प्रिय यशवंत जी, पैसों के खेल में चोर को भी प्रेरणादायक बना देते हैं ये अखबार वाले. ऐसा ही कुछ किया है प्रभात खबर वालों ने. जादूगोड़ा में अवैध चिटफंड संचालक कमल सिंह के अवैध कारोबार के बारे में सबकुछ जानते हुए भी उसकी सच्चाई लोगों तक नहीं पहुंचाकर और उसका महिमामंडन कर प्रभात खबर ने बड़ा अपराध किया है. कमल से चार लाख का विज्ञापन लेकर १२/०६/२०१३ को न्यूज़ के रूप में इसका महिमामंडन प्रभात खबर अखबार में इसके जादूगोड़ा रिपोर्टर ने प्रकाशित कर दिया.
मजेदार है कि हेडिंग तक इस खबर में गलत है. इबारत की जगह इबादत लिखा है. चिटफंडियों की जय-जयकार से आम लोगों का इस फ्राड लोगों में भरोसा पैदा हो गया. चिटफंडियों को जनता में मान्यता दिलाने का सबसे अधिक श्रेय जादूगोड़ा के प्रभात खबर के पत्रकार को जाता है जिन्होंने चार लाख में पन्द्रह प्रतिशत कमीशन यानी 60 हजार के लोभ में ऐसा पेड न्यूज लिखा और प्रकाशित करा दिया.
लेकिन इस न्यूज़ का दुष्परिणाम इतना हुआ कि न्यूज़ देखकर लोगों को इस चिटफंड कंपनी पर और अधिक विश्वास हो गया और लोगों ने अरबों रुपये निवेश कर डाले. इस न्यूज़ के माध्यम से प्रभात खबर ने अप्रत्यक्ष रूप से चिटफंड कंपनी को लाभ पहुंचाया. सबकुछ जानते हुए भी प्रभात खबर ने अपना सामाजिक दायित्व निभाते हुए कभी भी इस चिटफंड कंपनी के खिलाफ कुछ नहीं छापा और इसका एक ही कारण था प्रभात खबर का स्थानीय पत्रकार जो कमल सिंह का खासमखास था और मोटा विज्ञापन जो प्रभात खबर वाले कमल सिंह से वसूल रहें थे.
प्रभात वालों ने २०१३ का पूरा पंचांग कमल सिंह के राज कॉम के नाम से छापा था, और कमल द्वारा दिए गए विज्ञापन का एक ही मतलब था कि मेरे अवैध कारोबार के बारे में अखबार में नहीं छापा जाए, एक तरह से विज्ञापन के नाम से सौदा किया गया था कि आप हमें खुश रखे हमें जनता से क्या मतलब.
…प्रभात खबर में चिटफंडियों के समर्थन में प्रकाशित पेड न्यूज को पढ़ने के लिए नीचे जो पेपर कटिंग है, उस पर क्लिक कर दें…
चिटफंड संचालकों द्वारा जादूगोड़ा वासियों के अरबों डुबाकर भाग जाने के बाद भी इन पत्रकार महोदय द्वारा बराबर अखबार में यह प्रकाशित किया जा रहा है कि कमल सिंह ने घर बनाने के नाम पर लोगों से करोड़ों का कर्जा लिया था. परन्तु कमल तो सिर्फ दो साल से घर बना रहा था जबकि यह कारोबार ६ सालों से चल रहा है. इन्हें कोई समझाने वाला नहीं है कि चीटिंग करके पैसा लेना ही चिटफंड है. इन पत्रकार महोदय ने कभी भी यह नहीं लिखा कि क्या था कमल का कारोबार और वह लोगों को देने के लिए पांच प्रतिशत का ब्याज और एक प्रतिशत एजेंट का कमीशन यानी ६ प्रतिशत कहाँ से लाता था.
यहाँ यह भी बताना जरूरी है कि प्रभात खबर के न्यूज़ के अनुसार कमल के पिता मुनमुन सिंह ने अपने रिटायरमेंट के पैसों से इतना बड़ा कारोबार खड़ा किया, लेकिन मुनमुन सिंह के दोनों बेटों कमल और उसके भाई दीपक के भाग जाने के बाद एक बार भी अखबार ने यह नहीं छापा कि यह सब मुनमुन सिंह का था और न ही यह छापा की मुनमुन सिंह और उनके बेटों ने चिटफंड के पैसो से रची थी सफलता की इबारत.
अंत में इन जैसे पत्रकारों के लिए एक बात कहना चाहूंगा. पैसा कमाना अच्छी बात है, लेकिन दूसरों को बर्बाद कर पैसा कमाना बहुत ही गलत है. अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को गढ्ढे में मत डालो क्योंकि ऊपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती और एक बात कभी मत भूलो कि ऊपरवाला सब देख रहा है.
जादूगोड़ा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






