'जिया न्यूज' नामक जो चैनल पिछले दिनों लांच किया गया, उसका शुरुआती प्रदर्शन काफी फीका बताया जाता है. चैनल कई जगहों पर दिखाई नहीं दे रहा. चैनल का कंटेंट, लेआउट और प्रजेंटेशन बेहद सामान्य सा है. न्यूज चैनलों के बीच जबरदस्त आपसी होड़ के बीच 'जिया न्यूज' का टोटल फील ऐसा नहीं है कि कहा जा सके- यह चैनल कुछ अलग और आक्रामक करता दिख रहा है. चैनल के अंदरखाने कई पावर सेंटर भी हैं जिसकी वजह से इंटरनल पालिटिक्स भी शुरू हो गई है.
सूत्रों का कहना है कि चैनल की जिम्मेदारी जिस ज्वाय सेबस्टियन को दी गई है, उनका ट्रैक रिकार्ड कोई ऐसा नहीं रहा है कि उनसे एक नए चैनल को सफलती की गारंटी के बारे में सोचा जा सकता हो. हां, ये जरूर है कि जब कोई एक नया चैनल लांच होता है तो उसकी स्थापना की प्रक्रिया में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं और इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपये की कमाई की गारंटी
चैनल लांचिंग की प्रक्रिया से जुड़े लोगों को होती है. यह इंडस्ट्री का स्थापित सच है और इस मिथ को रेयरेस्ट आफ रेयर की कोई कंपनी मालिक तोड़ पाया है. कहा ये जाता है कि जो टीम चैनल लांच कराती है, वो काफी मुनाफे में रहती है, भले ही चैनल पिट जाए. बाद में पुरानी टीम हटाकर जो नई टीम बनाई जाती है, वह चैनल चलाने को लेकर ज्यादा सीरियस रहती है क्योंकि वह कमाई में नहीं, कंटेंट और प्रदर्शन पर जोर देती है. फिलहाल तो 'जिया न्यूज' का हाल 'न्यूज नेशन' चैनल वाला होता दिख रहा है, न कोई पूछने वाला, न कोई देखने वाला, न कोई जानने वाला. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि कहीं ये चैनल लोकसभा चुनावों तक के लिए तो नहीं है? अगर लोकसभा बाद भी चैनल चला तो ये तय माना जा रहा है कि चैनल हेड लेवल पर बदलाव किए बिना चैनल का जोर पकड़ पाना असंभव है. चैनल चलाने के लिए एक डायनमिक टीम लीडर की जरूरत होती है जो कंटेंट के मामले में चैनल को न सिर्फ सुर्खियों में रखे बल्कि बाकी न्यूज चैनलों को पछाड़ सके.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
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