Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

उत्तराखंड

रेडीमेड मकानों के खिलाफ लामबंद हुए आपदा पीड़ित

: मुख्यमंत्री व नौकरशाह सांसत में : स्थानीय मकानों को हतोत्साहित करने में जुटी सरकार : लोगों को अपने गाँव व खेतों से उठाकर कम्पनियों द्वारा कारखानों में तैयार रेडीमेड (प्री फेब्रिकेटेड) घरों में बसाने की सरकारी योजना के खिलाफ अब केदारघाटी के आपदा पीड़ित लामबंद होने लगे हैं. मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने ऐलान किया है कि आपदा पीड़ित लोगों को दो कमरों वाले मकान दिए जायेंगे जिनकी कम्पनी कीमत 6 लाख रूपये है पर यदि कोई इन मकानों में नहीं रहना चाहता तो उसे सरकार अपना मकान बनाने के लिए 4 लाख रूपये देगी पर उसको स्थान का चुनाव कर सुरक्षा का प्रमाण पत्र जिलाधीश से लेना होगा।

: मुख्यमंत्री व नौकरशाह सांसत में : स्थानीय मकानों को हतोत्साहित करने में जुटी सरकार : लोगों को अपने गाँव व खेतों से उठाकर कम्पनियों द्वारा कारखानों में तैयार रेडीमेड (प्री फेब्रिकेटेड) घरों में बसाने की सरकारी योजना के खिलाफ अब केदारघाटी के आपदा पीड़ित लामबंद होने लगे हैं. मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने ऐलान किया है कि आपदा पीड़ित लोगों को दो कमरों वाले मकान दिए जायेंगे जिनकी कम्पनी कीमत 6 लाख रूपये है पर यदि कोई इन मकानों में नहीं रहना चाहता तो उसे सरकार अपना मकान बनाने के लिए 4 लाख रूपये देगी पर उसको स्थान का चुनाव कर सुरक्षा का प्रमाण पत्र जिलाधीश से लेना होगा।

सरकार की नीयत पर शक : आपदा पीड़ितों को सरकार की नीयत पर शक है उनका कहना है कि जब कम्पनी को सरकार 6 लाख रूपये दे रही है तो खुद अपना घर बनाने वालों को 2 लाख कम क्यों दिए जा रहे हैं? जबकि अपना घर बनाने वालों से स्थानीय मजदूरों, मिस्त्रियों सहित कई लोगों को रोजगार मिलेगा। कम्पनी के रेडीमेड मकानों से कम्पनी के अलावा किसी का भी लाभ नहीं हैं. आखिर सरकार का कम्पनी के पक्ष में इतना मोह क्यों?

रेडीमेड मकान पहाड़ी अर्थ व्यवस्था के खिलाफ : पहाड़ी मकानों में नीचे के तल पर पशु बांधे जाते हैं और प्रथम तल पर  परिवार खुद रहता है.रेडीमेड घरों में लोग अपने पशुओं को कहाँ बांधेगे? ठंड में लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाने से लेकर घरों को गरम किया जाता है रेडीमेड मकानों में इसकी कोई व्यवस्था नहीं है.
आपदा पीड़ितों का कहना है कि पहाड़ों से हर रोज सैकड़ों ट्रक लकड़ी मैदानों में लाने वाला वन निगम यदि रियायती दरों पर उन्हें लकड़ी उपलब्ध करवा दे तो वे अपना पहाड़ी शैली का भूकंप रोधी मकान बना कर पहाड़ की अर्थ व्यवस्था को फिर से जीवित कर सकते हैं.

सरकार कम्पनी के पक्ष में : सरकारी सूत्रों के अनुसार, रेडीमेड मकानों के खिलाफ तमाम जमीनी हकीकत होने के बावजूद सरकारी कारिंदे अब अपना आशियाना खुद बनाने वाले आपदा पीड़ितों को कैसे हतोत्साहित किया जाए ताकि लोग कम्पनी के मकानों को लेने के लिए मजबूर हों. इसके लिए एक नौकरशाह कुछ कड़े नियम बनाने में जुटा है.

रेडीमेड मकान पहले भी हुए फेल : उत्तरकाशी 1992 में आये विनाशकारी भूकम्प  के बाद आईआईटी रूडकी और टाटा ने भूकंप रोधी मकान बनाए थे जिन में टीन (लोहे की चादर)  का प्रयोग किया गया था जिनमें गर्मियों व कड़ाके की ठण्ड में रहना मुश्किल हो गया था. जिससे कुछ ही माह में लोगों ने वह रेडीमेड सेल्टर छोड़ दिए थे और वह योजना पूरी तरह फेल हो गई, पर लगता है बहुगुणा सरकार पिछली असफलताओं से भी कुछ सीखने को तैयार नहीं हैं.

देहरादून से विजेन्द्र रावत की रिपोर्ट.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...