जयपुर। 1982 से प्रकाशित पाक्षिक समाचार पत्र 'राजस्थान सम्राट’ का नया रूप सामने आया है। वरिष्ठ पत्रकार अवधेश आकोदिया ने इसे रीलॉन्च किया है। अब तक 8 पेज के टेबलायड अखबार के रूप में प्रकाशित हो रहे 'राजस्थान सम्राट’ का नया अंक मैगजीन के रूप में सामने आया है। पत्रिका की कवर स्टोरी वसुंधरा राजे के बदले हुए व्यवहार पर केंद्रित है। गौरतलब है कि राजस्थान की राजनीति में सक्रिय होने से लेकर अब तक राजे के व्यवहार में काफी परिवर्तन आए हैं।
इनमें से कुछ 'पॉजिटिव’ और कुछ 'निगेटिव’। पूरी तरह से राजस्थान पर 'फोकस्ड’ इस पत्रिका का नया कलेवर पाठकों को काफी पसंद आ रहा है। पत्रिका के संपादक अवधेश आकोदिया ने बताया कि 'वैसे तो राजस्थान में पत्रिकाओं की कमी नहीं है, लेकिन इनमें पूरी तरह से राजस्थान पर केंद्रित एक भी पत्रिका नहीं है। हमने इसी कमी को पूरा करने का प्रयास किया है। राजस्थान सम्राट पूरी तरह से राजस्थान को समर्पित पत्रिका है। पाठको को हमारा कन्सेप्ट पसंद आ रहा है।‘
68 पेज की इस मैगजीन में राजस्थान की कई चर्चित शख्सियतों को स्तंभकार के रूप में जोड़ा गया है। देश-दुनिया में तकनीक के क्षेत्र में होने वाले नवाचारों से रूबरू करवाने की जिम्मेदारी संभाली है बालेंदु शर्मा दाधीच ने। दाधीच की गिनती देश के श्रेष्ठ साइबर पत्रकारों में होती है। वे मूलत: राजस्थान के ही हैं। 'राजस्थान सम्राट’ में उनका 'स्मार्ट वॉच’ नाम से कॉलम है। कला-संस्कृति से जुड़ा 'यायावर’ कॉलम कला व संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार व्यास ने लिखा है। यायावरी में स्थान-विशेष की यात्रा भी होगी, संस्कृति से जुड़े उनके अनुभव भी, कला और कलाकार भी तो शब्दों से जुड़े संस्कृति के सरोकार भी। स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर 'जान है तो जहान है’ नाम से डॉ. वीरेंद्र सिंह का कॉलम है। वे सवाई मान ङ्क्षसह अस्पताल के अधीक्षक हैं। समाज के 'एलीट क्लास’ की इस शिकायत को दूर करने के लिए कि मीडिया दूसरों की खामियों का पोस्टमार्टम तो बखूबी करता है, लेकिन अपनी खामियों कभी नोटिस नहीं करता, 'राजस्थान सम्राट’ ने वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ का 'फोर्थ पिलर’ नाम से कॉलम प्रारंभ किया है। इसमें वे हर बार मीडिया से जुड़े मसलों पर रोशनी डालेंगे। इस बार उन्होंने 'पेड न्यूज’ के मुद्दे को खंगाला है। चुनाव के मौसम में, इससे अच्छा विषय और कोई हो भी नहीं सकता।
'राजस्थान सम्राट’ में राजस्थानी भाषा को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है। प्रदेश के साहित्यकारों की इस शिकायत को दूर करने के लिए कि परंपरागत मीडिया राजस्थानी भाषा को पर्याप्त तवज्जो नहीं देता, 'आपणी भाषा’ स्तंभ प्रारंभ किया है। इस बार साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित दुलाराम सहारण का आत्मकथ्य है। भविष्य में वे ही इस स्तंभ का जिम्मा संभालेंगे। ख्यात व्यंग्यकार अनुराग वाजपेयी का कॉलम 'खटराग’ भी पत्रिका में है। धर्म की चर्चा का जिम्मा दर्शन व संस्कृत के चर्चित विद्वान शास्त्री कोसलेंद्रदास के कंधों पर है। 'राजस्थान सम्राट’ के संपादक अवधेश आकोदिया बताते हैं कि 'हमने प्रत्येक क्षेत्र को विशेषज्ञ को अपने साथ जोडऩे का प्रयास किया है। कई चर्चित शख्सियतें हमसे जुड़ चुकी हैं और कई जुडऩे की प्रक्रिया में हैं। अपने क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों के जुडऩे से हमारी पत्रिका संभ्रांत वर्ग में चर्चा का विषय बन रही है।’
इस सवाल पर कि इस नए कलेवर को बरकरार रखना कितनी बड़ी चुनौती है, अवधेश आकोदिया कहते हैं कि 'हमने इस लायक संसाधन जुटाने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि इस दौरान हम उन व्याधियों से दूर रहेंगे, जिन्होंने 'कॉरपोरेट मीडिया’ को बुरी तरह से जकड़ रखा है। हम कोई 'क्रांति’ करने का दावा तो नहीं करते, लेकिन इतना यकीन जरूर दिला सकते हैं कि 'राजस्थान सम्राट’ में प्रासंगिक खबरें कभी हाशिए पर नहीं रहेंगी। हमारा फोकस निजी स्वार्थ पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्वार्थ के सवालों पर होगा।’





