भड़ास4मीडिया डॉट कॉम के सम्पादक यशवंत की किताब "जानेमन जेल" कल मेरे पास आई. यशवंत भाई की मोहब्बत है कि एक बार फोन काल करने पर उन्होंने किताब अपने पब्लिशर को मेरा पता देकर भिजवा दी. देखने के लिए खोला तो एक पेज पढने का मन हुआ और जब एक पेज पढने लगा तो पूरी किताब पढ़े बिना चैन नहीं आया. जेल जाने को भी ख़ुशनसीबी समझना और बिना झुके उसूलों को बरक़रार रखने का हुनर भाई यशवंत से कोई सीखे।
जेल जाना दूसरों के लिए चाहे मुसीबत हो लेकिन यशवंत भाई के लिए मनोरंजक घटना है और उन्होंने खूब जिया। किताब अपने आप में एक फ़लसफ़ा है जिसे बहुत ही खूबसूरती से बयां किया गया है. जो इमारत बाहर से जेल कही जाती है अन्दर कितना दर्द है, इसे यशवंत जैसा शख्स ही महसूस कर सकता है. जेल के बाहर भी उत्सव और अन्दर भी जश्न, ये कमाल सिर्फ भाई यशवंत ही कर सकता है. कॉरपोरेट घराने यशवंत को जेल तो भिजवा सकते हैं लेकिन जश्न मनाने से नहीं रोक सकते। 'जानेमन जेल' लिखने से कैसे रोकेंगे।
यशवंत जैसे लोग ज़ुल्म से ना टूट सकते हैं और ना ही उसके आगे झुक सकते हैं. अजीब जीवट वाला आदमी है ये. आज के पाखंडी दौर में इन्क़लाब की शमा उठाये रखने वाले दीवाने यशवंत नाम के भगत सिंह को सलाम। भाई इस शमा को यूँ ही

नासिर ज़ैदी
आमीन।
लेखक नासिर ज़ैदी एचबीसी न्यूज, बीकानेर के ब्यूरो चीफ हैं. उनसे संपर्क 09460355786 या 09462322786 के जरिए किया जा सकता है.
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