्ट्र)
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