सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर की तरफ से उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सुरक्षाकर्मी दिये जाने के सम्बन्ध में जारी दो शासनादेशों को चुनौती देती पीआईएल संख्या 6509/2013 पर इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच ने आज राज्य सरकार से दस दिनों के अन्दर अनुमन्य लोगों के अलावा अन्य लोगों को सुरक्षा प्रदान किये जाने की पूरी सूची दिए जाने के आदेश दिए हैं.
जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने गलत ढंग से लोगों को सुरक्षा दिए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार से यह भी बताने को कहा कि इनमें से प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा किनकी संस्तुति पर दी गयी है. कोर्ट ने पूछा है कि जिन लोगों को निजी व्यय पर सुरक्षा प्रदान की गयी है, उनके द्वारा यह धनराशि जमा कराया गया है अथवा नहीं. कोर्ट ने इन सभी बिन्दुओं पर विस्तृत आख्या देने को कहा है.
याचिका में डॉ ठाकुर ने एमएलए, एमपी, पूर्व एमएलए/एमपी, निगमों के अध्यक्ष आदि को सुरक्षा देने विषयक 05 मई 2008 और 11 जनवरी 2013 के शासनादेश को आम जन के लिए विभेदकारी बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है.





